लाइव न्यूज़ :

एनएचआरसी की रिपोर्ट पर हलफनामा देने के लिए बंगाल सरकार के पास ‘आखिरी मौका’: अदालत

By भाषा | Updated: July 22, 2021 22:49 IST

Open in App

कोलकाता, 22 जुलाई कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल सरकार को राज्य में चुनाव बाद हुई हिंसा के मामले में तैयार एनएचआरसी की रिपोर्ट पर हलफनामे के जरिये 26 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का ‘अंतिम मौका’ दिया।

उच्च न्यायालय की पांच न्यायाधीशों की पीठ पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद कथित तौर पर लोगों पर हमले करने, घरों से भागने पर मजबूर करने और संपत्ति को नष्ट करने के खिलाफ दाखिल कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। अदालत ने राज्य सरकार को 26 जुलाई तक हलफनामा दाखिल करने को कहा है। वहीं, इस मामले पर अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।

पीठ ने राज्य सरकार के वकील के उस अनुरोध पर संज्ञान लिया जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) द्वारा दी गई रिपोर्ट पर जवाब दाखिल करने के लिए और समय का अनुरोध किया था। अदालत ने कहा कि पिछले सुनवाई के दौरान समय दिया गया था लेकिन हलफनामा दाखिल नहीं किया गया।

पीठ ने कहा, ‘‘26 जुलाई 2021 तक हलफनामा दाखिल करने का आखिरी मौका दिया जाता है। इस पीठ में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल के अलावा न्यायमूर्ति आईपी मुखर्जी, न्यायमूर्ति हरीश टंडन, न्यायमूर्ति सौमेन सेन और न्यायमूर्ति सुब्रत तालुकदार शामिल हैं।

अदालत ने इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा रिपोर्ट में एनेक्चर-1 की प्रति मुहैया कराने के अनुरोध को भी अस्वीकार कर दिया। पीठ ने कहा,‘‘हम उसकी प्रति मुहैया कराने की जरूरत नहीं समझते जिसमें यौन हिंसा पीड़ितों के नाम दर्ज हैं। पूर्ण रिपोर्ट जांच एजेंसी/अधिकारी को सौंपी जाएगी जो मामले की जांच करेगा।’’

राज्य की ममता बनर्जी सरकार पर लगे आरोपों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि राज्य में स्थिति ‘कानून के राज’ के बजाय ‘ राजा के राज’ जैसी है।

सात सदस्यीय समिति ने 13 जुलाई को उच्च न्यायालय में अपनी रिपोर्ट जमा की, जिसमें अनुशंसा की गई है कि हत्या और दुष्कर्म जैसे गंभीर मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए और इन मामलों की सुनवाई राज्य से बाहर होनी चाहिए।

एक प्रतिवादी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दावा किया कि एनएचआरसी की रिपोर्ट में अनियमितता है और इसमें अपराध के उन आरोपों को शामिल किया है जो दो मई को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले के हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रिपोर्ट में राजनीतिक पहलू की बू आ रही है।

एक याचिकाकर्ता का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने अदालत के समक्ष कहा कि एनएचआरसी की रिपोर्ट पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था की सही स्थिति को प्रतिबिंबित करती है।

उन्होंने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की पीठ से अनुरोध किया कि हत्या और दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों की जांच स्वतंत्र जांच एजेंसी को दी जाए ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।

एनएचआरसी ने अपनी रिपोर्ट में राज्य में सत्तारूढ़ दल के समर्थकों द्वारा मुख्य विपक्षी पार्टी के लोगों पर ‘प्रतिशोधात्मक हिंसा’ की भी चर्चा की है। वहीं, एनएचआरसी की टिप्पणी की आलोचना करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा नीत केंद्र सरकार ‘‘ राजनीतिक हिसाब चुकता करने के लिए निष्पक्ष एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है और राज्य को बदनाम कर रही है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Open in App

संबंधित खबरें

पूजा पाठPanchang 07 April 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

पूजा पाठRashifal 07 April 2026: आज नौकरी में तरक्की, धन-संपत्ति में बढ़ोतरी के शुभ योग

स्वास्थ्यविश्व स्वास्थ्य दिवसः वैज्ञानिक सोच से बदलेगी सेहत की तस्वीर

विश्वयदि ईरान पर जमीनी हमला हुआ तो...

ज़रा हटकेVIDEO: पूजा करने गया था श्रद्धालु, मंदिर में ही हो गई पिटाई – CCTV फुटेज वायरल

भारत अधिक खबरें

भारतWest Bengal: विधानसभा चुनावों से पहले बंगाल की वोटर लिस्ट से करीब 90 लाख नाम हटाए गए

भारतAssam Opinion Poll 2026: बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए और भी बड़े बहुमत के साथ सत्ता में बना रहेगा, Matrize का अनुमान

भारतयूपी में सरकारी वकीलों की फीस 50% तक बढ़ाएगी सरकार, सरकारी खजाने पर बढ़ेगा 120 करोड़ रुपए का बोझ

भारत'मेरे पति 40 साल के हैं, मैं 19 की': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में महिला ने अपने प्रेमी के साथ रहने का अधिकार जीता

भारत'IIT बाबा' अभय सिंह ने कर्नाटक की इंजीनियर से शादी की, पत्नी के साथ हरियाणा में अपने पैतृक गांव पहुंचे