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झारखंड: मौत के बाद 19 घंटे तक पड़ा रहा सपेरे का शव, दफनाने के लिए किसी ने नहीं दी जमीन

By एस पी सिन्हा | Updated: September 23, 2019 18:38 IST

मिथुन सपेरा की मौत टीबी की बीमारी के कारण हो गई थी. इसे मिट्टी देने के लिए मृतक की बहन हिना देवी और भाई गोपाल सपेरा रो-रोकर बिश्रामपुर के कई लोगों के पास गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन मृतक मिथुन सपेरा को मिट्टी देने के लिए कोई जमीन देने को तैयार नहीं हुआ. 

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ठळक मुद्देमिथुन सपेरा की मौत टीबी की बीमारी के कारण हो गई थी. लेकिन मृतक मिथुन सपेरा को मिट्टी देने के लिए कोई जमीन देने को तैयार नहीं हुआ. 

झारखंड के हजारीबाग से एक ह्र्दयविदारक घटना सामने आई है, जहां सांप दिखाकर जीवन यापन करने वाले मिथुन सपेरा की मौत के बाद इसे दफनाने के लिए उसके परिवार वाले गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन वहां के निवासी उसे दफनाने के लिए जगह देने को तैयार नही हुए. यह घटना हजारीबग जिले के बडकागांव प्रखंड के विश्रामपुर पंचायत की है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार मिथुन सपेरा की मौत टीबी की बीमारी के कारण हो गई थी. इसे मिट्टी देने के लिए मृतक की बहन हिना देवी और भाई गोपाल सपेरा रो-रोकर बिश्रामपुर के कई लोगों के पास गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन मृतक मिथुन सपेरा को मिट्टी देने के लिए कोई जमीन देने को तैयार नहीं हुआ. 

उक्त शव को मिट्टी देने के लिए कोई जमीन नहीं मिलने के कारण 19 घंटे तक विश्रामपुर बाजार सेड में ही मृतक का शव पड़ा रहा. बताया जाता है कि मृतक मिथुन सपेरा, भाई गोपाल सपेरा पिता रामू सपेरा व उनके अन्य परिवार गया जिले के कोच थाना ग्राम धरारा के निवासी हैं. इनके साथ और भी सांप का खेल दिखाने वाले फुलवारी शरीफ व पटना के रहने वाले हैं. मृतक की बहन हिना देवी, गोपाल सपेरा व उनके साथ रहने वाले सूर्या नट, नेपाली नट, गुड्डू नट समेत अन्य महिलाओं ने बताया कि 21 सितंबर को मृतक मिथुन सपेरा को मिट्टी देने के लिए अस्मसान घाट में कोई जगह नहीं दिया गया.

हालांकि कुछ लोग जब उनकी मजबूरी को समझें तो विश्रामपुर नदी तट स्थित श्मशान घाट के पास जमीन देने के लिए तैयार हो गये. लगभग 3 फीट तक गड्ढे भी खोदे. लेकिन एक गांव का अमीन आकर लोगों को गलत तरीके से समझा बुझा दिया. इस कारण लोग वहां पर लाश को दफनाने नहीं दिये. लाश को दफनाने के लिए कई गणमान्य लोगों के पास भी फरियाद किया, पर कोई ध्यान नहीं दिये. अंत में राजपूत टोला के लोगों ने शव को दफनाने के लिए नदी तट के पास जमीन दी. तब मृतक को मिट्टी दी गई. लेकिन इस दौरान किसी ने उनकी सुध नही ली.

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