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जानें क्या है चीफ ऑफ डिफेंस का पद, कारगिल युद्ध के बाद से ही उठी थी मांग 

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: August 15, 2019 09:43 IST

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से चीफ ऑफ डिफेंस (CDS) की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने कहा कि हमारी सुरक्षा बलों पर हमें गर्व है। इसे और मजबूत करनेके लिए मैं आज एक बड़ी घोषणा करने जा रहा हूं। भारत के पास अब एक चीफ ऑफ डिफेंस (सीडीएस) होगा।

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ठळक मुद्देमोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में रक्षा मंत्री का पद संभालने के बाद निर्मला सीतारमण ने सीडीएस के पद पर चर्चा करने के लिए तीनों सेना प्रमुखों के साथ रोजाना बैठक करने का लक्ष्य तय किया था। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की घोषणा पत्र में चीफ ऑफ डिफेंस (CDS) की नियुक्ति का जिक्र किया गया था। 

73वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को संबोधित किया। इस बीच उन्होंने भारतीय सेना को और मजूबत करने के लिए पीएम मोदी ने सेना में नया पद चीफ ऑफ डिफेंस (CDS) बनाने का ऐलान किया है।

चीफ ऑफ डिफेंस (CDS) की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने कहा कि हमारी सुरक्षा बलों पर हमें गर्व है। इसे और मजबूत करनेके लिए मैं आज एक बड़ी घोषणा करने जा रहा हूं। भारत के पास अब एक चीफ ऑफ डिफेंस (सीडीएस) होगा। इससे हमारी सेना और मजबूत होगी। आइए जानते हैं क्या है चीफ ऑफ डिफेंस...

जानिए क्या है चीफ ऑफ डिफेंस (CDS) 

चीफ ऑफ डिफेंस एक सैन्य पद होगा जो तीनों सेनाओं (जल, थल और वायु) के प्रमुखों का चीफ होगा। इस पद को लेकर पहली बार चर्चा कारगिल युद्ध के बाद हुआ। इंडिया टुडे में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार सीडीएस सैन्य बलों का एकीकरण करेगा और 17 अलग-अलग कमान ढांचों को तीन कमान का स्वरूप देगा—उत्तरी कमान चीन के लिए, पश्चिमी कमान पाकिस्तान के लिए और दक्षिण कमान समुद्री क्षेत्र के लिए। इससे न केवल संसाधनों की बचत होगी, सैन्य प्रभावशीलता भी बढ़ेगी।

कारगिल युद्ध के बाद उठी थी पहली बार मांग

1999 में हुए कारगिल युद्ध के बाद देश की सुरक्षा प्रणाली की खामियों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गयी थी जिसने रक्षा मंत्री के सैन्य सलाहकार के तौर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) नियुक्त करने की मांग की थी। समिति ने जो सबसे बड़ी कमियां उजागर की थीं, उनमें जंग में शामिल तमाम सशस्त्र बलों और खासकर सेना और वायु सेना के बीच तालमेल की कमी भी थी। 

2001 में ही नरेश चंद्रा समिति ने भी सरकार और सशस्त्र बलों के बीच एक सलाहकार की जरूरत बताई थी। 2012 में नरेश चंद्र कार्यबल ने चीफ ऑफ डिफेंस कमेटी के स्थायी प्रमुख के पद के सृजन की सिफारिश की थी। चीफ ऑफ डिफेंस कमेटी में सेना, नौसेना और वायुसेना के प्रमुख शामिल हैं और मौजूदा नियमों के अनुरूप उनमें से वरिष्ठतम उसके प्रमुख के तौर पर काम करते हैं।

उसके बाद लेफ्टिनेंट जनरल डी.बी. शेकटकर समिति ने भी 2016 में फिर इसे दोहराया था, लेकिन इसे कभी लागू नहीं किया गया।

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने तीनों सेनाओं के साथ बैठक

बता दें कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में रक्षा मंत्री का पद संभालने के बाद निर्मला सीतारमण ने सीडीएस के पद पर चर्चा करने के लिए तीनों सेना प्रमुखों के साथ रोजाना बैठक करने का लक्ष्य तय किया था। ताकि तीनों सेनाओं में तालमेल बढ़ सके। लेकिन इस बेहद शक्तिशाली पद (CDS) पर तीनों सेनाओं के प्रमुखों की एक राय नहीं है।

वहीं, साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की घोषणा पत्र में चीफ ऑफ डिफेंस (CDS) की नियुक्ति का जिक्र शामिल था। 

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