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खोरी गांव मामला: निगम ने न्यायालय में मकानों का अस्थायी आवंटन शुरू करने पर सैद्धांतिक सहमति जतायी

By भाषा | Updated: September 14, 2021 20:10 IST

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नयी दिल्ली, 14 सितंबर फरीदाबाद नगर निगम ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में खोरी गांव में रहने वाले पात्र लोगों के पुनर्वास के वास्ते मकानों का अस्थायी आवंटन शुरू करने पर सैद्धांतिक सहमति जतायी, जहां अरावली वन क्षेत्र में आने वाले अवैध निर्माण को हटाया गया है।

पुनर्वास प्रक्रिया के लिए समय सीमा निर्धारित करने वाले निगम को शीर्ष अदालत ने कहा था कि पात्र आवेदकों को ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) फ्लैटों का कब्जा देने संबंधी उसका अगले साल 30 अप्रैल का प्रस्तावित कार्यक्रम ''बहुत लंबा'' है।

न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने नगर निगम से कहा कि वह पुनर्वास के लिए पात्रता स्थापित करने वाले दस्तावेजों के साथ विधिवत आवेदन प्राप्त होने पर जांच के बाद एक सप्ताह के भीतर अंतरिम आवंटन जारी करेगा। पीठ ने कहा कि नगर निगम पत्र में यह भी इंगित करेगा कि यह केवल अस्थायी है और सत्यापन और अंतिम ड्रा के अधीन है।

पीठ ने यह भी कहा कि आवेदक और उसके परिवार के सदस्य निगम को लिखित में शपथपत्र देंगे कि जब कभी परिसर खाली करने के लिए कहा जाएगा, तो वे सूचना प्राप्त होने के दो सप्ताह के भीतर इसका पालन करेंगे।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, '' यदि आवेदक उचित जांच के बाद पात्र पाए जाते हैं, तो संबंधित पात्र आवेदकों को अंतिम आवंटन पत्र जारी किया जा सकता है, जिसके बाद वे निगम द्वारा प्रस्तावित पुनर्वास योजना के संदर्भ में अंतिम आवंटन पत्र में निर्धारित परिसर पर कब्जा ले सकते हैं।''

पीठ ने कहा कि निगम के वकील ने आश्वासन दिया है कि अस्थायी आवंटन के बाद यदि कोई मरम्मत या रखरखाव के कार्य की आवश्यकता होती है तो संबंधित अधिकारी को सूचित करने के 10 दिनों के भीतर इसे ठीक किया जाएगा।

पीठ ने कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकीलों द्वारा ईडब्ल्यूएस फ्लैटों के लिए आवेदन करने के लिए 15 अक्टूबर तक के समय को लेकर उठाई गई चिंताओं पर भी ध्यान दिया और कहा कि निगम इस तारीख को बढ़ाकर 15 नवंबर 2021 करने के लिए स्वतंत्र है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील संजय पारिख ने आवेदन एवं दस्तावेज जमा करने के दौरान निगम के पोर्टल में तकनीकी खामियों का जिक्र करते हुए आवेदकों के समक्ष आने वाली दिक्कतों का उल्लेख किया। इस पर पीठ ने कहा कि आवेदक निगम द्वारा नामित नोडल अधिकारी को अपने आवेदन या दस्तावेजों की प्रति सौंप सकते हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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