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कोट्टियूर दुष्कर्म मामला : केरल उच्च न्यायालय ने पूर्व पादरी की सजा कम की

By भाषा | Updated: December 1, 2021 20:04 IST

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कोच्चि, एक दिसंबर केरल उच्च न्यायायल ने कोट्टियूर दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए गए पदच्युत पादरी को निचली अदालत से मिली 20 साल की सजा बुधवार को घटाकर 10 साल कर दी।

न्यायमूर्ति आर नारायणा पिशारदी ने पदच्युत पादरी रॉबिन मैथ्यू वडक्कामुचेरी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (2) (एफ) के तहत निचली अदालत द्वारा सुनाई गई 20 साल की सजा को कम करके 10 साल कर दिया। अदालत ने हालांकि पादरी को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो अधिनियम) के तहत दोषी ठहराने का निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा।

उच्च न्यायालय ने पादरी को बलात्कार का दोषी करार दिया जिसके लिए न्यूनतम सात साल और अधिकतम उम्रकैद की सजा का प्रावधान है।

भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (2)(एफ) के तहत दोषी को 10 साल से कम की सजा नहीं हो सकती है, उसे अधिकतम उम्रकैद की सजा हो सकती है।

अदालत ने कहा, ‘‘सिर्फ इसलिए क्योंकि आरोपी स्थानीय चर्च में पादरी था, यह नहीं कहा जा सकता है कि वह पीड़िता के लिए अधिकार या विश्वास के पद पर था।’’

विशेष सरकारी वकील (महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अत्याचार) अधिवक्ता अंबिका देवी ने इस सजा की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि अभियोजन यह भी साबित करने में सफल रहा कि पीड़िता घटना के समय (वर्ष 2016 में) नाबालिग थी, इसलिए उसकी सहमति कोई मायने नहीं रखती।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘इस मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के मद्देनजर अदालत न्याय के हित में अपीलकर्ता/आरोपी को पॉक्सो कानून की धारा पांच और छह के प्रावधानों के तहत दस साल की सश्रम कैद और एक लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाती है।’’

हालांकि, फैसले की विस्तृत प्रति अभी आनी बाकी है।

गौरतलब है कि निचली अदालत ने वडक्कामुचेरी को वर्ष 2019 में 20 साल कैद की सजा सुनाई थी जिसके खिलाफ उसने उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। वह वर्ष 2017 से ही कारावास में है।

बलात्कार पीड़िता ने इससे पहले उच्चतम न्यायालय में अर्जी दायर कर आरोपी से विवाह की अनुमति मांगी थी जिसे शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया था। उच्चतम न्यायालय ने पदच्युत पादरी की ओर से दायर एक अन्य याचिका भी खारिज कर दी थी जिसमें उसने कहा था कि वह पीड़़िता से विवाह करना चाहता है, जो दुष्कर्म के वक्त नाबालिग थी और उसने बच्चे को जन्म दिया है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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