Jammu Kashmir: ईद-उल-फितर से पहले कश्मीर के बाजारों से रौनक गायब, जानिए वजह

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: March 18, 2026 12:10 IST2026-03-18T12:10:34+5:302026-03-18T12:10:40+5:30

Jammu Kashmir: व्यापारी अब भी उम्मीद कर रहे हैं कि आखिरी समय की खरीदारी से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन मौजूदा माहौल को देखते हुए लगता है कि यह ईद बिना उस आर्थिक रौनक के गुजर सकती है जिसके लिए कश्मीर के बाजार जाने जाते हैं।

jammu Kashmir traditional hustle and bustle of Kashmir's markets ahead of Eid al-Fitr is missing this year | Jammu Kashmir: ईद-उल-फितर से पहले कश्मीर के बाजारों से रौनक गायब, जानिए वजह

Jammu Kashmir: ईद-उल-फितर से पहले कश्मीर के बाजारों से रौनक गायब, जानिए वजह

Jammu Kashmir: ईद-उल-फितर से पहले कश्मीर के बाजारों में जो पारंपरिक रौनक देखने को मिलती है, वह इस साल गायब है। घाटी भर के व्यापारी इसे अपनी याद में ईद से पहले के सबसे धीमे मौसमों में से एक बता रहे हैं। उनका कहना है कि पहलगाम हमले, सेब के खराब मौसम, बढ़ती कीमतों और वैश्विक तेल संकट के असर के कारण परिवारों ने खर्च बहुत कम कर दिया है।

शोपियां के एक व्यापारी बशीर अहमद के बकौल, हमने ईद से पहले इतनी सुस्ती कभी नहीं देखी। आमतौर पर, इस समय तक बाजार देर शाम तक भीड़भाड़ वाले रहते हैं, लेकिन अब मुश्किल से ही कोई ग्राहक आता है। बिक्री अब तक के सबसे निचले स्तर पर है, और रोजमर्रा के खर्च निकालना भी मुश्किल होता जा रहा है।

व्यापारियों ने बताया कि जहां पारंपरिक रूप से ईद की खरीदारी कपड़े, जूते-चप्पल और बेकरी की चीजों पर केंद्रित होती थी, वहीं इस साल लोग सिर्फ़ जरूरी चीजें ही खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा कि पतझड़ के मौसम से ही यह गिरावट जारी है, और अब ईद से पहले हालात सुधरने की उम्मीदें भी धूमिल होती जा रही हैं।

अनंतनाग के एक व्यापारी मोहम्मद शफी गनई के शब्‍दों में नुकसान बहुत गहरा है। वे कहते थे कि पिछले साल पहलगाम हमले के बाद पर्यटन में कमी और हाईवे बंद होने के कारण सेब की मांग में गिरावट से लोगों को भारी नुकसान हुआ है। वे अब सिर्फ जरूरी चीजें ही खरीद रहे हैं।

पुलवामा में ट्रेडर्स एसोसिएशन के सदस्य रऊफ अहमद कहते थे कि बिक्री इतनी गिर गई है कि कई व्यापारी अपने कारोबार को बनाए रखने को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने वैश्विक युद्ध तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और स्थानीय निवेश का 'हाई-डेंसिटी फार्मिंग' (सघन खेती) की ओर मुड़ना जैसे कई कारणों को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया।

व्यापारियों के अनुसार, स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देने में पर्यटन की अहम भूमिका होती है, और पर्यटकों की पर्याप्त आमद न होने का असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

अनंतनाग में कपड़ों की दुकान के मालिक गुलाम नबी कहते थे कि पिछले साल पर्यटन उतना अच्छा नहीं रहा जितनी उम्मीद थी, और इसका सीधा असर हमारी कमाई पर पड़ा है। पर्यटन से जुड़े लोगों—जैसे कैब ड्राइवर, होटल कर्मचारी और गाइड—के पास इस साल पैसे कम हैं, जिसका मतलब है कि बाजारों में खर्च भी कम हो रहा है।

बागवानी क्षेत्र को भी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सेब उगाने वालों ने कहा कि उन्हें एक "बहुत मुश्किल" सीजन का सामना करना पड़ा। उन्होंने आगे कहा कि कम मांग और कम मुनाफे के कारण कश्मीर की अर्थव्यवस्था के एक पूरे हिस्से के पास खर्च करने के लिए पैसे कम रह गए हैं।

व्यापारियों ने उन लोगों के खर्च करने के तरीकों में भी बदलाव देखा है जिनके पास संसाधन हैं। खरीदारी करने के बजाय, कई लोग ज्‍यादा पैदावार देने वाले बागों में निवेश कर रहे हैं। कुपवाड़ा के एक व्यापारी का कहना था कि जिन लोगों के पास पैसा है, वे बाजारों में खर्च नहीं कर रहे हैं, बल्कि खेती में निवेश कर रहे हैं। इससे खुदरा कारोबार पर काफी असर पड़ रहा है।

ऐसे में व्यापारिक संगठनों ने अधिकारियों से अपील की है कि वे पर्यटकों की आमद बढ़ाएं, बागवानी उत्पादों के लिए बेहतर मुनाफा सुनिश्चित करें और बाजार का भरोसा बहाल करने के लिए महंगाई पर काबू पाएं। व्यापारी अब भी उम्मीद कर रहे हैं कि आखिरी समय की खरीदारी से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन मौजूदा माहौल को देखते हुए लगता है कि यह ईद बिना उस आर्थिक रौनक के गुजर सकती है जिसके लिए कश्मीर के बाजार जाने जाते हैं।

Web Title: jammu Kashmir traditional hustle and bustle of Kashmir's markets ahead of Eid al-Fitr is missing this year

भारत से जुड़ीहिंदी खबरोंऔर देश दुनिया खबरोंके लिए यहाँ क्लिक करे.यूट्यूब चैनल यहाँ इब करें और देखें हमारा एक्सक्लूसिव वीडियो कंटेंट. सोशल से जुड़ने के लिए हमारा Facebook Pageलाइक करे