झारखंड: कांग्रेस के द्वारा पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को पार्टी से निकाले जाने के बाद हेमंत सोरेन सरकार बुलडोजर चलाकर किया उनके घर को जमींदोज
By एस पी सिन्हा | Updated: March 23, 2026 15:42 IST2026-03-23T15:42:24+5:302026-03-23T15:42:24+5:30
यह कार्रवाई एनटीपीसी और पूर्व मंत्री के बीच लंबे समय से चल रहे जमीन और मुआवजे के विवाद के परिणाम स्वरूप हुई है। इस घटना के बाद इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।

झारखंड: कांग्रेस के द्वारा पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को पार्टी से निकाले जाने के बाद हेमंत सोरेन सरकार बुलडोजर चलाकर किया उनके घर को जमींदोज
पटना: झारखंड में कांग्रेस के द्वारा पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाए जाने के बाद हेमंत सोरेन की सरकार ने बुलडोजर एक्शन ले लिया है। इसी कड़ी में हजारीबाग जिले के केरेडारी प्रखंड अंतर्गत जोरदाग में योगेंद्र साव के पैतृक आवास को भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच बुलडोजर चलाकर जमींदोज कर दिया गया। यह कार्रवाई एनटीपीसी और पूर्व मंत्री के बीच लंबे समय से चल रहे जमीन और मुआवजे के विवाद के परिणाम स्वरूप हुई है। इस घटना के बाद इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।
एनटीपीसी अधिकारियों के अनुसार, चट्टी बरियातू कोल खनन परियोजना के विस्तार कार्य में यह मकान बाधा बना हुआ था। प्रशासन का दावा है कि संबंधित भूमि के लिए निर्धारित मुआवजा राशि बहुत पहले ही तय कर दी गई थी। चूंकि योगेंद्र साव ने उस राशि को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था, इसलिए नियमानुसार उस रकम को ट्रिब्यूनल कोर्ट में जमा करा दिया गया था। परियोजना कार्य को गति देने के लिए अधिकारियों ने इस ध्वस्तीकरण को आवश्यक कदम बताया है।
कार्रवाई की सूचना मिलते ही योगेंद्र साव की बेटी और बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद मौके पर पहुंचीं और कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन और एनटीपीसी प्रबंधन ने बिना उचित मुआवजा दिए और बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के घर को ध्वस्त कर दिया है। उन्होंने इसे ‘भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013’ का सरेआम उल्लंघन करार दिया और इस कार्रवाई को कानूनी रूप से चुनौती देने की बात कही है।
अंबा प्रसाद ने एक चौंकाने वाला दावा भी किया कि जब बुलडोजर की कार्रवाई शुरू हुई, उस समय उनकी मां और पूर्व विधायक निर्मला देवी घर के अंदर ही मौजूद थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने उनकी सुरक्षा को नजरअंदाज करते हुए कार्रवाई जारी रखी। पूर्व विधायक ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बताते हुए कहा कि वे इस अन्याय के खिलाफ जनता के बीच जाएंगी और कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी।