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कश्मीरः एके 56 और एके 47 की जगह आतंकी 'स्नाइपर राइफलों' का कर रहे इस्तेमाल, पाक सेना के कैंप में दी जा रही ट्रेनिंग

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: December 9, 2021 16:57 IST

कश्मीर के कोटली में स्थित पाकिस्तानी सेना के कैंप में सबसे अधिक लश्करे तौयबा के आतंकी हैं। यहीं पर आतंकियों को स्नाइपर की ट्रेनिंग दी जा रही है।

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ठळक मुद्देपाकिस्तानी सेना के कैंपों में लश्करे तौयबा के आतंकियों को स्नाइपर की ट्रेनिंग दी जा रही हैगुसपैठ करनेवाले आतंकी अपने साथ स्नाइपर राइफल लेकर भी आ रहे हैं

जम्मू। कश्मीर के भीतर आतंकवाद से जूझ रहे सुरक्षाबलों सहित एलओसी पर मौजूद भारतीय सेना के लिए पाकिस्तानी सेना और स्नाइपर राइफलों से दोहरा खतरा है। सेना के अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में कश्मीर में फैले आतंकवाद और मजबूती से उभरेगा क्योंकि घुसपैठ करने वाले आतंकियों को स्नाइपर राइफलें मुहैया कराई गई हैं। उन्हें इसका प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, करीब आधा दर्जन स्नाइपर मारे भी जा चुके हैं और दर्जनभर स्नाइपर राइफलें कश्मीर के भीतर से बरामद की जा चुकी हैं। एलओसी पर घुसपैठियों से भी ऐसी राइफलें मिली हैं जबकि एलओसी पर आतंकी तथा पाक सैनिक स्नाइपर राइफलों का खुलकर इस्तेमाल कर रहे हैं।

एलओसी और इंटरनेशनल बार्डर पर पाक सैनिकों के साथ आतंकी भी भारतीय जवानों को स्नाइपर से निशाना बना रहे हैं। आतंकियों को पाक फौज के कैंपों में स्नाइपर चलाने की ट्रेनिंग तक दी जा रही है। हालांकि आतंकियों को स्नाइपर मुहैया कराने के लिए फंड पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई दे रही है।

जानकारी के अनुसार पाकिस्तानी सेना के कैंपों में लश्करे तौयबा के आतंकियों को स्नाइपर की ट्रेनिंग दी जा रही है। आतंकियों के पास यूएसए और आस्ट्रिया निर्मित स्नाइपर हैं। पुंछ, राजोरी, कुपवाड़ा, बारामुल्ला की एलओसी, जम्मू, सांबा और कठुआ के बार्डर पर आतंकी घुसपैठ नहीं कर पा रहे। खासकर जम्मू संभाग में आतंकियों की घुसपैठ बहुत कम हुई है। इसे देखते हुए आतंकी पाकिस्तान की फारवर्ड पोस्टों तक पहुंचे हैं। वह पाकिस्तानी सैनिकों के साथ मिलकर भारतीय जवानों को टारगेट कर रहे हैं।

कश्मीर के कोटली में स्थित पाकिस्तानी सेना के कैंप में सबसे अधिक लश्करे तौयबा के आतंकी हैं। यहीं पर आतंकियों को स्नाइपर की ट्रेनिंग दी जा रही है। सूत्रों का कहना है कि आईएसआई इसके लिए फंडिंग कर रही है। पाकिस्तानी सेना इनकी खरीद कर रही है और ट्रेनिंग देने के लिए आतंकियों को मुहैया करा रहे हैं। आतंकियों से फारवर्ड पोस्टों के अलावा अन्य हमले करने के लिए भी यह स्नाइपर दी जा रही है।

अमूमन आतंकी घुसपैठ करते वक्त अपने साथ एके 56 और एके 47 लेकर आते हैं। लेकिन ताजा ट्रेंड यह है कि आतंकी अपने साथ स्नाइपर राइफल लेकर भी आ रहे हैं। यह 60 इंच लंबी है। वजन भी काफी कम है। इसमें पांच राउंड होते हैं। आतंकी घुसपैठ करने के बाद कम वजन के चलते इनको अपने साथ ला रहे हैं। कश्मीर में दो महीने पहले लश्कर के मारे गए तीन आतंकियों के पास से स्नाइपर राइफल भी मिली थी। एलओसी पर भी ऐसी राइफलें बरामद की जा चुकी हैं। 

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