झलारिया गांवः नहीं बचा ढाई वर्षीय भागीरथ, 60 फीट गहरे बोरवेल और 22 घंटे रेस्क्यू के बाद?, सीएम मोहन यादव ने दुख जताया और 4 लाख की आर्थिक सहायता?
By बृजेश परमार | Updated: April 11, 2026 12:19 IST2026-04-11T12:18:26+5:302026-04-11T12:19:46+5:30
Jhalaria village: घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, SDERF और NDRF की टीम द्वारा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया था लेकिन दुर्भाग्यवश बालक को नहीं बचाया जा सका।

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उज्जैनः उज्जैन जिले की बडनगर तहसील अंतर्गत झलारिया गांव के खेत में गुरुवार शाम को भेड चराने वाले प्रवीण देवासी का ढाई वर्ष का पुत्र भागीरथ खेलते समय खेत में बोरवेल में जा गिरा। देवासी का परिवार तीन दिन पूर्व ही यहां आया था। हादसे की जानकारी लगने पर थाना पुलिस पहुंची एवं रेस्क्यू आपरेशन शुरू किया गया है। लेकिन 60 फीट गहरे बोरवेल से 22 घंटे रेस्क्यू के बाद हाथ खाली रहा और बच्चे की मौत हो गई। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ट्वीट किया, "उज्जैन के बड़नगर अंतर्गत झलारिया गांव में बोरवेल में गिरे ढाई वर्षीय भागीरथ के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है।
घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, SDERF और NDRF की टीम द्वारा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया था लेकिन दुर्भाग्यवश बालक को नहीं बचाया जा सका। मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिवार के साथ हैं। सरकार की ओर से परिजनों को ₹4 लाख की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जा रही है..."
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ट्वीट किया, "उज्जैन के बड़नगर अंतर्गत झलारिया गांव में बोरवेल में गिरे 3 वर्षीय भागीरथ के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, SDERF और NDRF की टीम द्वारा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया था लेकिन दुर्भाग्यवश… https://t.co/mkfVxN9BEwpic.twitter.com/9GBc5hSRa6
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 10, 2026
बडनगर तहसील के ग्राम झलारिया में पलदूना मार्ग पर गिरे राजस्थान पाली जिला के गुडानला गांव के गडरिया परिवार के ढाई वर्षीय बच्चे भागीरथ पिता पंसाराम उर्फ प्रवीण देवासी को 21 घंटे बाद अचेतन स्थिति में बोरवेल इंप्रवाईड टूल किट डिवाईस एवं अंडर वाटर कैमरा के सहारे अचेतन स्थिति में निकाल लिया गया था। बच्चा झलारिया गांव में पलदूना मार्ग स्थित अय्यूब खां के खेत के बोरवेल में गिरा था।
बच्चा करीब 60-70 फीट गहराई में जाकर फंस गया था। उसे निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान रात 9 बजे से ही शुरू हो गया था। कलेक्टर रोशनकुमारसिंह के अनुसार देर रात को ही भोपाल से एनडीआरएफ ,हरदा-इंदौर से एसडीआरएफ की 200 सदस्यीय टीम ने पहुंचकर रेस्क्यू अभियान को तेज गति दी थी।
मौजूद एंबूलेंस से डाक्टर एवं चिकित्सा स्टाफ की मौजूदगी में सीधे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया है। होमगार्ड के जिला कंमाडेंट संतोष जाट के अनुसार दोहरे विकल्प के साथ रेस्क्यू को अंजाम दिया जा रहा था। बोरवेल एवं पास में कैनाल खुदाई दोनों को बराबर अंजाम दिया जा रहा था। बडनगर सिविल अस्पताल के चिकित्साधिकारी सुयश श्रीवास्तव के अनुसार शाम को बच्चे को एंबूलेंस से लाया गया था।
उसकी मृत्यु हो चुकी थी । पोस्टमार्टम के उपरांत शव परिजनों को सुपूर्द किया गया है। एसपी प्रदीप शर्मा के अनुसार बच्चा एवं उसका परिवार पिछले कई सालों से अय्यूब के खेत में भेड बैठाते आए हैं। उनका वर्षों से यहां आना रहा है। राजस्थान से हर वर्ष इस रास्ते पर आने के दौरान वे अपना डेरा यही लगाते रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम में मर्ग कायम कर जांच करवाई जाएगी।
खास बात यह है कि भागीरथ शुक्रवार को राजस्थान के पाली जिले के लिए परिवार के साथ रवाना होने वाला था। वहां पर पारिवारिक विवाह समारोह में उसे शामिल होना था। उसकी मौसी के अनुसार मासूम भागीरथ सबसे ज्यादा खुश था, क्योंकि उसे शादी में पहनने के लिए नए कपड़े दिलाए गए थे।
कल तक वह उन नए कपड़ों को पहनकर पूरे घर में चाहक रहा था और उसकी हंसी से आंगन गूंज रहा था। भागीरथ की मौसी ने भारी मन से बताया कि घर के अधिकांश लोग राजस्थान पहुंच चुके थे और भागीरथ का परिवार भी निकलने ही वाला था। शाम को नए कपड़ों में खेलते हुए वह गहरे बोरवेल में गिर गया।
खेत मालिक अय्यूब खां के अनुसार बोरवेल ढंका हुआ था। मृतक भागीरथ के फूफा पारस के अनुसार बच्चा गुरूवार देर शाम को भेडों को घेरने के दौरान बोरवेल के पास खेल रहा था। उसने ढककन को धक्का देकर उसमें अपना एक पांव डालकर बैठने की कोशिश की थी जिसे उसकी मां ने भी देखा था और उसी दौरान बच्चा बोरवेल में समा गया था।