जम्‍मू कश्‍मीर: घाटी में अनुसूचित जातियों के खिलाफ अपराध में कमी, 3 सालों के आंकड़े आए सामने

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: February 12, 2026 11:31 IST2026-02-12T11:31:13+5:302026-02-12T11:31:18+5:30

Jammu and Kashmir:  इस बीच, लेह और करगिल समेत केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में 2021 से 2023 तक अनुसूचित जातियों के खिलाफ क्राइम का कोई केस रिपोर्ट नहीं हुआ।

Jammu and Kashmir Crimes against Scheduled Castes have declined in Valley data for the last 3 years has come to light | जम्‍मू कश्‍मीर: घाटी में अनुसूचित जातियों के खिलाफ अपराध में कमी, 3 सालों के आंकड़े आए सामने

जम्‍मू कश्‍मीर: घाटी में अनुसूचित जातियों के खिलाफ अपराध में कमी, 3 सालों के आंकड़े आए सामने

Jammu and Kashmir: जम्‍मू कश्‍मीर के लिए यह सुखद खबर हो सकती है कि प्रदेश में अनुसूचित जातियों के खिलाफ अपराध की दर बहुत ही कम है। पिछले 3 साल के आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में प्रदेश में कुछ ही मामले दर्ज हुए हैं। दरअसल लोकसभा में पेश किए गए ऑफिशियल डेटा के मुताबिक, जम्मू और कश्मीर में पिछले तीन सालों में अनुसूचित जातियों के खिलाफ अपराधों से जुड़े मामलों की संख्या कम रही है।

आंकड़ों के मुताबिक, यह जानकारी मिनिस्ट्री आफ सोशल जस्टिस एंड एम्पावरमेंट ने लोकसभा मेंबर अनीता नागरसिंह चौहान के एक बिना तारांकित सवाल के जवाब में शेयर की।

डेटा के मुताबिक, जम्‍मू कश्‍मीर में 2021 में 13 मामले, 2022 में 11 मामले और 2023 में 26 मामले दर्ज हुए, जो पिछले साल के मुकाबले थोड़ी बढ़ोतरी दिखाते हैं। 2023 में दर्ज मामलों में से 10 में चार्जशीट दाखिल की गई, जो जांच एजेंसियों द्वारा कानूनी कार्रवाई शुरू करने का संकेत है।

जिले के हिसाब से घटनाओं का ब्यौरा दिखाता है कि सिर्फ कुछ जिलों से ही घटनाओं की रिपोर्ट मिली, जबकि जम्मू कश्मीर के ज्‍यादातर जि में ऐसे कोई मामले दर्ज नहीं हुए। 2023 के दौरान, डोडा में दो मामले, कठुआ, राजौरी, रियासी, सांबा और पुंछ में एक-एक मामले दर्ज किए गए। उधमपुर में 3 मामले दर्ज किए गए।

वर्ष 2022 में, मुख्य रूप से जम्मू (11), उधमपुर (4), किश्तवाड़ (3), कठुआ (1), राजौरी (1) और रियासी (1) से मामले दर्ज किए गए, जबकि 2021 में, उधमपुर (6), कठुआ (4), रियासी (1) और किश्तवाड़ (1) में मामले दर्ज किए गए।

श्रीनगर, अनंतनाग, बारामुल्‍ला, बांडीपोरा, कुपवाड़ा, बडगाम, पुलवामा, शोपियां, गंदरबल और कुलगाम समेत बाकी सभी जिलों में इस दौरान कोई मामला दर्ज नहीं किया गया।

डेटा से यह भी पता चलता है कि जम्मू कश्मीर में साइबर क्राइम विंग्स, एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स, इकोनामिक आफेंस विंग या विजिलेंस जैसी स्पेशल एजेंसियों ने कोई केस रजिस्टर नहीं किया। इस बीच, लेह और करगिल समेत केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में 2021 से 2023 तक अनुसूचित जातियों के खिलाफ क्राइम का कोई केस रिपोर्ट नहीं हुआ।

नेशनल लेवल पर, सरकार ने पार्लियामेंट को बताया कि 2023 में पूरे भारत में अनुसूचित जातियों के खिलाफ क्राइम के 57,789 केस रजिस्टर हुए, साथ ही यह भी दोहराया कि अनुसूचित जातियों की सुरक्षा और न्याय पक्का करने के लिए एससी-एसटी (प्रिवेंशन आफ एट्रोसिटीज) एक्ट, 1989 जैसे कानून लागू किए जा रहे हैं।

Web Title: Jammu and Kashmir Crimes against Scheduled Castes have declined in Valley data for the last 3 years has come to light

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