Jammu-Kashmir: भारत-अमेरीका ट्रेड डील पर बंटा है कश्‍मीर

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: February 12, 2026 11:42 IST2026-02-12T11:41:46+5:302026-02-12T11:42:31+5:30

Jammu-Kashmir: मुख्‍यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस इंटरिम ट्रेड अरेंजमेंट पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि अखरोट और बादाम जैसे ट्री नट्स के ड्यूटी फ्री इंपोर्ट से लोकल किसानों पर बुरा असर पड़ सकता है।

Kashmir is divided over the India-US trade deal | Jammu-Kashmir: भारत-अमेरीका ट्रेड डील पर बंटा है कश्‍मीर

Jammu-Kashmir: भारत-अमेरीका ट्रेड डील पर बंटा है कश्‍मीर

Jammu-Kashmir:भारत-अमेरीका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील ने कश्मीर के हार्टिकल्चर सेक्टर में तीखी बहस छेड़ दी है, जिसमें उगाने वाले और डीलर कीमतों, क्वालिटी और लोकल इकानमी की लंबे समय तक चलने वाली स्थिरता पर इसके संभावित असर को लेकर बंटे हुए हैं। जहां कई बागवानों को डर है कि इंपोर्ट ड्यूटी में कमी से घाटी के सेब और ड्राई फ्रूट मार्केट को नुकसान होगा, वहीं कुछ का मानना ​​है कि अमेरिकी उपज से मुकाबला कीमतों को स्थिर कर सकता है और किसानों को क्वालिटी सुधारने के लिए मजबूर कर सकता है।

शोपियां के अखरोट उगाने वाले और डीलर जावेद अहमद लोन कहते थे कि कि इंपोर्टेड सामान के संपर्क में आने से लोकल किसान अपना स्टाक अपग्रेड करने के लिए मजबूर हो सकते हैं।

लोन ने कहा कि किसानों के लिए हर समय प्रोटेक्शनिज़्म अच्छा नहीं होता। वे लापरवाह हो जाते हैं क्योंकि उनके पास एक कैप्टिव मार्केट होता है। लोकल बादाम और अखरोट के रेट शेयर मार्केट की तरह ऊपर-नीचे होते रहते हैं। किसी को यकीन नहीं है कि क्या हो रहा है।

उन्होंने तर्क दिया कि यूनाइटेड स्टेट्स से अखरोट और बादाम की लगातार आवक लोकल कीमतों को स्थिर करने में मदद कर सकती है। उनका कहना था कि इम्पोर्ट किए गए अखरोट और बादाम की क्वालिटी बेहतर है और टैरिफ के बावजूद वे पहले से ही काम्पिटिटिव थे। लोकल किसानों को अपनी क्वालिटी सुधारनी होगी। काम्पिटिशन का यही फायदा है।

हालांकि, फल उगाने वाले बड़े लोग इस एग्रीमेंट को हार्टिकल्चर पर बहुत ज्‍यादा निर्भर इकानमी के लिए एक गंभीर खतरा मानते हैं।

हालांकि फ्रूट ग्रोअर्स एंड डीलर्स यूनियन के प्रेसिडेंट बशीर अहमद बशीर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर चेतावनी दी है कि इम्पोर्ट किए गए सेबों पर कम टैरिफ से कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के प्रोडक्ट को बहुत नुकसान हो सकता है।

उनका कहना था कि ईरान, अमेरीका और न्यूजीलैंड से इम्पोर्ट से छोटे किसान पहले ही बुरी तरह प्रभावित हो चुके हैं। बढ़ती इनपुट कास्ट, खराब मौसम और कीड़ों के प्रकोप ने इस सेक्टर को फाइनेंशियल स्ट्रेस में डाल दिया है। ड्यूटी में कमी ताबूत में आखिरी कील साबित होगी।

उन्होंने विदेशी सेबों पर 100 परसेंट इम्पोर्ट ड्यूटी लगाने की मांग की, और चेतावनी दी कि बिना रोक-टोक के इम्पोर्ट हार्टिकल्चर इकानमी को संकट में डाल सकता है। हार्टिकल्चर डिपार्टमेंट के अधिकारियों के मुताबिक, जम्मू कश्मीर में करीब 20 लाख लोग अपनी रोजी-रोटी के लिए सीधे या इनडायरेक्टली हार्टिकल्चर पर निर्भर हैं।

मुख्‍यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस इंटरिम ट्रेड अरेंजमेंट पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि अखरोट और बादाम जैसे ट्री नट्स के ड्यूटी फ्री इंपोर्ट से लोकल किसानों पर बुरा असर पड़ सकता है।

उमर ने कहा कि ट्री नट्स, अखरोट और बादाम जम्मू कश्मीर से आते हैं। उन्हें ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की इजाज़त देना हमारे किसानों के लिए हमदर्दी पर सवाल उठाता है। उन्होंने यह भी कहा कि सेब को भी बचाना चाहिए था।

पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने भी ऐसी ही आशंकाएं जताईं। पार्टी के स्पोक्सपर्सन मोहम्मद इकबाल ट्रंबू ने कहा कि अगर अमेरीका से खेती और बागवानी का सामान ज़ीरो टैरिफ पर इंडियन मार्केट में आता है तो यह एग्रीमेंट इकोनामिक मुश्किल खड़ी कर सकता है।

उन्होंने सवाल किया कि उन्होंने जम्मू कश्मीर के हार्टिकल्चर सेक्टर पर पड़ने वाले असर के बारे में नहीं सोचा है। अगर अमेरीका से खेती के इंपोर्ट पर जीरो टैरिफ है, तो यहां पैदा होने वाले सेब और अखरोट का क्या होगा? आजीविका दांव पर होने और बाजार में अनिश्चितता के चलते, इस व्यापार सौदे ने कश्मीर की फल अर्थव्यवस्था को एक व्यापक नीतिगत बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।

Web Title: Kashmir is divided over the India-US trade deal

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