जेल में लालू के साथ हैं ये हाई प्रोफाइल कैदी, जानिए किस आरोप में हैं बंद?   

By रामदीप मिश्रा | Updated: January 4, 2018 20:56 IST2018-01-04T20:42:56+5:302018-01-04T20:56:37+5:30

लालू प्रसाद यादव को झारखंड के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में उन कैदियों का साथ मिला है जो संगीन अपराधों के आरोप में बंद हैं।

lalu prasad yadav birsa munda jail and high profile prisoners | जेल में लालू के साथ हैं ये हाई प्रोफाइल कैदी, जानिए किस आरोप में हैं बंद?   

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चारा घोटाला मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव इस समय झारखंड के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में बंद हैं। इस कारागार में उच्च श्रेणी के कैदियों के लिए 10 डिवीजन वार्ड बनाए गए हैं, जिनमें उन्हें रखा जाता है। इस 10 डिवीजन में अभी तक केवल 5 कैदी थे और अब छठवें कैदी लालू प्रसाद यादव हैं।

बताया जा रहा है कि लालू को जेल में उन कैदियों का साथ मिला है जो संगीन अपराधों के आरोप में बंद हैं। इस जेल में झरिया के बीजेपी विधायक संजीव सिंह, कांग्रेस के पूर्व विधायक सावना लकड़ा, पूर्व मंत्री राजा पीटर, पूर्व विधायक कमल किशोर भगत भी बंद हैं। 

झरिया के बीजेपी विधायक संजीव सिंह आरोप है कि इन्होंने अपने चचेरे भाई नीरज सिंह की हत्या का षड़यंत्र रचा था। नीरज सिंह धनबाद के पूर्व मेयर भी रह चुके थे। हालांकि अभी मामला कोर्ट में विचाराधीन है।

कांग्रेस के पूर्व विधायक सावना लकड़ा छात्र अविनाश की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। वहीं पारा टीचर मनोज की हत्या के षड़यंत्र रचने के मामले में विधायक एनोस एक्का विचाराधीन कैदी हैं। इसके अलावा झारखंड के पूर्व मंत्री राजा पीटर विचाराधीन कैदी हैं। इन पर पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा की हत्या का षड़यंत्र रचने का आरोप लगा है, जबकि पूर्व विधायक कमल किशोर भगत सात साल की सजा काट रहे हैं। 

पिछले दिनों विशेष अदालत ने देवघर कोषागार से अवैध तरीके से पैसे निकालने के मामले में 23 दिसंबर 15 लोगों को दोषी करार दिया गया था और सजा को लेकर अगली सुनवाई के लिए तीन जनवरी की तारीख तक पक्की गई थी, लेकिन तीन जनवरी की सुबह सुनवाई के बाद सजा तय नहीं हो पाई। सुनवाई शुक्रवार तक के लिए आगे बढ़ा दी गई। 

आपको बता दें कि साल 1997 में देवघर कोषागार से अवैध निकासी का मामला दर्ज हुआ था। तब यह कुछ लाख रुपयों की अवैध निकासी का मामला बताया गया था। बाद में यह राशि 89 लाख, 27 हजार रुपये बताई गई। लेकिन जब मामले की जांच शुरू हुई तो करीब 950 करोड़ रुपये का बड़ा घोटाला सामने आया। इसके चलते लालू प्रसाद यादव को मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी। लालू के अलावा मामले में पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्र भी बड़े नाम शामिल थे।

मामले में कुछ 37 आरोपी थे। करीब 20 साल तक चली जांच में 11 लोग की मौत हो गई, 3 ने गुनाह कबूल कर सरकारी गवाह बनने का फैसला किया, 2 लोगों को पहले ही सजा हो गई थी। बीते 23 दिसंबर को 21 लोगों पर सुनवाई में लालू समेत 15 लोगों को दोषी करार दिया गया। जबकि जगन्नाथ मिश्र समेत छह लोगों को बरी कर दिया गया।

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