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शाखा में आकर आरएसएस के बारे में जानें कुमारस्वामी: कतील

By भाषा | Updated: October 6, 2021 18:50 IST

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शिवमोगा (कर्नाटक), छह अक्टूबर कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष नलिन कुमार कतील ने आरएसएस को लेकर जद(एस) नेता एचडी कुमारस्वामी की टिप्पणी पर बुधवार को तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें शाखा आने और संघ की गतिविधियों के बारे में जानने के लिये आमंत्रित किया।

कतील ने कहा, ''कुमारस्वामी संघ की विचारधारा के बारे में नहीं जानते, इसलिये उन्होंने विभिन्न आरोप लगाए हैं। संघ देशभक्ति को बढ़ावा देता है और प्रत्येक व्यक्ति को इस इरादे से शिक्षित करता है कि वह देशहित में योगदान दे।''

उन्होंने यहां पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि अच्छा होगा कि जद (एस) नेता किसी शाखा में आएं और संघ की गतिविधियों के बारे में जानें।

उन्होंने कहा, ''जब वह (कुमारस्वामी) सत्ता में थे तब सभी नियुक्तियां जाति के आधार पर की गईं थीं। उन्होंने पारिवारिक राजनीति को बढ़ावा दिया और परिवार के लोगों को सत्ता में बिठाया। आप उनसे और क्या उम्मीद कर सकते हैं? यदि संघ द्वारा शिक्षित कोई आईएएस या आईपीएस अधिकारी बन जाता है तो हमें खुशी होती है कि वे देश के लिए और अच्छा करेंगे।''

कतील एक किताब का हवाला देते हुए जद (एस) नेता एचडी कुमारस्वामी द्वारा दिये गए बयान पर एक सवाल का जवाब दे रहे थे। कुमारस्वामी ने कहा था कि आरएसएस ने अपने 'छिपे हुए एजेंडे' के तहत देश में नौकरशाहों की एक टीम बनाई है, जिन्हें अब विभिन्न संस्थानों में नियुक्त किया गया है।

कुमारस्वामी ने मंगलवार को दावा किया, ‘‘उस किताब में बताया गया है कि इस देश में करीब 4000 नौकरशाह -- आईएएस और आईपीएस अधिकारी -- आरएसएस के कार्यकर्ता हैं। वे सिविल सेवा परीक्षा के उम्मीदवारों को प्रशिक्षण देते हैं। केवल 2016 में उनके द्वारा प्रशिक्षित 676 लोग चयनित हुए।’’

उन्होंने यह भी कहा था कि केंद्र और कर्नाटक दोनों में भाजपा सरकारें आरएसएस के निर्देश पर काम कर रही हैं, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसकी "कठपुतली" हैं।

वहीं, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने आज कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) शिक्षा समेत सभी क्षेत्रो में ‘घुसपैठ’ कर रहा है और इस संगठन के विरूद्ध अपनी लंबी लड़ाई की कीमत उन्हें 2019 के संसदीय चुनाव में अपनी लोकसभा सीट गंवाकर चुकानी पड़ी।

खड़गे ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा, ‘‘ वे (आरएसएस वाले) सभी जगह घुसपैठ कर रहे हैं, शिक्षा में भी वे आ रहे हैं। कई अधिकारी नियमों में बदलाव कर सीधे भर्ती किये गये हैं तथा बहुतों को आरक्षण से वंचित किया गया है।......’’

उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि वह 15-16 साल की उम्र से ही आरएसएस एवं उसकी विचारधारा के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं और गुलबर्गा सीट से 2019 के लोकसभा चुनाव में उनकी हार के कारणों में एक यह भी था।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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