बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने उठाया सवाल, कहा- बिहार में 40 हजार करोड़ रुपये की एक समानांतर अवैध अर्थव्यवस्था खड़ी हो गई है

By एस पी सिन्हा | Updated: April 6, 2026 16:20 IST2026-04-06T16:20:28+5:302026-04-06T16:20:28+5:30

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी एक पोस्ट में तेजस्वी ने आरोप लगाया कि शराबबंदी के नाम पर बिहार में 40 हजार करोड़ रुपये की एक समानांतर अवैध अर्थव्यवस्था खड़ी हो गई है, जिसका सीधा फायदा शराब माफिया और शासन-प्रशासन के नापाक गठजोड़ को मिल रहा है।

Leader of the Opposition Tejashwi Yadav has raised questions regarding the liquor prohibition law in Bihar, stating that a parallel illegal economy worth ₹40,000 crore has emerged in the state | बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने उठाया सवाल, कहा- बिहार में 40 हजार करोड़ रुपये की एक समानांतर अवैध अर्थव्यवस्था खड़ी हो गई है

बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने उठाया सवाल, कहा- बिहार में 40 हजार करोड़ रुपये की एक समानांतर अवैध अर्थव्यवस्था खड़ी हो गई है

पटना:बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद धड़ल्ले से शराब का अवैध कालाबाजारी जारी रहने पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार पर हमला बोलते हुए शराबबंदी को सबसे बड़ा ‘सांस्थानिक भ्रष्टाचार’ करार दिया है। उन्होंने नीतीश सरकार से पूछा है कि आखिरी शराबबंदी की विफलता दोषी है कौन? सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी एक पोस्ट में तेजस्वी ने आरोप लगाया कि शराबबंदी के नाम पर बिहार में 40 हजार करोड़ रुपये की एक समानांतर अवैध अर्थव्यवस्था खड़ी हो गई है, जिसका सीधा फायदा शराब माफिया और शासन-प्रशासन के नापाक गठजोड़ को मिल रहा है।

तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि शराबबंदी की विफलता का दोषी कौन? मेरे सवालों, तर्कों और तथ्यों का जवाब दें। शराबबंदी कानून को लागू किए कल 10 वर्ष पूर्ण हुए लेकिन यह शासन-प्रशासन और शराब माफिया के नापाक मजबूत गठजोड़ की बदौलत यह क़ानून अपने उद्देश्य की पूर्ति में एकदम विफल रहा। शराबबंदी नीतीश कुमार का सबसे बड़ा सांस्थानिक भ्रष्टाचार साबित हुआ। इसके कारण बिहार में 40 हज़ार करोड़ की अवैध समानांतर अर्थव्यवस्था खड़ी हो गई है। शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन की देखरेख वाले गृह और मद्य निषेध विभाग भी अधिकांश इनके पास ही रहे है। 

तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में कहा कि शराबबंदी लागू हुए एक दशक बीत चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट दिखाई देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून के बावजूद बिहार में अवैध शराब का नेटवर्क मजबूत हुआ है और एक समानांतर अर्थव्यवस्था खड़ी हो गई है। तेजस्वी ने दावा किया कि अब तक 11 लाख से अधिक केस दर्ज हुए और 16 लाख लोगों की गिरफ्तारी हुई है। इसके साथ ही 5 करोड़ लीटर से ज्यादा शराब जब्त की गई है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब इतनी बड़ी मात्रा में शराब बरामद हो रही है, तो आखिर इसकी सप्लाई चेन कहां से संचालित हो रही है। 

अपने पोस्ट में उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून का सबसे ज्यादा असर गरीब, दलित और पिछड़े वर्ग पर पड़ा है। तेजस्वी के अनुसार, बड़े तस्कर और नेटवर्क से जुड़े लोग अब भी कानून की पकड़ से बाहर हैं, जबकि छोटे स्तर के लोगों पर कार्रवाई हो रही है। तेजस्वी यादव ने शासन-प्रशासन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अगर रोज हजारों लीटर शराब पकड़ी जा रही है, तो यह साफ संकेत है कि सिस्टम के भीतर कहीं न कहीं गड़बड़ी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि सिर्फ जब्ती नहीं, बल्कि खपत के वास्तविक आंकड़े भी सार्वजनिक किए जाएं। शराबबंदी को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए तेजस्वी ने इतिहास के पन्ने पलटे हैं। 

उन्होंने बताया कि 2005 तक पूरे बिहार में केवल 3000 शराब की दुकानें थीं, लेकिन 10 वर्षों के भीतर यह संख्या बढ़कर 6000 हो गई। जिस बिहार में प्रतिवर्ष औसतन 51 दुकानें खुलती थीं, वहां मौजूदा सरकार हर साल 300 दुकानें खुलने लगीं। तेजस्वी का आरोप है कि पहले बिहार सरकार ने हर घर तक शराब पहुंचाई और अब सुधारक बनने का ‘स्वांग’ रच रहे हैं ताकि भ्रष्टाचार का नया रास्ता खुल सके।

Web Title: Leader of the Opposition Tejashwi Yadav has raised questions regarding the liquor prohibition law in Bihar, stating that a parallel illegal economy worth ₹40,000 crore has emerged in the state

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