नारद मामले में बंगाल के दो मंत्रियों, टीएमसी विधायक और पूर्व महापौर को अंतरिम जमानत

By भाषा | Updated: May 28, 2021 21:06 IST2021-05-28T21:06:42+5:302021-05-28T21:06:42+5:30

Interim bail granted to two Bengal ministers, TMC MLA and former mayor in Narada case | नारद मामले में बंगाल के दो मंत्रियों, टीएमसी विधायक और पूर्व महापौर को अंतरिम जमानत

नारद मामले में बंगाल के दो मंत्रियों, टीएमसी विधायक और पूर्व महापौर को अंतरिम जमानत

कोलकाता, 28 मई कलकत्ता उच्च न्यायालय ने नारद स्टिंग टेप मामले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए गए पश्चिम बंगाल के दो मंत्रियों - सुब्रत मुखर्जी और फरहाद हकीम, टीएमसी विधायक मदन मित्रा और शहर के पूर्व महापौर शोभन चटर्जी को शुक्रवार को अंतरिम जमानत दे दी।

उच्च न्यायालय की पांच न्यायाधीशों की पीठ ने इन सभी को अंतरिम जमानत देते हुये कई शर्तें लगायीं हैं। पीठ ने चारों आरोपी नेताओं को दो-दो लाख रुपये का निजी मुचलका जमा कराने का निर्देश दिया है। ये सभी नजरबंद हैं।

पीठ ने आरोपियों- मंत्री सुब्रत मुखर्जी और फरहाद हकीम, टीएमसी विधायक मदन मित्रा और शहर के पूर्व महापौर शोभन चटर्जी- से उच्च न्यायालय में या निचली अदालत में लंबित उन मामलों के संबंध में मीडिया में या सार्वजनिक तौर पर टिप्पणी न करने का निर्देश दिया है, जिनमें वे या अन्य सह अभियुक्त हैं।

पांच न्यायाधीशों की पीठ में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश जिंदल और न्यायमूर्ति आई पी मुखर्जी, न्यायमूर्ति हरीश टंडन, न्यायमूर्ति सोमेन सेन और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी शामिल थे। पीठ ने आरोपियों को सबूतों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित या धमकाने की कोशिश नहीं करने को कहा।

अदालत ने आरोपियों को निर्देश दिया है कि जब सीबीआई के जांच अधिकारियों को उनकी जरूरत हो तो वे पूछताछ के लिए उपलब्ध रहें।

अदालत ने कहा कि पश्चिम बंगाल में कोविड-19 की वजह से लागू पाबंदियों के चलते पूछताछ की कार्रवाई डिजिटल माध्यम से हो सकती है।

इस मामले पर 31 मई को दोबारा सुनवाई होगी।

सीबीआई ने अनुरोध किया कि नारद स्टिंग ऑपरेशन टेप मामले की सुनवाई सीबीआई की विशेष अदालत से उच्च न्यायालय स्थानांतरित किया जाए। उच्च न्यायालय ने ही केंद्रीय एजेंसी को मामले की जांच करने का आदेश दिया है।

सीबीआई का पक्ष रख रहे भारत के सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने आरोपी नेताओं के अंतरिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि वे प्रभावशाली व्यक्ति हैं, जो सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं या मामले को लेकर सार्वजनिक बयान दे सकते हैं या जांच या सुनवाई के लिए बुलाए जाने पर भीड़ एकत्र कर सकते हैं।

पीठ ने कहा कि यह आरोपियों को अंतरिम जमानत का सही मामला लगता है क्योंकि इस मामले में जो तथ्यात्मक और कानूनी मामले उठाए गए हैं उनके अंतिम आकलन में कुछ समय लग सकता है।

पांच न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि यह अंतरिम जमानत सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने या अगले आदेश तक जारी रहेगी।

आरोपियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने मामला अदालत के समक्ष लंबित रहने तक अंतरिम जमानत देने का अनुरोध किया।

कलकत्ता उच्च न्यायालय के 2017 के आदेश पर नारद स्टिंग टेप मामले की जांच कर रही सीबीआई ने चारों नेताओं को 17 मई की सुबह को गिरफ्तार किया था।

सीबीआई की एक विशेष अदालत ने चारों आरोपियों को 17 मई को अंतरिम जमानत दी थी लेकिन उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की खंड पीठ ने बाद में फैसले पर रोक लगा दी थी। इसके बाद इन नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

आरोपियों की ओर से उच्च न्यायालय के रोक के फैसले को वापस लेने की याचिका पर 21 मई को पीठ में शामिल न्यायमूर्ति बनर्जी और न्यायमूर्ति बिंदल की राय अलग-अलग थी। न्यायमूर्ति बनर्जी चारों आरोपियों को जमानत देने के पक्ष में थे जबकि न्यायमूर्ति बिंदल उन्हें घर में ही नजरबंद करने के पक्ष में थे।

बाद में पीठ ने जमानत पर स्थगन आदेश में बदलाव किया और चारों आरोपियों को घर पर ही नजरबंद करने का आदेश दिया।

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Web Title: Interim bail granted to two Bengal ministers, TMC MLA and former mayor in Narada case

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