भिक्षा की राह से किताबों की दुनिया तक: 40 बच्चों की उम्मीद भरी सुबह

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 26, 2026 14:21 IST2026-02-26T14:19:53+5:302026-02-26T14:21:07+5:30

इंदौर: कल्पना कीजिए उन मासूम आंखों को—जिनमें कभी भिक्षावृत्ति की मजबूरी झलकती थी, अब चमक रही है आत्मविश्वास की।

Indore From the path of begging to the world of books morning full of hope for 40 children | भिक्षा की राह से किताबों की दुनिया तक: 40 बच्चों की उम्मीद भरी सुबह

भिक्षा की राह से किताबों की दुनिया तक: 40 बच्चों की उम्मीद भरी सुबह

इंदौर: 25 फरवरी,सड़कों पर धूल उड़ाते चौराहों के कोने में, जहां भीड़ की चहल-पहल के बीच छोटे-छोटे हाथ भीख मांगते नजर आते थे, वहां से निकलकर आज 40 बच्चे शारदा माध्यमिक विद्यालय की कक्षाओं में बैठे हैं। सुदामा नगर की इस स्कूल की दीवारें अब उनके लिए नई जिंदगी का आईना बन गई हैं। कभी भूख और दरिद्रता की मार झेलने वाले ये बच्चे, अब किताबों के पन्नों में खोकर सपनों को चित्रित कर रहे हैं। जिला प्रशासन की 'भिक्षुक मुक्त इंदौर' अभियान ने न सिर्फ उनकी पहचान की, बल्कि उनके जीवन को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़कर एक नई सुबह का आगमन कर दिया। कल्पना कीजिए उन मासूम आंखों को—जिनमें कभी भिक्षावृत्ति की मजबूरी झलकती थी, अब चमक रही है आत्मविश्वास की। स्कूल में प्रवेश होते ही उन्हें यूनिफॉर्म, स्कूल किट और किताबें थमाई गईं।

एक छोटी बच्ची, जिसका नाम रानी है, ने उत्साह से अपनी नई ड्रेस पहनकर कहा, "अब मैं डॉक्टर बनूंगी, भूख नहीं सताएगी।" उसके माता-पिता की आंखें नम हो गईं, क्योंकि रोजी-रोटी की चिंता के बीच बच्चों का भविष्य अब सुरक्षित लग रहा था। यह बदलाव सिर्फ कागजों पर नहीं, दिलों में उतर आया है। इस कहानी का सबसे हृदयस्पर्शी पल तब आया जब ये बच्चे और उनके परिजन जनसुनवाई के दिन कलेक्टर कार्यालय पहुंचे।  कलेक्टर  शिवम वर्मा ने बच्चों से गर्मजोशी से मुलाकात की।

उन्होंने बिस्कुट बांटे, नई किताबें थमाईं और कहा, "बच्चों, शिक्षा ही वो जादू है जो तुम्हारी जिंदगी बदल देगी। लेकिन याद रखना, मेहनत, अनुशासन और स्वच्छता इसके साथी हैं। साफ रहोगे, तो आगे बढ़ोगे।" कलेक्टर का आश्वासन—प्रशासन हमेशा साथ खड़ा रहेगा—ने माता-पिताओं के चेहरों पर उम्मीद की चमक बिखेर दी।ये 40 बच्चे अब सिर्फ स्कूल के छात्र नहीं, बल्कि एक बड़े बदलाव के प्रतीक हैं।

जिन परिवारों के लिए कल्पना से परे था बच्चों को सम्मानजनक जीवन देना, आज उनके हाथों में स्लेट है और आंखों में उज्ज्वल भविष्य। जिला प्रशासन की यह संवेदनशील पहल साबित करती है कि भिक्षावृत्ति जैसी कुप्रथा को शिक्षा, सहानुभूति और सामूहिक प्रयास से जड़ से उखाड़ा जा सकता है। अगर शासन और समाज हाथ मिलाएं, तो हर सड़क का बच्चा सितारा बन सकता है।

Web Title: Indore From the path of begging to the world of books morning full of hope for 40 children

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