जम्मू कश्मीरः 8 जिलों में 200 से अधिक आतंकी?, खोजो और मार डालो अभियान तेज?
By सुरेश एस डुग्गर | Updated: February 9, 2026 16:21 IST2026-02-09T16:20:56+5:302026-02-09T16:21:21+5:30
Jammu and Kashmir: गृह मंत्रालय (एमएचए) ने गर्मियों की शुरुआत से पहले जम्मू क्षेत्र में सक्रिय 40 से 50 आतंकियों को खत्म करने के लिए समन्वित निरंतर अभियान शुरू करने का निर्देश दिया था जिससे आतंक मुक्त जम्मू कश्मीर के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सके।

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Kashmir: केंद्रीय गृहमंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के निर्देशों के बाद पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों ने जम्मू कश्मीर के आठ जिलों के 200 से अधिक इलाकों में आतंकियों के खिलाफ खोजो और मार डालो अभियान तेज कर दिया है। इनमें मुख्य रूप से नियंत्रण रेखा (एलओसी) के साथ ऊंचे इलाकों और जंगली इलाकों को शामिल किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा प्रतिष्ठान के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इन अभियानों का उद्देश्य संभाग में कई घातक हमलों के लिए जिम्मेदार आतंकी नेटवर्क को खत्म करना है। वरिष्ठ अधिकारियों ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए इसके प्रति खुलासा किया था।
गृह मंत्रालय (एमएचए) ने गर्मियों की शुरुआत से पहले जम्मू क्षेत्र में सक्रिय 40 से 50 आतंकियों को खत्म करने के लिए समन्वित निरंतर अभियान शुरू करने का निर्देश दिया था जिससे आतंक मुक्त जम्मू कश्मीर के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सके।
सूत्रों ने जम्मू क्षेत्र के आठ जिलों में चल रहे व्यापक सुरक्षा अभ्यास के पीछे के औचित्य को समझाते हुए बताया कि इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए, 26 जनवरी के बाद बड़े पैमाने पर तलाशी शुरू की गई है, जो कि जम्मू क्षेत्र में गर्मियों से पहले लगातार आतंकी खतरों को खत्म करने के लिए एमएचए के स्पष्ट निर्देशों के अनुरूप है।
अभियानों में शामिल एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि सेना, जम्मू कश्मीर पुलिस और अर्धसैनिक बलों के बीच घनिष्ठ समन्वय के नतीजे मिल रहे हैं और हम आतंकवाद को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका कहना था कि राजौरी और पुंछ जिले आतंकी गतिविधियों के लिए जाने जाते हैं,
लेकिन आतंकियों ने 2024 में छह अन्य जिलों- रियासी, डोडा, किश्तवाड़, कठुआ, उधमपुर और जम्मू में भी अपनी पैठ बना ली है। अधिकारी बताते थे कि इन जिलों में आतंकी घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों को चिंतित कर दिया। इन हमलों में 64 लोगों की जान गई थी। इनमें 28 सुरक्षाकर्मी, 23 आतंकवादी और 13 नागरिक शामिल हैं।
इसी तरह आतंकी हिंसा में शिव खोड़ी मंदिर से लौट रहे तीर्थयात्रियों की बस पर लक्षित हमला शामिल है, जिसके परिणामस्वरूप सात नागरिक मारे गए, साथ ही उधमपुर और किश्तवाड़ में तीन ग्राम रक्षा गार्ड (वीडीजी) की हत्या भी हुई थी। उन्होंने बताया कि हालांकि हमारे समन्वित अभियान आतंकवादियों और उनके सहायक तंत्र को कोई राहत न देने की स्पष्ट रणनीति के अनुरूप रहे हैं।
फिर भी राष्ट्रीय त्योहार के शांतिपूर्ण आयोजन के बाद, बर्फ पिघलने से पहले छिपे हुए आतंकवादियों की तलाश के लिए उन्हें (तलाशी अभियान) और तेज कर दिया गया है। यह आगामी महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के मद्देनजर भी महत्वपूर्ण है, जिसके लिए आतंक मुक्त परिदृश्य सुनिश्चित करने और संभावित खतरों से निपटने के लिए सुरक्षा की अतिरिक्त परतों की आवश्यकता होती है।
वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा बताया कि यह हिंसा आतंकी समूहों की बदलती रणनीति को दर्शाती है, जो अब व्यापक भौगोलिक क्षेत्र में शांति को बाधित करने का लक्ष्य बना सकते हैं। हम उन्हें वह स्थान न देने के लिए हर संभव कदम उठा रहे हैं। वर्तमान में, 200 से ज्यादा स्थानों पर तलाशी अभियान चल रहा है,
जिसमें चिनाब घाटी किश्तवाड़, डोडा और रामबन जिलों में फैली हुई है, दस सक्रिय तलाशी स्थलों के साथ प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रही है। राजौरी और पुंछ में अन्य सात स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है, जबकि उधमपुर में 16, रियासी में 5 और जम्मू जिले में 3 अभियान चल रहा है।