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लखन भैया कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में साढ़े तीन साल जेल की सजा के दौरान ढाई साल अस्पताल में बिताएः प्रदीप शर्मा

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: October 10, 2019 16:39 IST

उनके भाषण का कथित वीडियो सोशल मीडिया में घूम रहा है। वीडियो में शर्मा कथित रूप से कहते दिख रहे हैं कि भाजपा नीत मौजूदा राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री और शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने उस मुश्किल समय में उनकी मदद की।

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ठळक मुद्देशर्मा ने कहा, "मेरे जीवन के मुश्किल दौर में शिंदे साहेब ने मेरी बहुत मदद की।एकनाथ शिंदे ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शर्मा पुलिस के सेवारत अधिकारी (मामले के समय) थे।

शिवसेना के टिकट पर मुंबई के नालासोपारा सीट से विधानसभा चुनाव लड़ रहे पूर्व पुलिस अधिकारी एवं ‘मुठभेड़ विशेषज्ञ’ प्रदीप शर्मा ने कहा कि लखन भैया कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में साढ़े तीन साल जेल की सजा के दौरान उन्होंने ढाई साल अस्पताल में बिताए। शर्मा ने इस सप्ताह की शुरुआत में पालघर जिले के निकट नालासोपारा इलाके में एक रैली को संबोधित करते हुए यह बात कही।

उनके भाषण का कथित वीडियो सोशल मीडिया में घूम रहा है। वीडियो में शर्मा कथित रूप से कहते दिख रहे हैं कि भाजपा नीत मौजूदा राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री और शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने उस मुश्किल समय में उनकी मदद की।

शर्मा ने कहा, "मेरे जीवन के मुश्किल दौर में शिंदे साहेब ने मेरी बहुत मदद की। मेरी साढ़े तीन साल जेल की सजा के दौरान मैंने ढाई साल अस्पताल में गुजारे। ऐसा उनकी मदद से हुआ।" हालांकि, जब शर्मा से उनकी वीडियो को लेकर टिप्पणी के लिये संपर्क किया गया तो उनके प्रवक्ता ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रचारित वीडियो "संदर्भ से परे" है।

एकनाथ शिंदे ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शर्मा पुलिस के सेवारत अधिकारी (मामले के समय) थे। मंत्री ने पत्रकारों से कहा, "पुलिस की मदद करना अपराध नहीं है।" पूर्व पुलिस अधिकारी शर्मा को 'मुठभेड़ विशेषज्ञ' कहा जाता है। वह मुठभेड़ के 100 से अधिक मामलों में शामिल रहे हैं।

शर्मा को 2006 में छोटा राजन गैंग के एक सदस्य रामनारायण गुप्ता उर्फ लखन भैया के कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें साढ़े तीन साल की जेल की सजा सुनाई गई थी और राज्य सरकार ने 2008 में उन्हें बर्खास्त कर दिया था। एक सत्र अदालत ने 2013 में उन्हें बरी कर दिया था जिसके बाद 2017 में उन्हें दोबारा पुलिस बल में शामिल कर लिया गया। 1983 बैच के राज्य पुलिस सेवा अधिकारी शर्मा ने इस साल की शुरुआत में स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति ले ली थी। 

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