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इतालवी नौसैनिकों का मामला: मछुआरे की मां की केरल उच्च न्यायालय से मुआवजा दिलाने की गुहार

By भाषा | Updated: September 14, 2021 14:30 IST

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कोच्चि, 14 सितंबर केरल उच्च न्यायालय ने उस मछुआरे की मां द्वारा मुआवजे की मांग की याचिका पर मंगलवार को केंद्र से जवाब मांगा जो मछली पकड़ने के काम आने वाली नौका ‘सेंट एंटोनी’ पर सवार था और जिस पर दो इतालवी नौसैनिकों ने 2012 में गोलीबारी की थी। इस घटना से सदमे में आए युवक ने बाद में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी।

उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के वकील को याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। इस मामल में अब दो सप्ताह बाद सुनवाई होगी।

महिला ने याचिका में कहा है कि नौका के मालिक ने नौका पर सवार लोगों की सूची में उनके बेटे का नाम नहीं भेजा था और इस वजह से सदमे से उबारने के लिए उसकी न तो काउंसलिंग हुई और न ही उन्हें मुआवजा मिला।

उनके वकील ने अदालत को बताया कि घटना के बाद सदमे में आए याचिकाकर्ता महिला के बेटे ने बाद में आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने कहा कि महिला के बेटे का नाम उचित मुआवजे पर विचार करने के लिए इतालवी अधिकारियों को भेजा जाना चाहिए था।

उस नौका पर सवार रहे और उस घटना का सामना करने वाले दस मछुआरों ने पिछले महीने उच्चतम न्यायालय से मुआवजा दिलाने की गुहार लगाई थी। इसके बाद शीर्ष अदालत ने केरल उच्च न्यायालय से कहा था कि नौका के मालिक के लिए दिए गए दो करोड़ रूपये के मुआवजे में से वह कोई राशि जारी नहीं करें।

उच्चतम न्यायालय ने केरल के दो मछुआरों को केरल तट के निकट फरवरी 2012 में मार डालने के मामले में आरोपी दो इतालवी नौसैनिकों मासिमिलानो लातोरे और सल्वातोरे गिरोने के खिलाफ भारत में चल रहे आपराधिक मामले को बंद करने का 15 जून को निर्देश दिया था क्योंकि मारे गए मछुआरों और नौका मालिक के लिए इटली गणराज्य की ओर से दस करोड़ रूपये की क्षतिपूर्ति दी गई थी।

न्यायालय ने कहा था कि इस राशि में से, केरल के दोनों मछुआरों के वारिसों के नाम पर चार-चार करोड़ रूपये जमा करवाए जाएं तथा बाकी के दो करोड़ रूपये नौका मालिक को दिए जाएं। न्यायालय ने केरल उच्च न्यायालय से दस करोड़ रूपये के मुआवजे के आवंटन पर निगरानी रखने को कहा था।

हाल में मछुआरों की ओर से जो नई याचिका दाखिल की गई है, उसमें कहा गया है कि वे भी उस घटना में घायल हुए थे इसलिए उन्हें भी मुआवजा मिलना चाहिए। मछुआरों ने अपने दावों पर कोई भी फैसला आने तक मुआवजा राशि के वितरण पर रोक लगाने का अनुरोध किया है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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