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सांप्रदायिक घटनाओं की जांच के लिए पत्रकारों को त्रिपुरा आमंत्रित किया जाना चाहिए : सुष्मिता

By भाषा | Updated: November 16, 2021 22:45 IST

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अगरतला, 16 नवंबर तृणमूल कांग्रेस नेता सुष्मिता देव ने मंगलवार को कहा कि त्रिपुरा सरकार को पत्रकारों के एक समूह को आमंत्रित करना चाहिए जो इस तथ्य का पता लगा सकें कि सीमावर्ती राज्य में सांप्रदायिक घटनाएं हुई हैं या नहीं।

उनकी प्रतिक्रिया त्रिपुरा के सूचना और संस्कृति मंत्री (आईसीए) सुशांत चौधरी के उन आरोपों के जवाब में आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि त्रिपुरा में हाल में हुई सांप्रदायिक घटनाओं की रिपोर्टिंग करने आईं दो महिला पत्रकार समृद्धि सकुनिया और स्वर्णा झा एक राजनीतिक दल की एजेंट थीं। मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि दोनों पत्रकार राज्य सरकार के खिलाफ लोगों को भड़काना चाहती थीं।

राज्यसभा सदस्य देव ने कहा, 'मुझे नहीं पता, उन्होंने (किस पार्टी का) संकेत दिया था। यदि राज्य में कोई सांप्रदायिक तनाव नहीं है तो उन्हें पत्रकारों के एक समूह को राज्य में आमंत्रित करना चाहिए कि वे स्वयं देखें कि यहाँ क्या हो रहा है... राज्य में पहले कोई धार्मिक तनाव नहीं था और यह सब भाजपा के सत्ता में आने के बाद ही शुरू हुआ।"

तृणमूल नेता ने यह भी आरोप लगाया कि सांप्रदायिक घटनाओं के संबंध में कोई गिरफ्तारी नहीं की गई "क्योंकि वे अच्छी तरह से जानते हैं कि भारतीय जनता पार्टी के लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा... यह गुजरात मॉडल है जिसका अनुसरण त्रिपुरा सरकार कर रही है, न कि बंगाल का, क्योंकि बंगाल मॉडल का मतलब विकास है।" देव ने कांग्रेस छोड़ दी थी और 16 अगस्त को तृणमूल में शामिल हो गयी थीं।

इससे पहले चौधरी ने सोमवार को संवाददाताओं से बातचीत में आरोप लगाया, “ये दो, जो खुद को पत्रकार बता रही थीं, असल में यहां राजनीतिक दल के एजेंट के तौर पर आई थीं और राज्य में सांप्रदायिक दंगे जैसा माहौल बनाने की कोशिश की। उन्होंने हमारी सरकार के खिलाफ लोगों के एक हिस्से को भड़काने तक की कोशिश की। मुझे उनके पत्रकार होने पर शक है।”

त्रिपुरा में हालिया सांप्रदायिक घटनाओं पर रिपोर्टिंग के लिए त्रिपुरा आईं एचडब्ल्यू न्यूज नेटवर्क की दो महिला पत्रकारों - समृद्धि सकुनिया और स्वर्णा झा को असम पुलिस ने रविवार को असम-त्रिपुरा सीमा के करीब करीमगंज के नीलम बाजार में हिरासत में ले लिया था। बाद में उन्हें त्रिपुरा लाया गया और सोशल मीडिया पर भड़काऊ और फर्जी खबरें पोस्ट करने के आरोप में सोमवार सुबह औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।

बाद में दोनों महिला पत्रकारों को सोमवार को जमानत पर रिहा कर दिया गया।

देव ने कहा कि राज्य में सांप्रदायिक घटनाओं के बाद पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और उच्चतम न्यायालय के वकीलों सहित कई लोगों ने राज्य का दौरा किया था। उसके बाद घटनाओं को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वालों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत 102 लोगों पर मामला दर्ज किया गया था।

उन्होंने कहा, "हमें इस बात की जानकारी भी नहीं थी कि उन्होंने राज्य का दौरा किया था और लोगों के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद ही इसका पता चला।’’

त्रिपुरा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बीरजीत सिन्हा ने कहा, “किसी भी घटना को कवर करने वाले पत्रकारों को गिरफ्तार करना मौलिक अधिकार के उल्लंघन के समान है। यह किसी लोकतांत्रिक राज्य में स्वीकार्य नहीं है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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