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41 वर्षीय किसान के मरणोपरांत अंगदान से पांच साल की बच्ची के शरीर में धड़कने लगा दिल, डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: December 1, 2021 13:45 IST

अंग प्रतिरोपण से पहले यह बच्ची हृदय की एक गंभीर बीमारी से जूझ रही थी और किसान के मरणोपरांत अंगदान से उसे नयी जिंदगी मिलने की उम्मीद है।

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ठळक मुद्दे41 वर्षीय किसान के मरणोपरांत अंगदान से मिले हृदय का आकार सामान्य के मुकाबले छोटा था।अंगों के इस अजब-गजब संयोग के चलते ही बच्ची के शरीर में एक वयस्क व्यक्ति का हृदय प्रतिरोपित किया जा सका।मुंबई के अस्पताल में हृदय प्रतिरोपण की सर्जरी मंगलवार देर रात खत्म हुई जो चिकित्सा जगत में बेहद दुर्लभ है।

इंदौरः चिकित्सा जगत के बेहद दुर्लभ मामले में इंदौर में 41 वर्षीय किसान के मरणोपरांत अंगदान से मिले हृदय को हवाई मार्ग से मुंबई भेजकर वहां के एक अस्पताल में भर्ती पांच साल की बच्ची के शरीर में प्रतिरोपित किया गया है।

 

अधिकारियों के मुताबिक, अंग प्रतिरोपण से पहले यह बच्ची हृदय की एक गंभीर बीमारी से जूझ रही थी और किसान के मरणोपरांत अंगदान से उसे नयी जिंदगी मिलने की उम्मीद है। इंदौर के शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. संजय दीक्षित ने बुधवार को बताया, ‘‘मुंबई के अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती पांच साल की बच्ची ऐसे विकार की शिकार थी जिसमें उसका हृदय और इसके आस-पास की जगह असामान्य रूप से बड़ी हो गई थी, जबकि 41 वर्षीय किसान के मरणोपरांत अंगदान से मिले हृदय का आकार सामान्य के मुकाबले छोटा था।’’

दीक्षित ने बताया, ‘‘अंगों के इस अजब-गजब संयोग के चलते ही बच्ची के शरीर में एक वयस्क व्यक्ति का हृदय प्रतिरोपित किया जा सका। मुंबई के अस्पताल में हृदय प्रतिरोपण की सर्जरी मंगलवार देर रात खत्म हुई जो चिकित्सा जगत में बेहद दुर्लभ है।’’ उन्होंने बताया कि हृदय प्रतिरोपण के बाद बच्ची की हालत स्थिर बनी हुई है और मुंबई के अस्पताल के डॉक्टर उसकी हालत पर नजर रख रहे हैं।

अधिकारियों ने बताया कि खुम सिंह सोलंकी (41) के मरणोपरांत अंगदान से मिले हृदय को बच्ची के शरीर में प्रतिरोपित करने के लिए इंदौर से मंगलवार शाम हवाई मार्ग से मुंबई रवाना किया गया था। उन्होंने बताया कि पड़ोसी देवास जिले के पिपलिया लोहार गांव के किसान सोलंकी 28 नवंबर को सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उन्हें इंदौर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

अधिकारियों ने बताया कि इलाज के बावजूद सोलंकी की सेहत बिगड़ती चली गई और डॉक्टरों ने मंगलवार को उन्हें दिमागी रूप से मृत घोषित कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक, सोलंकी का परिवार शोक में डूबा होने के बावजूद उनके दिवंगत परिजन के अंगदान के लिए राजी हो गया और इसके बाद सर्जनों ने किसान के मृत शरीर से उनके हृदय के साथ ही उनका जिगर, दोनों गुर्दे और दोनों फेफड़े निकाल लिए।

उन्होंने बताया कि सोलंकी का जिगर और दोनों गुर्दे इंदौर के तीन जरूरतमंद मरीजों को प्रतिरोपित किए गए, जबकि उनके दोनों फेफड़े हैदराबाद के एक अस्पताल में भर्ती 38 वर्षीय मरीज को प्रतिरोपित किए गए। अधिकारियों ने बताया कि किसान के दोनों फेफड़ों को हवाई मार्ग से मंगलवार शाम हैदराबाद भेजा गया था।

अधिकारियों के मुताबिक इंदौर में पिछले छह साल के दौरान दिमागी रूप से मृत 42 मरीजों का अंगदान हो चुका है। इससे मिले हृदय, जिगर, गुर्दे, आंखों और त्वचा के प्रतिरोपण से मध्यप्रदेश के साथ ही दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और तेलंगाना में जरूरतमंद मरीजों को नए जीवन की अनमोल सौगात मिली है। दूसरे सूबों में हवाई मार्ग से अंग पहुंचाए गए हैं।

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