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सार्वभौम कोरोना रोधी टीके की उपलब्धता की नीति से भारत ने लाखों जिंदगियां बचायी: राष्ट्रपति

By भाषा | Updated: December 10, 2021 18:24 IST

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नयी दिल्ली, 10 दिसंबर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दुनिया में दुराग्रह और भेदभाव समाप्त करने का आह्वान करते हुए शुक्रवार को कहा कि भारत कोविड-19 रोधी टीके की नि:शुल्क एवं सार्वभौम उपलब्धता की नीति अपनाकर लाखों जिंदगियां बचाने में सफल रहा है।

मानवाधिकार दिवस के अवसर पर विज्ञान भवन में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया कोविड-19 महामारी के विकट संकट का सामना कर रही है ।

उन्होंने कहा, ‘‘ इतिहास की सबसे भीषण महामारी से मानवता जूझ रही है। अभी भी यह महामारी खत्म नहीं हुई है और विषाणु, मनुष्य से एक कदम आगे दिख रहा है। अब तक विश्व ने विज्ञान और वैश्विक साझेदारी में अपना विश्वास रखकर इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।’’

कोविंद ने कहा कि महामारी मानवता को सार्वभौमिक रूप से प्रभावित करती है, लेकिन यह भी देखा गया है कि समाज के कमजोर वर्गों पर इसका भयानक प्रतिकूल असर होता है।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ स्पष्ट चुनौतियों के बावजूद भारत टीके की नि:शुल्क और सार्वभौम उपलब्धता की नीति अपनाकर लाखों लोगों की जिंदगी बचाने में सफल रहा है। इतिहास में सबसे बड़े टीकाकरण अभियान के माध्यम से सरकार लगभग एक अरब (100 करोड़) लोगों को वायरस से सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम रही है। ’’

उन्होंने लोगों के जीवन एवं स्वास्थ्य के अधिकार के बरकरार रखने की दिशा में प्रभावी प्रयासों के लिये डाक्टरों, वैज्ञानिकों सहित कोरोना योद्धाओं के योगदान की सराहना की ।

राष्ट्रपति ने कहा कि इस अदृश्य शत्रु के साथ लड़ाई में हमें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।

उन्होंने कहा कि अधिक मुश्किल वाले कुछ समय के दौरान, उस परिस्थिति से निपटने के लिए सरकारी संस्थानों ने अपना सबसे बेहतर देने की पूरी कोशिश की, जिसके लिए कोई भी तैयारी पर्याप्त नहीं हो सकती थी।

कोविंद ने कहा कि महामारी से प्रभावित समाज के कमजोर और हाशिए के वर्गों के अधिकारों के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपनी गहरी चिंता के साथ कई सलाह जारी की जिनसे काफी सहायता प्राप्त हुई।

कोविंद ने कहा कि इस वर्ष मानवाधिकार दिवस का विषय समानता रखा गया है और समानता मानवाधिकारों की आत्मा है ।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नागरिक संगठनों एवं निजी स्तर पर मानवाधिकार संरक्षण की दिशा में काम कर रहे लोगों सहित सभी पक्षकारों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि प्रकृति की दुर्दशा के चलते जलवायु में अपरिवर्तनीय बदलाव हो रहे हैं और हम पहले से ही इसके हानिकारक प्रभाव को देख रहे हैं।

उन्होंने कहा कि विश्व इस कठोर वास्तविकता को लेकर सजग हो रही है, लेकिन निर्णायक बदलाव करने का संकल्प अभी तक नहीं लिया गया है।

कोविंद ने कहा कि विश्व को 'एक स्वस्थ पर्यावरण और जलवायु न्याय के अधिकार' पर भी चर्चा करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि मानवाधिकार दिवस हमारे लिए सामूहिक रूप से विचार करने और ऐसी पूर्वधारणाओं को दूर करने के तरीके खोजने का आदर्श अवसर है, जो केवल मानवता की प्रगति में बाधा उत्पन्न करते हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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