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वैश्विक रिश्वत जोखिम रैंकिंग में भारत 82वें स्थान पर, पांच स्थान की गिरावट

By भाषा | Updated: November 17, 2021 16:42 IST

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नयी दिल्ली, 17 नवंबर व्यापार रिश्वत जोखिम को आंकने वाली वैश्विक सूची में इस वर्ष भारत पांच पायदान नीचे खिसककर 82वें स्थान पर आ गया है। पिछले साल यह 77वें स्थान पर था।

रिश्वत के खिलाफ मानक स्थापित करने वाले संगठन ‘ट्रेस’ की सूची 194 देशों, क्षेत्रों और स्वायत्त एवं अर्द्ध स्वायत्त क्षेत्रों में व्यापार रिश्वतखोरी जोखिम को दर्शाती है।

इस वर्ष के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर कोरिया, तुर्कमेनिस्तान, वेनेजुएला और इरिट्रिया में सबसे अधिक व्यावसायिक रिश्वतखोरी का जोखिम है, जबकि डेनमार्क, नॉर्वे, फिनलैंड, स्वीडन और न्यूजीलैंड में सबसे कम जोखिम।

आंकड़े से पता चलता है कि भारत 2020 में 45 अंकों के साथ 77 वें स्थान पर था, जबकि इस वर्ष यह 44 अंक के साथ 82 वें स्थान पर रहा। यह अंक चार कारकों पर आधारित है - सरकार के साथ व्यापार बातचीत, रिश्वत-रोधी निवारण और प्रवर्तन, सरकार और सिविल सेवा पारदर्शिता तथा नागरिक समाज की निगरानी की क्षमता जिसमें मीडिया की भूमिका शामिल है।

आंकड़ों से पता चलता है कि भारत ने अपने पड़ोसियों - पाकिस्तान, चीन, नेपाल और बांग्लादेश से बेहतर प्रदर्शन किया है। इस बीच, भूटान ने 62वीं रैंक हासिल की, जैसा कि आंकड़ों से पता चलता है।

इसमें कहा गया है, ‘‘पिछले पांच वर्षों में, वैश्विक रुझानों की तुलना में अमेरिका में व्यापार रिश्वतखोरी जोखिम वातावरण काफी खराब हो गया है। 2020 से 2021 तक, खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सभी देशों ने वाणिज्यिक रिश्वतखोरी जोखिम में वृद्धि देखी है। पिछले पांच साल में जिन देशों ने वाणिज्यिक रिश्वतखोरी के जोखिम वाले कारकों में सुधार की दिशा में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है, वे हैं- उज्बेकिस्तान, गाम्बिया, आर्मेनिया, मलेशिया और अंगोला।”

ट्रेस रिश्वतखोरी जोखिम मैट्रिक्स 194 देशों, स्वायत्त एवं अर्द्ध स्वायत्त क्षेत्रों में रिश्वत की मांग की संभावना को आंकता है। यह मूल रूप से 2014 में दुनिया भर में वाणिज्यिक रिश्वतखोरी के जोखिमों के बारे में अधिक विश्वसनीय और सूक्ष्म जानकारी के लिए व्यावसायिक समुदाय की आवश्यकता को पूरा करने के लिए प्रकाशित किया गया था।

ट्रेस संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक, गोथेनबर्ग विश्वविद्यालय में वी-डेम संस्थान और विश्व आर्थिक मंच सहित सार्वजनिक हितों से जुड़े मुख्य और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से प्राप्त प्रासंगिक डेटा एकत्र करता है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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