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किसान मोदी संवाद दो अंतिम

By भाषा | Updated: December 25, 2020 19:47 IST

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प्रधानमंत्री मोदी ने जब पूछा कि क्या उन्हें विश्वास है कि नयी व्यवस्था से किसानों को फायदा होगा, तो पाटेकर ने इसका जवाब ‘हां’ में दिया।

पाटेकर ने कहा कि उनके पास छह एकड़ जमीन है और उन्हें पीएम-किसान योजना के तहत 10,000 रुपये मिले हैं। उन्होंने मोदी से आवारा पशुओं की समस्या को दूर करने का भी अनुरोध किया।

उनके इस अनुरोध पर प्रधानमंत्री ने कहा, "जो लोग किसानों के नाम पर प्रदर्शन में बैठे हैं और पर्यावरण के नाम पर समान विचार रखते हैं, जानवरों को मारने वाले लोगों को जेल भेजने की बात करते हैं। वे एक प्रदर्शन वहां कर रहे हैं और एक प्रदर्शन यहां राजनीति के नाम पर। हमें इसका एक समाधान खोजने की जरूरत है। देश के कई हिस्सों में, इस तरह के मुद्दे हैं।"

प्रधानमंत्री के साथ अपने अनुभवों को साझा करते हुए, उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के किसान राम गुलाब ने कहा कि 300 किसानों के साथ स्थापित एक नए एफपीओ ने शकरकंद की बिक्री के लिए अहमदाबाद की एक कंपनी के साथ समझौता किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘पहले, किसान शकरकंद 10-15 रुपये प्रति किलोग्राम बेचते थे, लेकिन अब हमने 25 रुपये प्रति किलोग्राम के लिए समझौता किया है। वे उपज खेत से लेंगे। हमें परिवहन पर खर्च करने की जरूरत नहीं है और न ही बिचौलियों की समस्या का सामना करना पड़ेगा।’’

जब प्रधानमंत्री ने सवाल किया कि क्या उन्हें जमीन खोने का डर है, इस पर गुलाब ने कहा: "नहीं सर। हमारी जमीन नहीं जाएगी।" उन्होंने यह भी कहा कि नए कानूनों से किसानों को फायदा होगा।

मोदी ने कहा, "झूठ फैलाया जा रहा है। जब आप जैसे लोग कहते हैं तो दूसरों को भी विश्वास होगा कि कोई भी जमीन नहीं खोएगा, केवल फसलें बेची जाती है...।"

अनुबंध पर खेती से जुड़ी आशंकाओं को दूर करते हुए मोदी ने कहा कि पहले अनुबंध समझौते के उल्लंघन पर किसानों पर जुर्माना लगता था। उन्होंने कहा कि नया कानून सुनिश्चित करता है कि किसानों पर कोई जुर्माना नहीं हो।

उन्होंने कहा, "हमें इस बात की जानकारी मिल रही है कि किस प्रकार किसान कानूनों का लाभ उठा रहे हैं। सरकार हर कदम पर किसानों के साथ खड़ी है। सरकार ने किसानों की मदद के लिए मजबूत कानूनी समर्थन की व्यवस्था की है।"

मोदी ने कहा कि जब किसान के साथ कोई समझौता करता है, तो वह व्यक्ति अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए किसानों को कृषि जानकारी और सेवाएं मुहैया कराएगा। अगर फसल खराब हो जाती है, तब भी जो दर तय हुयी है, वह देना होगा।

उन्होंने कहा कि समझौता करने वाला अपनी मर्जी से उसे खत्म नहीं कर सकता है। लेकिन दूसरी तरफ अगर किसान समझौते को किसी भी वजह से खत्म करना चाहता है तो वह कर सकता है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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