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अफगान लोगों की मदद के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर आगे आना चाहिए : संरा महासभा अध्यक्ष

By भाषा | Updated: July 23, 2021 20:06 IST

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नयी दिल्ली, 23 जुलाई संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के अध्यक्ष-निर्वाचित अब्दुल्ला शाहिद ने शुक्रवार को कहा कि युद्धग्रस्त अफगानिस्तान में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के बीच वहां के लोगों की मदद करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर आगे आना चाहिए।

मालदीव के विदेश मंत्री शाहिद ने एक अग्रणी थिंक टैंक में यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र के पास अफगानिस्तान में निभााने के लिए एक ‘‘अत्यंत स्पष्ट भूमिका’’ है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा को बनाए रखना संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का दायित्व है।

शाहिद बुधवार को अपनी तीन दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंचे। संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष-निर्वाचित की हैसियत से उन्होंने सबसे पहले भारत की यात्रा की है। उन्हें सात जून को इस पद के लिए चुना गया था।

उन्होंने इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स के संवाद सत्र में कहा, ‘‘अफगान लोग बहुत ही उदार हैं। उनका नेतृत्व मजबूत है, उनकी सरकार लोगों द्वारा लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार है।’’

शाहिद ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को साथ मिलकर आगे आना चाहिए और अफगान लोगों की मदद करनी चाहिए जिससे कि वे अपनी सरकार द्वारा तैयार किए गए मार्ग पर आगे बढ़ सकें।’’

अमेरिका द्वारा अपने अधिकतर सैनिकों को वापस बुलाए जाने के बाद तालिबान ने पिछले कुछ सप्ताहों में अफगानिस्तान के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है। अमेरिका ने युद्धग्रस्त देश से 31 अगस्त तक अपने सैनिकों की वापसी पूरी होने की घोषणा कर रखी है।

शाहिद ने अपने संबोधन में कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष के रूप में उनकी तात्कालिक प्राथमिकता कोविड-19 से उबरने में विश्व की मदद करने पर केंद्रित होगी।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रभाव व्यापक है, और अब भी यह बीमारी खत्म होती प्रतीत नहीं होती। नए स्वरूप (वायरस के) सामने आ रहे हैं और हम अब भी दीर्घकालिक स्वास्थ्य परिणामों को लेकर स्पष्ट नहीं हैं। संयुक्त राष्ट्र इसके समाधान के लिए अधिक कर सकता है और करना चाहिए।’’

मालदीव के विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘मैं हमारे लोगों के स्वास्थ्य और हमारी अर्थव्यवस्थाओं से संबंधित चीजों के समाधान के लिए काम करूंगा। और टीका समानता के लिए कार्य करूंगा। हमें विश्व का टीकाकरण करने की आवश्यकता है। जब तक हर कोई सुरक्षित नहीं है तब तक कोई भी सुरक्षित नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के साथ ही जलवायु परिवर्तन, महासागरीय स्थिति, मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और जैव विविधता हृास जैसी चुनौतियां भी बरकरार हैं।

शाहिद ने भविष्य से जुड़ी निर्णय प्रक्रियाओं में युवा लोगों की भागीदारी का आह्वान किया और कहा कि लैंगिक समानता का मुद्दा उनकी प्राथमिकता में होगा।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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