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पाक-चीन संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के उल्लेख पर भारत ने जतायी गहरी आपत्ति, कही ये बात

By भाषा | Updated: September 10, 2019 22:17 IST

जम्मू कश्मीर को दिये गए विशेष दर्जे को भारत सरकार द्वारा पांच अगस्त को रद्द करने के बाद भारत-पाकिस्तान में उपजे तनाव के बीच वांग का यह दौरा हो रहा है। चीनी विदेश मंत्री के दो दिवसीय पाक दौरे के समापन के बाद जारी संयुक्त बयान में चीनी पक्ष को कश्मीर को लेकर अपनी चिंताओं, स्थिति और वहां ‘तात्कालिक मानवीय मुद्दों’ से अवगत कराया।

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भारत ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी की इस्लामाबाद की यात्रा के संदर्भ में जारी पाकिस्तान-चीन संयुक्त बयान में जम्मू कश्मीर के उल्लेख पर मंगलवार को गहरी आपत्ति दर्ज की । विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बयान में पाक के कब्जे वाले कश्मीर में चीन.. पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर के उल्लेख पर कहा कि भारत क्षेत्र की यथास्थिति को बदलने के किसी दूसरे देश की पहल का पूरी दृढ़ता के साथ विरोध करता है ।

इस बारे में एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘चीनी विदेश मंत्री की यात्रा के बाद चीन और पाकिस्तान की ओर से जारी संयुक्त बयान में जम्मू कश्मीर के उल्लेख को हम खारिज करते हैं। जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘दूसरी ओर, भारत ने लगातार चीन एवं पाकिस्तान के तथाकथित ‘चीन पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर’ परियोजना पर चिंता व्यक्त की है, जो भारत के क्षेत्र में है और जिस पर 1947 के बाद से पाकिस्तान का अवैध कब्जा है । ’’

कुमार ने कहा कि इससे जुड़े पक्षों को ऐसी कार्रवाई से बचना चाहिए । पाकिस्तान और चीन ने रविवार को वांग के इस्लामाबाद दौरे के दौरान कश्मीर मुद्दे पर चर्चा की थी। इस दौरान दोनों देशों ने क्षेत्र में विवादों को बातचीत के जरिये परस्पर सम्मान और बराबरी के आधार पर हल करने पर बल दिया।

जम्मू कश्मीर को दिये गए विशेष दर्जे को भारत सरकार द्वारा पांच अगस्त को रद्द करने के बाद भारत-पाकिस्तान में उपजे तनाव के बीच वांग का यह दौरा हो रहा है। चीनी विदेश मंत्री के दो दिवसीय पाक दौरे के समापन के बाद जारी संयुक्त बयान में चीनी पक्ष को कश्मीर को लेकर अपनी चिंताओं, स्थिति और वहां ‘तात्कालिक मानवीय मुद्दों’ से अवगत कराया।

बयान के मुताबिक, ‘‘चीनी पक्ष ने कहा कि वह जम्मू कश्मीर के मौजूदा हालात पर करीबी नजर रख रहा है और जोर दिया कि कश्मीर मुद्दा इतिहास में छूटा विवादित मुद्दा है और इसे उचित तरीके से संयुक्त राष्ट्र चार्टर, संरा सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के मुताबिक शांतिपूर्ण ढंग से हल किया जाना चाहिए।’’ इसमें कहा गया कि चीन स्थिति को जटिल बनाने वाली किसी भी एकपक्षीय कार्रवाई के खिलाफ है। 

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