तापमान में वृद्धि से जंस्कार दरिया जमा नहीं, चद्दर ट्रैक पर ट्रैकिंग की उम्मीद धुंधली?

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: February 3, 2026 13:22 IST2026-02-03T13:20:21+5:302026-02-03T13:22:02+5:30

आल लद्दाख टूर आपरेटर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी छिवांग नामग्याल ने बताया कि बहुत पर्यटक चादर ट्रैक पर आने के लिए मन बनाए बैठे थे।

jammu kashmir news weather imdb Zanskar River not frozen due rise temperature hopes trekking Chaddar Track have faded | तापमान में वृद्धि से जंस्कार दरिया जमा नहीं, चद्दर ट्रैक पर ट्रैकिंग की उम्मीद धुंधली?

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Highlightsजंस्कार नदी के किनारों पर कुछ जगहों पर दो से तीन फुट बर्फ ही जमी है।जनवरी के दूसरे पखवाड़े में नदी में बर्फ नहीं जमी थी।टीम ने इस बार जंस्कार नदी की दो बार रैकी की थी।

जम्मूः रोमांच पाने के लिए लद्दाख आकर चद्दर ट्रैक पर ट्रैकिंग करने की तमन्ना रखने वालों को इस बार निराशा ही हाथ लगी है क्योंकि तापमान में वृद्धि के कारण जंस्कार दरिया अभी तक इस बार पूरी तरह से न जम पाने के कारण चद्दर ट्रैक पर ट्रैकिंग की उम्मीद धुंधली ही है। अधिकारियों ने भी इसके प्रति पुष्टि की है कि लद्दाख में तामपान में वृद्धि को देखते हुए स्पष्ट हो गया कि अब जंस्कार नदी पर ट्रैकिंग संभव नहीं होगी। लद्दाख में फरवरी महीने में तापमान बढ़ने लगता है। आल लद्दाख टूर आपरेटर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी छिवांग नामग्याल ने बताया कि बहुत पर्यटक चादर ट्रैक पर आने के लिए मन बनाए बैठे थे।

लद्दाख पुलिस, डिजास्टर रिस्पांस फोर्स, वन्यजीव, पर्यटन विभाग के अधिकारियों के साथ आल लद्दाख टूर आपरेटर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों की संयुक्त टीम ने इस बार जंस्कार नदी की दो बार रैकी की थी। जनवरी के दूसरे पखवाड़े में नदी में बर्फ नहीं जमी थी। जंस्कार नदी के किनारों पर कुछ जगहों पर दो से तीन फुट बर्फ ही जमी है।

रैकी करने वाली टीम ने दोनों बार जिला प्रशासन को दी अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि जंस्कार नदी पर ट्रैकिंग करना असुरक्षित है। दूसरी बार रैकी करने वाली टीम ने कुछ दिनों में जंस्कार नदी का निरीक्षण करने का फैसला किया था। लेकिन इससे पहले ही प्रशासन ने ट्रैकिंग रद करने का फैसला कर दिया।

माना जा रहा है कि पिछले कुछ सालों से जलवायु परिवर्तन के कारण निर्धारित समय में जंस्कार नदी में बर्फ नहीं जम रही है। जिला प्रशासन ने स्थानीय टूर, ट्रैवल आपरेटरों को निर्देश दिए कि जंस्कार नदी पर ट्रैकिंग संबंधी गतिविधियां रद कर दें। इस बार खतरा है। नदी में बर्फ नहीं जमी है, ऐसे में ट्रैकिंग गतिविधियों का आयोजन संभव नहीं है।

पर्यटकों व ट्रैकरों को भी हिदायत दी गई है कि वे जंस्कार नदी में ट्रैकिंग न करने के निर्देशों का पालन करें। प्रशासन के इस आदेश से पर्यटकों के साथ जंस्कार नदी में ट्रैकिंग गतिविधियां प्लान कर रहे स्थानीय टूर, ट्रैवल आपरेटरों में निराशा है। चद्दर ट्रेकिंग सिर्फ एक शानदार अनुभव ही नहीं बल्कि इतनी खुबसूरत बर्फिली वादियों को दिखाता है, जैसा शायद हमने सिर्फ फिल्मों या तस्वीरों में ही देखा होगा।

यह एक तरह नदी को पैदल चलकर पार करना ही तो होता है। हां, नदी जमकर ठोस बर्फ की बन चुकी होती है। फिल्मों में जैसे सर्दियों में हर तरफ बर्फ की मोटी चादर दिखाई जाती है, ठीक वैसे ही चादर ट्रेक में नदी और आसपास का जहां भी नजरे जाएं, वहां सिर्फ बर्फ ही बर्फ दिखाई देती है। यहां बैठना, सोना, खेलना सब कुछ मानो सिर्फ सफेद बर्फ से ही होता है।

चद्दर ट्रेक की गिनती कठिनतम ट्रेक में होती है। इसका बेस कैंप लेह से करीब 60-70 किमी दूर तिलाद में होता है। इसलिए सबसे पहले आपको लेह पहुंचना होगा और वहां से बेस कैंप जाना पड़ेगा। तिलाद से ट्रेकिंग शुरू कर चिलिंग के माध्यम से चादर ट्रेक के डेस्टिनेशन पर पहुंचा जाता है। चिलिंग से आप जैसे-जैसे जंस्कर नदी के किनारे-किनारे आगे बढ़ते हैं, जंस्कर नदी जमने लगती है। लगभग 105 किमी लंबे इस ट्रेक को पूरा करने में लगभग 9-15 दिनों का समय लगता है।

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