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"वकीलों के विपरीत पत्रकार लोगों के संपर्क में आए बगैर काम कर सकते हैं"

By भाषा | Updated: March 18, 2021 20:32 IST

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नयी दिल्ली, 18 मार्च उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि वकीलों के विपरीत पत्रकार लोगों के संपर्क में आए बगैर काम कर सकते हैं। साथ ही, केंद्र सरकार को कोविड-19 टीकाकरण में अदालत कर्मियों को प्राथमिकता देने के अनुरोध पर विचार करने का निर्देश देते हुए कहा कि इनकी आजीविका अपने मुवक्किल से प्रत्यक्ष संपर्क पर निर्भर है।

केंद्र ने टीकाकरण के लिए वकीलों का अलग वर्ग बनाने का विरोध किया है और कहा कि हालांकि वह अदालत कर्मियों के खिलाफ नहीं है, लेकिन कल होकर पत्रकार और बैंकिंग सेवा के कर्मचारी भी आगे आकर टीकाकरण में प्राथमिकता देने की मांग करने लगेंगे।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना तथा न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमण्यन की पीठ ने केंद्र से टीकाकरण में प्राथमिकता देने के वकीलों के अनुरोध पर विचार करने को कहा क्योंकि उनकी आजीविका लोगों से संपर्क पर निर्भर है तथा (कोरोना वायरस) संक्रमण की चपेट में आने की उनकी आशंका वास्तविक है।

केंद्र की ओर से पेश होते हुए सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ‘‘मुझे इस पर निर्देश की जरूरत है। मैं कहीं से भी वकीलों के खिलाफ नहीं हूं। यहां तक कि मुझे टीका नहीं लगा है क्योंकि मैं (टीकाकरण के लिए निर्धारित) मानदंड को पूरा नहीं करता हूं , लेकिन एक सब्जी विक्रेता की आजीविका भी अन्य लोगों के संपर्क में आने पर निर्भर है, तो फिर टीकाकरण में उसे प्राथमिकता क्यों नहीं दी जानी चाहिए।’’

मेहता ने पीठ से कहा, ‘‘यदि कल होकर पत्रकार भी आगे आकर यह कहने लग जाएं कि उनकी आजीविका भी अन्य लोगों के संपर्क में आने पर निर्भर है और कहें कि वे भी (टीकाकरण में प्राथमिकता के लिए)एक अलग वर्ग हैं तथा उन्हें प्राथमिकता आधार पर टीका लगाने की जरूरत है। तो फिर हमें क्या करना चाहिए? हम पेशे के आधार पर अलग वर्ग नहीं बना सकते हैं। ’’

पीठ ने कहा, ‘‘हम ठीक से नहीं जानते कि पत्रकार अपना कामकाज कैसे करते हैं, लेकिन हम यह जानते हैं कि पत्रकार वकीलों के विपरीत लोगों के संपर्क में आए बगैर काम कर सकते हैं। ’’

शीर्ष न्यायालय ने कहा, ‘‘वकील और चिकित्सक जैसी कुछ खास श्रेणियां हैं जिन्हें अपनी आजीविका के लिए लोगों के संपर्क में आने की जरूरत पड़ती है। क्या विशेषज्ञ समिति लोगों की इन श्रेणियों का टीकाकरण करने पर गौर करेगी। ’’

न्यायालय ने वकीलों, न्यायाधीशों और अदालत कर्मियों की एक जनहित याचिका और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया तथा भारत बायोटेक की दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।

मेहता ने कहा कि विशेषज्ञ समिति देश में चल रहे टीकाकरण

अभियान के तौर तरीकों पर गौर कर रही है और इसे स्थिति पर समग्र दृष्टिकोण अपनाना होगा तथा उन्हें इस पर न्यायालय के निर्देश की जरूरत होगी।

बहरहाल, न्यायालय ने इस विषय की सुनवाई अगले हफ्ते के लिए निर्धारित कर दी।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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