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सिद्दीकी कप्पन की रिहाई की मांग को लेकर पत्रकारों का दिल्ली में प्रदर्शन

By भाषा | Updated: October 5, 2021 21:54 IST

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नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन की तत्काल रिहाई की मांग को लेकर विभिन्न पत्रकार संघों के सदस्यों ने मंगलवार को यहां प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (पीसीआई) के बाहर प्रदर्शन किया।

पीसीआई अध्यक्ष उमाकांत लखेड़ा ने कहा, ‘‘ कप्पन को जेल में रहते हुए एक साल पूरा हो जाने पर हमने आज इस कार्यक्रम का आयोजन किया है। उन्हें मौके पर जाने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था। आज तक वह सलाखों के पीछे हैं। हम स्वतंत्र मीडिया के लिए लड़ रहे हैं। इस पर कोई अंकुश नहीं होना चाहिए। अगर कोई रिपोर्टिंग के लिए मौके पर जा रहा है तो मीडिया पर कोई रोक नहीं होनी चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘खोजी पत्रकारिता दिन-ब-दिन दम तोड़ रही है। हम देश की सर्वोच्च न्यायपालिका से कप्पन को रिहा करने और उनके खिलाफ लगे आरोपों को रद्द करने की अपील कर रहे हैं।’’

केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (केयूडब्ल्यूजे), पीसीआई और दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (डीयूजे) के तत्वावधान में आयोजित इस विरोध कार्यक्रम में अनेक पत्रकार शामिल हुए।

कप्पन और तीन अन्य को उत्तर प्रदेश में मथुरा पुलिस ने पिछले साल 5 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था, जब वे उस दलित लड़की के परिवार के सदस्यों से मिलने के लिए हाथरस के एक गांव जा रहे थे जिसकी सामूहिक बलात्कार के बाद मौत हो गई थी।

चारों को शांति भंग की आशंका पर गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में उन पर राजद्रोह और विभिन्न आतंकी अपराधों में शामिल होने के कड़े आरोप लगा दिए गए।

डीयूजे की महासचिव सुजाता मधोक ने कहा, ‘‘हम आज यहां इसलिए एकत्रित हुए हैं क्योंकि कप्पन और उनके साथ गए अन्य लोगों को जेल में बंद हुए एक साल हो गया है। न्यायपालिका को कदम उठाने चाहिए। आप लोगों को अनिश्चित काल के लिए जेल में नहीं रख सकते।’’

इस बीच, कप्पन के साथ गिरफ्तार किये गए 'कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया' के अतीकुर रहमान के परिवार के सदस्यों और दोस्तों ने पीसीआई में मीडिया को संबोधित किया और चारों की रिहाई की मांग की।

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद ने आरोप लगाया कि चारों आरोपियों के खिलाफ दर्ज आरोप मनगढ़ंत हैं।

उन्होंने दावा किया, ''मैं इन लोगों के साथ एकजुटता प्रकट करने आया हूं, जिन्हें हाथरस जाते समय गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ पूरी तरह गलत तरीके से मनगढ़ंत आरोप लगाए गए । वे एक साल से जेलों में बंद हैं। उन्हें जमानत दी जानी चाहिए क्योंकि हमें मुकदमा जल्द शुरू होता नहीं दिख रहा।''

रहमान की पत्नी संजीदा रहमान ने कहा कि उनके पति को तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत है।

उन्होंने कहा, ''उनकी हालत ठीक नहीं है। उन्हें चिकित्सा सहायता के लिए एम्स जाना है। मेरे बच्चे मुझसे पूछते हैं कि हमारे पिता कहां हैं? मैं उनसे क्या कहूं? कृपया मुझे न्याय दिलाने में मदद करें और उन्हें जेल से रिहा किया जाए।''

राज्यसभा सांसद एल हनुमंतैया ने कहा, ''मैं बेंगलुरु से यहां उन लोगों के समर्थन में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करने आया हूं, जो राजद्रोह के मामलों में गिरफ्तार किए गए हैं और एक साल बाद भी बिना मुकदमे के जेल में बंद हैं... मैं चाहता हूं कि सभी लोगों को जमानत दी जाए।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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