कर्नाटक हिजाब विवाद: 'हिजाब पहनना इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं', सरकार ने सबरीमाला और ट्रिपल तलाक मामलों में SC के फैसलों की दिलाई याद

By अनिल शर्मा | Updated: February 19, 2022 15:48 IST2022-02-19T08:15:37+5:302022-02-19T15:48:44+5:30

हिजाब विवाद को लेकर राज्य सरकार ने कर्नाटक हाईकोर्ट में तर्क दिया कि हिजाब पहनने की प्रथा को सबरीमाला और ट्रिपल तलाक मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित संवैधानिक नैतिकता की कसौटी पर खरा उतरना चाहिए।

Karnataka hijab row Wearing hijab not essential religious practice of Islam Attorney General tells HC | कर्नाटक हिजाब विवाद: 'हिजाब पहनना इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं', सरकार ने सबरीमाला और ट्रिपल तलाक मामलों में SC के फैसलों की दिलाई याद

कर्नाटक हिजाब विवाद: 'हिजाब पहनना इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं', सरकार ने सबरीमाला और ट्रिपल तलाक मामलों में SC के फैसलों की दिलाई याद

Highlightsकॉलेज यह तय कर सकते हैं कि वे कक्षा में हिजाब की अनुमति देना चाहते हैं या नहींः अटॉर्नी-जनरल राज्य सरकार का 5 फरवरी का आदेश कानून के अनुसार थाः अटॉर्नी-जनरल

कर्नाटक: राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के समक्ष स्पष्ट रूप से कहा कि 'हिजाब' इस्लाम की एक आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है। इसके उपयोग को रोकना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 का उल्लंघन नहीं है, जो धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है। राज्य सरकार ने यह भी तर्क दिया कि हिजाब पहनने की प्रथा को सबरीमाला और ट्रिपल तलाक मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित संवैधानिक नैतिकता की कसौटी पर खरा उतरना चाहिए।

हिजाब पहनना इस्लाम की आवश्यक धार्मिक प्रथा के अंतर्गत नहीं आता

जनहित याचिका और मुस्लिम छात्राओं की याचिकाओं के जवाब में अपनी दलीलें शुरू करते हुए, महाधिवक्ता प्रभुलिंग नवदगी ने अदालत से कहा, "मेरा पहला अनुरोध यह है कि आदेश शिक्षा अधिनियम के अनुरूप है। दूसरा अधिक ठोस तर्क है कि हिजाब एक अनिवार्य हिस्सा है। हमने यह स्टैंड लिया है कि हिजाब पहनना इस्लाम की आवश्यक धार्मिक प्रथा के अंतर्गत नहीं आता है। तीसरा यह है कि हिजाब पहनने का अधिकार अनुच्छेद 19 (1) (ए) से पता लगाया जा सकता है। मेरा निवेदन यह है कि यह ऐसा नहीं करता।"

राज्य सरकार का 5 फरवरी का आदेश कानून के अनुसार था

अटॉर्नी-जनरल ने उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी, न्यायमूर्ति जेएम खाजी और न्यायमूर्ति कृष्णा एम दीक्षित की पूर्ण पीठ को यह भी बताया कि राज्य सरकार का 5 फरवरी का आदेश (पूर्व-विश्वविद्यालय कॉलेजों में हिजाब पर प्रतिबंध) कानून के अनुसार था। और इसमें विरोध करने के लिए कुछ भी नहीं था।

कॉलेज यह तय कर सकते हैं कि वे कक्षा में हिजाब की अनुमति देना चाहते हैं या नहीं

उच्च न्यायालय ने अपने अंतरिम आदेश में हिजाब विवाद से संबंधित सभी याचिकाओं पर विचार लंबित रखते हुए पिछले सप्ताह सभी छात्रों को कक्षा के भीतर भगवा शॉल, स्कार्फ, हिजाब और किसी भी धार्मिक वस्त्र पहनने से रोक दिया था। उन्होंने कहा, "सरकारी आदेश में हिजाब का कोई मुद्दा नहीं है। सरकारी आदेश प्रकृति में सहज है। यह याचिकाकर्ताओं के अधिकारों को प्रभावित नहीं करता है। उन्होंने कहा कि कॉलेज यह तय कर सकते हैं कि वे कक्षा में हिजाब की अनुमति देना चाहते हैं या नहीं।

 

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