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सच है कि अन्य देशों की तुलना में भारत ने बचायी अधिकतम लोगों की जान : मोदी

By भाषा | Updated: August 15, 2021 18:37 IST

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नयी दिल्ली, 15 अगस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि यह सच है कि दुनिया के अन्य देशों की तुलना में भारत में कम लोग कोविड-19 से संक्रमित से हुए और देश अधिकतम संख्या में अपने नागरिकों को बचा सका लेकिन यह उनकी सरकार के लिए पीठ थपथपाने का विषय नहीं है।

लाल किले की प्राचीर से 75वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा प्रधानमंत्री ने देश में कोविड-19 रोधी टीकों के निर्माण के लिए वैज्ञानिक समुदाय की सराहना की और कहा कि यदि यह नहीं होता तो भारत को टीकों के लिए बाहरी दुनिया पर निर्भर होना पड़ता।

कोरोना का विश्‍व में पूरी मानव जाति के लिए ‘‘बहुत बड़ी चुनौती’’ करार देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने बहुत ही संयम और धैर्य के साथ इस महामारी का मुकाबला किया।

उन्होंने कहा, ‘‘इस लड़ाई में हमारे सामने अनेक चुनौतियां थीं लेकिन हर क्षेत्र में हम देशवासियों ने असाधारण गति से काम किया है। हमारे वैज्ञानिकों और हमारे उद्यमियों की ताकत का ही परिणाम है कि भारत को टीकों के लिए आज किसी और पर निर्भर नहीं होना।’’

पोलियो का टीका भारत को मिलने में लगे वक्त का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘आप कल्‍पना कीजिए... पलभर सोचिए... अगर भारत के पास अपने टीके नहीं होते तो क्‍या होता।’’

उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा कि इतने बड़े संकट में और जब पूरी दुनिया में महामारी हो, तब देश को टीके कैसे मिलते।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत को शायद मिलता कि नहीं मिलता और मिलता भी तो कब मिलता, लेकिन आज गौरव से कह सकते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम हमारे देश में चल रहा है। 54 करोड़ से ज्‍यादा लोग टीकों की खुराक लगवा चुके हैं।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविन जैसी ऑनलाइन और डिजिटल सर्टिफिकेट देने की भारत की व्‍यवस्‍था आज दुनिया को आकर्षित कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह बात सही है कि अन्‍य देशों की तुलना में भारत में कम लोग संक्रमित हुए हैं। यह भी सही है कि दुनिया की देशों की जनसंख्‍या की तुलना में भारत में हम अधिकतम संख्या में हमारे नागरिकों को बचा सके, लेकिन ये हमारे लिए पीठ थपथपाने का विषय नहीं है। संतोष पाकर के सो जाने का विषय नहीं है। ये कहना कि कोई चुनौती नहीं थी ये हमारे अपने विकास के आगे के रास्‍तों को बंद करने वाली सोच बन जाएगी।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के समृद्ध देशों की तुलना में देश में व्‍यवस्‍थाएं कम हैं और विश्‍व के समृद्ध देशों के पास जो हैं, वह भारत के पास नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन इन सारे प्रयासों के बावजूद ... और दूसरी तरफ हमारे यहां जनसंख्‍या भी बहुत है। विश्‍व की तुलना में बहुत जनसंख्‍या है और हमारी जीवन शैली भी कुछ अलग सी है। सारे प्रयासों के बाद भी कितने ही लोगों को हम बचा नहीं पाए हैं।’’

उन्होंने कहा इस महामारी के चलते कितने ही बच्‍चों के सिर पर कोई हाथ फेरने वाला चला गया तो उसे दुलारने व उसकी जिद्द पूरी करने वाला चला गया।

उन्होंने कहा, ‘‘यह असहनीय पीड़ा...यह तकलीफ हमेशा साथ रहने वाली है।’’

उन्होंने कोविड-19 महामारी से निपटने में चिकित्सकों, नर्सों और पराचिकित्सकों के योगदान की भी सराहना की।

महामारी के दौरान 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन मुहैया कराने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि इसने दुनिया को हैरान कर दिया है और यह चर्चा का विषय बन गया है। मोदी ने गांवों और शहरों में जीवन के अंतर को पाटने के लिए कदम उठाने का भी आह्वान किया।

उल्लेखनीय है कि देश में रोजाना कोरोना संक्रमण के करीब 40,000 मामले सामने आ रहे हैं। पिछले चौबीस घंटों में कोरोना वायरस संक्रमण के 36,083 नए मामले सामने आए। इसके बाद देश में अब तक संक्रमित पाए गए लोगों की कुल संख्या बढ़कर 3,21,92,576 हो गई है तथा 493 और संक्रमितों की मौत हो जाने के बाद कुल मृतक संख्या बढ़कर 4,31,225 हो गई है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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