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कर्नाटक: धर्मांतरण रोधी विधेयक को असंवैधानिक बताते हुए सैकड़ों लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया, 40 सामाजिक-राजनीतिक संगठनों के लोग रहे शामिल

By विशाल कुमार | Updated: December 23, 2021 09:41 IST

भाजपा शासित राज्य में कर्नाटक धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार विधेयक, 2021 मंगलवार को विधानसभा के शीत सत्र के दौरान पेश किया गया। गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने विधेयक पेश किया, जबकि कांग्रेस नेताओं ने इसे पेश करने के तरीके पर आपत्ति जताई।

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ठळक मुद्देसैकड़ों लोगों ने बुधवार को कर्नाटक के धर्मांतरण रोधी विधेयक के विरोध में रैली निकाली।विधेयक मंगलवार को विधानसभा के शीत सत्र के दौरान पेश किया गया।कांग्रेस नेताओं ने इसे पेश करने के तरीके पर आपत्ति जताई।

बेंगलुरु: कम से कम 40 सामाजिक-राजनीतिक संगठनों के सैकड़ों लोगों ने बुधवार को कर्नाटक के धर्मांतरण रोधी विधेयक के विरोध में रैली निकाली। यह विरोध प्रदर्शन मैसूर बैंक गोलचक्कर से फ्रीडम पार्क तक निकाला गया।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा शासित राज्य में कर्नाटक धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार विधेयक, 2021 मंगलवार को विधानसभा के शीत सत्र के दौरान पेश किया गया।

गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने विधेयक पेश किया, जबकि कांग्रेस नेताओं ने इसे पेश करने के तरीके पर आपत्ति जताई। कैबिनेट ने सोमवार को विधेयक को मंजूरी दे दी थी लेकिन सदन में इसे पेश करने के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई।

बुधवार के विरोध में बेंगलुरु के आर्कबिशप पीटर मचाडो ने भाग लिया, जिन्होंने कहा कि अब जब विधेयक की सामग्री को सभी ने पढ़ लिया है, तो यह पाया गया है कि यह न केवल ईसाइयों को प्रभावित कर रहा है। यह बड़े समाज को प्रभावित कर रहा है। यह निजता का सवाल है, शादी का सवाल है, महिलाओं, दलितों और मुसलमानों का सवाल है।

उन्होंने कहा कि कर्नाटक देश में एक प्रगतिशील राज्य है और इसे दूसरों को यह संदेश देना है कि यह निजता, गरिमा और मानवाधिकारों के लिए खुला है।

विधेयक के प्रावधानों पर आर्कबिशप ने कहा कि विधेयक के अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य, वरिष्ठ नागरिक देखभाल और अनाथालयों के क्षेत्र में काम करने वाले हमारे किसी भी ईसाई संस्थान को किसी भी गै-ईसाई सदस्य द्वारा दी गई किसी भी सहायता या रियायत का अर्थ धर्मांतरण के लिए एक प्रलोभन के रूप में लगाया जा सकता है।

मसौदा विधेयक गलत पहचान, बल, धोखाधड़ी, प्रलोभन या विवाह द्वारा एक धर्म से दूसरे धर्म में धर्मांतरण को प्रतिबंधित करता है।

इसमें कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति गलत पहचान, बल, अनुचित प्रभाव, जबरदस्ती, लुभाने या किसी कपटपूर्ण तरीके से या शादी के द्वारा किसी भी व्यक्ति को सीधे या किसी अन्य व्यक्ति को एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तित करने का प्रयास नहीं करेगा और न ही कोई व्यक्ति इसके लिए उकसाएगा या साजिश नहीं करेगा।

हालांकि, यह उस व्यक्ति के मामले में छूट प्रदान करता है जो अपने तत्काल पिछले धर्म में पुन: परिवर्तित हो जाता है क्योंकि उसे इस अधिनियम के तहत रूपांतरण नहीं माना जाएगा।

सबसे पहले ऐसा कानून उत्तर प्रदेश में लागू किया गया था और उसी की तर्ज पर ही मध्य प्रदेश, हरियाणा और गुजरात जैसे भाजपा शासित राज्यों में भी ऐसा ही कानून लागू किया गया है।

टॅग्स :कर्नाटकBasavaraj BommaiBJP
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