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भारत-रूस वार्ता: चीनी आक्रामकता का उल्लेख; एके-203 राइफल सौदे पर हस्ताक्षर

By भाषा | Updated: December 6, 2021 19:53 IST

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नयी दिल्ली, छह दिसंबर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत-रूस 'दो जमा दो' वार्ता में कहा कि भारत अपने पड़ोस में "असाधारण सैन्यीकरण" और उत्तरी सीमा पर "पूरी तरह से अकारण आक्रामकता" से उत्पन्न चुनौतियों का सामना कर रहा है। दोनों देशों ने छह लाख से अधिक एके-203 राइफलों के संयुक्त उत्पादन के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए और 2031 तक के लिए सैन्य सहयोग बढ़ाया।

सिंह के अलावा, 'दो जमा दो' विदेश और रक्षा वार्ता में विदेश मंत्री एस जयशंकर, उनके रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव और रूसी रक्षा मंत्री जनरल सर्गेई शोयगू ने भाग लिया। मंत्रियों ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर व्यापक चर्चा की।

राजनाथ और शोयगू ने 'दो जमा दो' वार्ता से पहले, सैन्य और सैन्य-तकनीकी सहयोग पर भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (आईआरआईजीसी-एम एंड एमटीसी) की एक बैठक की सह-अध्यक्षता की। इस दौरान दोनों पक्षों ने उत्तर प्रदेश के अमेठी में एक विनिर्माण प्रतिष्ठान में छह लाख से अधिक एके-203 राइफलों के संयुक्त उत्पादन के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए और सैन्य सहयोग पर समझौते को 10 साल (2021-31) के लिए बढ़ा दिया।

राइफलों का निर्माण भारतीय सशस्त्र बलों के लिए लगभग 5000 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। सैन्य सहयोग पर 10 साल का समझौता मौजूदा ढांचे का नवीनीकरण है।

सिंह ने चीन का नाम लिए बिना कहा, “महामारी, हमारे पड़ोस में असाधारण सैन्यीकरण, आयुधों का विस्तार और 2020 के ग्रीष्म से हमारी उत्तरी सीमा पर बिना उकसावे की आक्रामकता से कई चुनौतियां उत्पन्न हुई हैं।’’

उन्होंने कहा कि भारत अपने लोगों की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और अंतर्निहित क्षमता के साथ इन चुनौतियों से पार पाने को लेकर आश्वस्त है।

रक्षा मंत्री ने कहा, "भारत की विकास आवश्यकताएं विशाल हैं तथा उसकी रक्षा चुनौतियां वैध, वास्तविक और फौरी हैं। भारत को ऐसे भागीदारों की आवश्यकता है जो देश की आकांक्षाओं एवं आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील हों और प्रतिक्रिया दे सकें।’’

सिंह ने यह भी आशा व्यक्त की कि रूस इन "बदलती परिस्थितियों" में भारत के लिए एक प्रमुख भागीदार बना रहेगा।

रक्षा मंत्री ने कहा, "रक्षा मंत्रालय से हमने अधिक सैन्य-तकनीकी सहयोग, उन्नत अनुसंधान, सह-विकास और रक्षा उपकरणों के सह-उत्पादन के लिए आग्रह किया है जिससे भारत की आत्मनिर्भरता हो सके।"

उन्होंने कहा, "अलग से, हमने मध्य एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में अधिक से अधिक जुड़ाव का प्रस्ताव रखा है। भारत विशाल यूरेशियन भूभाग की निरंतरता है और साथ ही विशाल हिंद महासागर क्षेत्र में इसकी केंद्रीय स्थिति है।"

सिंह ने कहा, ‘‘हम सभी क्षेत्रों में रूस के सहयोग को लेकर आशान्वित हैं।’’

शोयगू के साथ अपनी द्विपक्षीय बैठक का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि उन्होंने "भारत के सामने उभरती चुनौतियों और रूस के साथ घनिष्ठ सैन्य एवं सैन्य-तकनीकी सहयोग के लिए भारत की विस्तारित आवश्यकता" पर चर्चा की।

वहीं, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपनी टिप्पणी में कहा कि भारत एवं रूस के संबंध बदल रहे विश्व में ‘‘बहुत करीबी एवं समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वे (संबंध) असाधारण रूप से स्थायी रहे हैं।’’

जयशंकर ने कहा, ‘‘हम वैश्विक भू-राजनीतिक माहौल के एक महत्वपूर्ण चरण में मिल रहे हैं जिसमें बहुत बदलाव हो रहे हैं विशेषकर कोविड-19 महामारी के बाद।’’

उन्होंने कहा, ‘‘करीबी मित्र एवं सामरिक भागीदार के रूप में भारत और रूस हमारे साझा हितों को सुरक्षित रखने तथा अपने लोगों की शांति एवं समृद्धि को सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।’’

विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान की स्थिति का मध्य एशिया सहित सभी के लिए व्यापक प्रभाव पड़ेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘कोविड-19 महामारी ने विश्व के समक्ष कई सवाल खड़े किए हैं। लेकिन लंबे समय से चली आ रही चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं और यहां तक कि नयी चुनौतियां भी उभरी हैं जिनमें आतंकवाद, हिंसक उग्रवाद और कट्टरता प्रमुख हैं। अफगानिस्तान की स्थिति का मध्य एशिया सहित सभी पर व्यापक असर पड़ेगा।’’

शोयगू ने कहा कि भारत-रूस संबंधों में द्विपक्षीय सैन्य-तकनीकी सहयोग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है तथा उन्होंने और सिंह ने भविष्य के सहयोग के लिए योजनाओं को अंतिम रूप दिया है।

रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने कहा कि 'दो जमा दो’ मंत्रिस्तरीय संवाद तंत्र पारंपरिक समझ का और विस्तार करेगा तथा द्विपक्षीय विशेष और विशिष्ट रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में मदद करेगा।

उन्होंने कहा, "रूस और भारत दोनों के पास अधिक बहु-केंद्रित, अधिक बहु-ध्रुवीय, अधिक न्यायसंगत विश्व व्यवस्था की समान विश्वदृष्टि है। सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक और सैन्य मुद्दों पर हमारी समान स्थिति है।’’

रूसी मंत्रियों के साथ अपनी चर्चा पर ट्वीट करते हुए सिंह ने कहा कि भारत रूस के साथ अपनी विशेष और विशिष्ट रणनीतिक साझेदारी को महत्व देता है।

उन्होंने ट्वीट किया, "भारत के लिए रूस के मजबूत समर्थन की भारत दिल से सराहना करता है। हमें उम्मीद है कि हमारे सहयोग से पूरे क्षेत्र में शांति, समृद्धि और स्थिरता आएगी। खुशी है कि छोटे हथियारों और सैन्य सहयोग से संबंधित कई समझौतों/अनुबंधों/प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए गए।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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