Lok Sabha Election 2019: लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में विभिन्न मुद्दों पर जवाब दिए। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में लागू धारा 370 और 35ए पर भी बात की। पीएम मोदी ने कहा, ''कश्मीर की समस्या की जड़ बैठे हुए वहां 50 पॉलिटिकल परिवार हैं, ये सारी मलाई इतने साल इन्हीं कुछ परिवारों ने खाई है, कश्मीर के सामान्य मानवीय को कोई भी फायदा ये पहुंचने ही नहीं देते हैं और इस प्रकार के इमोशनल इश्यू बनाके अपनी राजनीति चला रहे हैं। इन दिनों भारत सरकार की तरफ से हावाला वगैरह के विषय को लेकर के इनका बैक डिपार्टमेंट वहां काम कर रहा है। करप्शन के खिलाफ कुछ काम कर रहा है। आप हैरान हो जाएंगे आतंकवादियों के घटना के समय पाकिस्तान से पैसा लेकर के पत्थर मारने वाले तो आ जाते हैं लेकिन जब एनआईए के द्वारा ये इनकम टैक्स विभाग की जो रेड पड़ती है, भ्रष्टाचारियों पर कदम उठाए जाते हैं तो वही नागरिक वहां बाहर खड़े रहकर के ताली बजाते हैं। इसलिए कश्मीर का सामान्य मानवी इन लोगों से मुक्ति चाहती है। जिन परिवारों ने 50 साल से कब्जा किया हुआ है और इसलिए कश्मीर की स्थिति ऐसी है कि वहां की जनता ही अब बदलाव चाहती है। चाहे वो 370 का मामला हो, 35ए का मामला हो।
एक तो ये समस्या बहुत पुरानी है, अच्छा होता अगर ये जम्मू-कश्मीर का मामला सरदार पटेल के पास होता तो आज जो मुसीबत हम झेल रहे हैं वो नहीं झेलनी पड़ती। उन्होंने इसका रास्ता वैसे ही निकाला होता जैसे जूनागढ़ का निकाला.. जैसे निजाम का निकाला.. इसका भी निकालते लेकिन एक तो ये मामला पंडित नेहरू ने अपने पास रखा और तभी से लेकर के विवादों में घिरा रहा है। अब तक हमारे हजारों जवान मरे हैं। विकास के लिए बजट में कभी कोई कमी नहीं आई खूब खर्च हुआ है। इसलिए भारत की तरफ से कभी भी कश्मीर को थोड़ा सा भी बुरा लगे या अन्याय हुआ ऐसी कोई घटना कभी भी नहीं हुई है लेकिन इस समस्या को समझकर के उसको हैंडल करना चाहिए।
इसमें पहले की सरकारों में कोई न कोई कमी रही है। दूसरी बात है कश्मीर के लद्दाख में कोई प्रॉब्लम हैं? नहीं है। जम्मू में कोई प्रॉब्लम है? नहीं है। श्रीनगर के अंदर.. वैली में एक ढाई डिस्ट्रिक्ट है.. जहां ये समस्या है.. इस ढाई डिस्ट्रिक्ट की घटनाओं को हम पूरे जम्मू-कश्मीर की घटनाओं के रूप में देखते हैं। एक तो एक बार ये नैरेटिव बदलना चाहिए और उसमें मीडिया के लोगों को भी मदद करनी चाहिए। दूसरा वहीं जो काम हो रहे हैं अब देखिए स्पोर्ट्स में.. वहां कि बच्चे होनहार.. आगे आ रहे हैं.. कम्पीटीटिव एग्जामिनेशंस में बच्चे आगे आ रहे हैं, आज हिंदुस्तान की किसी भी टॉप यूनिवर्सिटी में जाइये कोई न कोई कश्मीर का बच्चा वहां पढ़ रहा है। ये सारी चीजें हो रही हैं। इसे हमें बल देना चाहिए।
अभी वहां पंचायत के चुनाव हुए। 70 से 72 परसेंट वोटिंग हुई और हजारों की तादाद में पंच-सरपंच जीतकर आए.. जो कई दिनों से लटका पड़ा था.. वो अब काम में लग गए.. उनको अवसर मिल गया.. उसी प्रकार से जम्मू-कश्मीर में इन्वेस्टमेंट आना चाहिए, नए रोजगार बढ़ने चाहिए, नए रोजगार के अंदर वहां के जो 35ए या 370 ये रुकावट बनी हुई है। कई इन्वेस्टमेंट करने के लिए जाता नहीं है। वहां आप आईआईएम बनाओ लेकिन प्रोफेसर जाने को तैयार नहीं क्योंकि प्रोफेसर जाएगा और उसके बच्चों को एडमिशन चाहिए तो कानून आड़े आता है। उसको मकान चाहिए तो कानून रुकावट करता है.. और उसके कारण जम्मू-कश्मीर के लोगों का बहुत नुकसान हो रहा है, जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए कुछ ऐसे नियम बनाकर के पंडित नेहरू जी गए हैं जो बहुत मुश्किल कर रहे हैं।''