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केरल: बच्चा गोद लेने के विवादास्पद मामले के बीच डीएनए परीक्षण किया गया

By भाषा | Updated: November 22, 2021 21:23 IST

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तिरुवनंतपुरम, 22 नवंबर केरल में बच्चा गोद लेने के विवादास्पद मामले के बीच सोमवार को बच्चे और उसके जैविक माता-पिता होने का दावा करने वाले दंपति का डीएनए परीक्षण किया गया। केरल के राजीव गांधी जैव प्रौद्योगिकी केंद्र (आरजीसीबी) द्वारा डीएनए परीक्षण के लिए नमूने लिए गए। इसका नतीजा मंगलवार को आने की संभावना है।

गोद लेने के मामले से जुड़े शिशु को केरल राज्य बाल कल्याण परिषद (केएससीसीडब्ल्यू) के अधिकारियों का दल रविवार रात को आंध्र प्रदेश से राज्य वापस लेकर आया।

एक वर्षीय बच्चे की देखभाल उसे गोद लेने वाला आंध्र प्रदेश का एक दंपति कर रहा था। ऐसा संदेह है कि यह बच्चा अनुपमा एस चंद्रन का है, जिसने आरोप लगाया है कि उसके माता-पिता ने बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उसका अपहरण कर लिया था। उसने आरोप लगाया कि उसके माता-पिता ने उसकी सहमति के बिना ही एक साल पहले केएससीसीडब्ल्यू के जरिए बच्चे को गोद दे दिया था।

आरजीसीबी के अधिकारियों ने सोमवार सुबह बच्चे का डीएनए नमूना एकत्र किया जोकि वर्तमान में बाल कल्याण समिति की देखरेख में है। अनुपमा और उसके साथी अजीत का नमूना भी डीएनए परीक्षण के लिए लिया गया है।

अनुपमा ने कहा, '' अधिकारियों का कहना है कि परीक्षण का नतीजा मंगलवार या उसके अगले दिन आएगा।''

हालांकि, बच्चे का जो नमूना लिया गया है वो गोद लिए गए शिशु का है या नहीं, अनुपमा ने इसे लेकर चिंता जतायी है। उन्होंने बच्चे और दंपति के नमूने अलग-अलग एकत्र करने को लेकर सवाल उठाए।

इस बीच, राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा कि बच्चे को उचित प्रक्रिया से गुजरने के बाद पालक माता-पिता को सौंप दिया गया था और शिशु को सीडब्ल्यूसी के निर्देश के अनुसार वापस लाया गया, इसलिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करने की आवश्यकता है।

बाल कल्याण आयोग ने 18 नवंबर को एक आदेश जारी करते हुए केएससीसीडब्ल्यू को बच्चे को राज्य में वापस लाने का निर्देश दिया था।

केएससीसीडब्ल्यू अधिकारियों के नेतृत्व वाले एक दल ने आंध्र प्रदेश में बच्चे को गोद लेने वाले दंपति से शनिवार को बच्चा लिया और वे उसे वापस केरल लेकर आए। इस दल में किशोर मामलों को देखने वाली पुलिस की विशेष इकाई भी शामिल थी। दल रविवार रात तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डा पहुंचा।

अनुपमा और उसका साथी अजित बच्चे को वापस लाए जाने की मांग को लेकर कुछ दिनों से यहां केएससीसीडब्ल्यू कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि अनुपमा ने आरोप लगाया था कि उसके पिता ने उसके नवजात बच्चे को उससे जबरन दूर कर दिया था। उसके पिता मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के स्थानीय नेता हैं और इन आरोपों के बाद राज्य में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। सरकार ने इस घटना की विभागीय जांच के आदेश दिए थे।

एक पारिवारिक अदालत ने बच्चे को गोद देने की प्रक्रिया पर पिछले महीने रोक लगा दी थी और पुलिस को सीलबंद लिफाफे में विस्तारपूर्वक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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