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लोकसभा चुनावः न राम मंदिर, न धारा 370, गरीबों के लिए योजनाएं हैं मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि?

By प्रदीप द्विवेदी | Updated: February 21, 2019 22:51 IST

पीएम मोदी सरकार ने गरीबों के लिए सरकारी योजनाओं के विस्तार के क्षेत्र में सबसे अच्छा काम किया है.

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ठळक मुद्दे 17.84 प्रतिशत लोग उरी हमले के बाद आतंकवादियों के खिलाफ की गई 2014 में गांधी जयंती से शुरू हुआ स्वच्छ भारत अभियान मोदी सरकार की सबसे बड़ी कामयाबी है

देश के एक मीडिया ग्रुप के ऑनलाइन मेगा पोल पर भरोसा करें तो जनता की नजरों में पांच वर्षों में पीएम मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि गरीबों के लिए सरकारी योजनाओं का विस्तार है. इसमें 34.39 प्रतिशत लोगों का मानना हैं कि- पीएम मोदी सरकार ने गरीबों के लिए सरकारी योजनाओं के विस्तार के क्षेत्र में सबसे अच्छा काम किया है. 

दिलचस्प बात यह है कि राम मंदिर, धारा 370, भ्रष्टाचार, रोजगार, किसानों की समस्याएं जैसे जिन प्रमुख मुद्दों पर 2014 में नरेन्द्र मोदी को जनता ने समर्थन दिया था, वे मुद्दे वैसे ही हैं, लिहाजा ये प्रमुख उपलब्धियों की सूची से बाहर हैं.  

मजेदार बात यह भी है कि उरी हमले के बाद आतंकवादियों के खिलाफ की गई सर्जिकल स्ट्राइक, जिसके सियासी दूरूपयोग की लगातार कोशिश की गई, उसे भी लोगों ने अंतिम पांचवें नंबर की उपलब्धि माना है, 17.84 प्रतिशत लोग उरी हमले के बाद आतंकवादियों के खिलाफ की गई सर्जिकल स्ट्राइक को सबसे बड़ी सफलता मानते हैं. यह इस प्रश्न के उत्तर में सबसे कम वोट पाने वाला विकल्प रहा है. 

वैसे तो जीएसटी को लेकर जनता में कुछ खास खुशी का अहसास नहीं है, बावजूद इसके पोल में शामिल 29.09 प्रतिशत लोग मानते हैं कि जीएसटी लागू करना मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि है. इसके बाद 18.68 प्रतिशत लोग मानते हैं कि 2014 में गांधी जयंती से शुरू हुआ स्वच्छ भारत अभियान मोदी सरकार की सबसे बड़ी कामयाबी है. 

उल्लेखनीय है कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत अभी तक देश में लाखों शौचालय बनाए जा चुके हैं, सरकार ने स्वच्छ शहरों को सूचीबद्ध किया है तथा विभिन्न रिपोर्टों के आधार पर कई जिले खुले में शौच से मुक्त भी घोषित किए जा चुके हैं. 

लेकिन, इन उपलब्धियों की ग्राउंड रिपोर्ट, प्रस्तुत सरकारी आंकड़ों से थोड़ी अलग है, इसीलिए राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ये तमाम उपलब्धियां प्रत्यक्ष नहीं हैं, ये धारणा आधारित उपलब्धियां हैं, जिसके कारण न तो इन पर मतैक्य हो सकता है और न ही इनका कोई बड़ा सियासी फायदा बीजेपी को मिल सकता है. 

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि- राम मंदिर, धारा 370, भ्रष्टाचार, रोजगार, किसानों की समस्याएं जैसे जिन प्रमुख मुद्दों को लेकर 2014 का चुनाव लड़ा गया था, उन पर जनता को क्या जवाब दिया जाएगा?

सियासी संकेत यही हैं कि विभिन्न प्रमुख मुद्दों को लेकर पीएम मोदी सरकार की खामोशी, आगामी लोस चुनाव में बीजेपी की मुश्किलें बढ़ाएगी, क्योंकि जनता सरकारी आंकड़ों के नहीं, व्यक्तिगत अहसास के आधार पर मतदान करती रही है! 

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