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आशीर्वाद से पूरी होगी राहुल गांधी की अधूरी मनोकामना, जल, जंगल और जमीन के हक से दक्षिण राजस्थान जीतने की कवायद!

By प्रदीप द्विवेदी | Updated: April 25, 2019 06:08 IST

कांग्रेस के इस गढ़ पर पिछले लोस चुनाव में बीजेपी ने कब्जा कर लिया था, लेकिन विस चुनाव 2018 के दौरान यहां नए दल बीटीपी का प्रभावी उदय हुआ तो यहां की राजनीतिक तस्वीर ही बदल गई है और इसीलिए इस क्षेत्र में कांग्रेस और बीजेपी के हार-जीत का गणित बीटीपी को मिलने वाले वोटों पर निर्भर है.

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ठळक मुद्दे राहुल गांधी ने आदिवासियों के प्रमुख धार्मिक स्थल बेणेश्वर धाम मंदिर में पूजा-अर्चना की2019 में देशभर के आदिवासियों को जल, जंगल और जमीन का अधिकार दिया जाएगा.

विधानसभा चुनाव 2018 के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दक्षिण राजस्थान में आदिवासियों के महातीर्थ बेणेश्वर धाम में जनसभा की थी, लेकिन वे बेणेश्वर धाम में दर्शनार्थ नहीं जा पाए थे. इस बार लोस चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उसी क्षेत्र में सभा की और वे बेणेश्वर मंदिर में दर्शनार्थ भी गए. बेणेश्वर धाम को आदिवासियों का कुंभ कहा जाता है. यहां संभवतया देश का एकमात्र ऐसा शिवालय है, जहां खंडित शिवलिंग की पूजा की जाती है. 

धर्मधारणा है कि यहां पूजा-अर्चना से व्यक्ति की अधूरी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आदिवासियों के प्रमुख धार्मिक स्थल बेणेश्वर धाम मंदिर में पूजा-अर्चना की ही, उन्होंने यहां राधा-कृष्ण मंदिर, शिवालय सहित अन्य प्रमुख मंदिरों में भी दर्शन किए और महंत अच्युतानंद और मावती महाराज के बारे में जानकारी प्राप्त की. इस अवसर पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उप-मुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट, कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडे सहित कई नेता भी मौजूद थे. 

पूजा-दर्शन के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने यहां जनसभा को संबोधित किया और केंद्र की मोदी सरकार पर आदिवासियों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाते हुए कहा कि- 2019 में देशभर के आदिवासियों को जल, जंगल और जमीन का अधिकार दिया जाएगा.

दक्षिण राजस्थान के प्रमुख कांग्रेस नेता और अजा-जजा आयोग के पूर्व अध्यक्ष दिवंगत भीखाभाई के समय में जल, जंगल और जमीन अधिकार पर कई निर्णय लिए गए थे, जिनमें आदिवासियों को कई तरह के अधिकार दिए गए थे.

राहुल गांधी ने जल, जंगल और जमीन अधिकार के अलावा किसानों के संरक्षण लिए भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लेने का भरोसा दिलाया. उन्होंने कहा कि- यूपीए सरकार के सत्ता में आते ही 2019 में दो बजट बनेंगे, एक- राष्ट्रीय बजट और दूसरा- विशेष किसान बजट. किसान बजट में साल की शुरूआत में ही तय हो जाएगा कि कहां किसानों को कर्ज मिलेगा, कितना कर्ज मिलेगा, उनकी फसल का समर्थन मूल्य क्या होगा और कितना मुआवजा मिलेगा.

उन्होंने यह भी कहा कि- 2019 के बाद कानून बदला जाएगा ताकि कर्ज नहीं चुकाने वाले किसी भी किसान को जेल नहीं जाना पड़ेगा. 

दूसरे बड़े मुद्दे- बेरोजगारी पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र के विभिन्न मंत्रालयों में 22 लाख सरकारी नौकरियां खाली पड़ी है. इस बार 2019 में सत्ता में आते ही हम 22 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने के साथ ही 10 लाख युवाओं को भी पंचायतों में रोजगार दिया जाएगा. यही नहीं, कांग्रेस के सत्ता में आने पर मनरेगा में 100 दिन के स्थान पर 150 दिन का काम मिलेगा. उन्होंने कहा- हम पांच साल न्याय करेंगे, गरीबी को हिंदुस्तान से मिटाने का काम करेंगे.

इस मौके पर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा, उन्होंने कहा कि पिछले 5 साल में पीएम मोदी ने सिर्फ 15 उद्योगपतियों के लिए सरकार चलाई और सिर्फ किसानों का नुकसान किया है. पिछले पांच साल में सबसे ज्यादा नुकसान आदिवासियों का हुआ है, लेकिन अगले 5 साल सिर्फ न्याय ही होगा. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने 15 लाख का वादा किया, लेकिन किसी एक को भी पैसा नहीं मिला है. मैं 15 लाख रुपये का झूठ नहीं बोलूंगा, लेकिन हमने 72 हजार रुपये देने का वादा किया, जिससे देश के 5 करोड़ लोगों को फायदा होगा. हम न्याय योजना के तहत देश की 20 फीसदी गरीब जनता को 72 हजार रुपये सालाना देंगे.

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के इस गढ़ पर पिछले लोस चुनाव में बीजेपी ने कब्जा कर लिया था, लेकिन विस चुनाव 2018 के दौरान यहां नए दल बीटीपी का प्रभावी उदय हुआ तो यहां की राजनीतिक तस्वीर ही बदल गई है और इसीलिए इस क्षेत्र में कांग्रेस और बीजेपी के हार-जीत का गणित बीटीपी को मिलने वाले वोटों पर निर्भर है. 

ऐसे हुआ शिवलिंग खंडित...

राजस्थान विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष महारावल स्वर्गीय लक्ष्मणसिंह बेणेश्वर के परमभक्त थे. वे नियमितरूप से औदिच्यधाम बेणेश्वर पूजा करने जाते थे. उन्होंने बताया था कि- वे बचपन से बेणेश्वर शिवलिंग की पूजा करते रहे हैं और उन्होंने देखा है कि इस शिवलिंग का आकार अपनेआप बढ़ता जा रहा है. प्राचीन समय में स्वयंभू बेणेश्वर शिवलिंग पर एक गाय प्रतिदिन दूध चढ़ाती थी. गोशाला में यह गाय दूध नहीं दे रही थी, जिससे ग्वाला परेशान था. ग्वाले ने यह जानने की कोशिश की कि आखिर गाय का दूध कौन ले जा रहा है? एक दिन ग्वाले ने गाय का पीछा किया तो उसने देखा कि गाय, शिवलिंग पर दूध चढ़ा रही है. गाय ने अचानक वहां ग्वाले को देखा तो वह जल्दी से वहां से जाने लगी. इसी दौरान गाय के पैर का खुर शिवलिंग से टकरा गया और शिवलिंग खंडित हो गया.

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