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जीव-जन्तुओं के साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व होना चाहिए: योगी

By भाषा | Updated: November 30, 2021 00:32 IST

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लखनऊ, 29 नवम्बर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा कि मनुष्य यदि अपने अस्तित्व को बचाने के लिए शेष जीव-जन्तुओं के अस्तित्व के साथ खिलवाड़ करेगा, तो यह खिलवाड़ एक दिन उसी के लिए भीषण संकट का कारण बनेगा, इसलिए जीव-जंतुओं के साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रकृति के जीवन चक्र में केवल मनुष्य ही सब कुछ नहीं है, मनुष्य इसका बहुत छोटा सा हिस्सा है।उनके अनुसार हर जीव-जन्तु एक-दूसरे पर निर्भर रहता है, एक-दूसरे पर उसका जीवन टिका हुआ है।

मुख्यमंत्री आज यहां नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान के शताब्दी समारोह में बोल रहे रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने प्राणि उद्यान में ‘शताब्दी स्तम्भ’ का अनावरण तथा डाक टिकट एवं शताब्दी स्मारिका का विमोचन किया। स्मारिका में प्राणि उद्यान की 100 वर्ष की उपलब्धियों का वर्णन है। उन्होंने प्राणि उद्यान के जीव-जन्तुओं के अंगीकर्ताओं को भी सम्मानित किया। बच्चों द्वारा सुझाये गये नाम के आधार पर 06 बाघों का नामकरण किया।

मुख्यमंत्री ने कहा ,‘‘लखनऊ प्राणि उद्यान की 100 वर्ष की यह पारी एक शानदार पारी है। हमें इस प्रयास को और आगे बढ़ाना है। साथ ही, यहां की पिछली सभी स्मृतियों को बनाये रखते हुए कुछ नयापन लाने की भी आवश्यकता है। उस दिशा में क्या प्रयास हो सकते हैं, इसके लिए यहां पर पूर्व में कार्यरत पूर्व निदेशकों एवं प्रशासकों से सहयोग लेकर लखनऊ प्राणि उद्यान के साथ ही अन्य प्राणि उद्यानों को भी वैश्विक स्तर के मानक पर आगे बढ़ाने में योगदान दिया जा सकता है।’’

मुख्यमंत्री ने कहा ,‘‘ यदि किसी मनुष्य के मूल व्यवहार को जानना है, तो जीव-जन्तुओं के प्रति उसका जो व्यवहार है, वही उसका मूल स्वभाव होता है। अगर वह मूक पशु-पक्षियों के प्रति हिंसक है तो वह मानवता के प्रति भी हिंसक होगा। अगर वह मूक पशु-पक्षियों के प्रति संवेदना रखता है, तो वह मानवता के प्रति संवेदनापूर्ण व्यवहार करने की क्षमता रखता है।’’

मुख्यमंत्री योगी ने कहा , ‘‘प्रदेश में ईको-टूरिज्म की असीम सम्भावनाएं हैं। इसे आगे बढ़ाने में पर्यटन विभाग के सहयोग से विभिन्न गतिविधियों को संचालित किया जा सकता है। प्रदेश में वर्ष 1947 से वर्ष 2017 तक 70 वर्षों में दो प्राणि उद्यान ही बन पाये थे। जबकि विगत पांच वर्षों में एक प्राणि उद्यान गोरखपुर में स्थापित किया गया है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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