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लद्दाख विवाद: भारत और चीन के बीच खत्म हुई सैन्य अधिकारियों की बैठक, 5.30 घंटे तक चली बातचीत

By सुमित राय | Updated: June 6, 2020 19:23 IST

पूर्वी लद्दाख में करीब एक महीने से सीमा पर जारी गतिरोध के समाधान के लिए भारत और चीनी सेना के बीच शनिवार को लेफ्टिनेंट जनरल स्तरीय बातचीत हुई।

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ठळक मुद्देलद्दाख विवाद समाधान के लिए भारत-चीनी सेना के लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत हुई।दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच हुई ये बैठक करीब 5.30 घंटे चली।भारतीय दल का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने, जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व तिब्बत सैन्य जिला कमांडर ने किया।

पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पास भारत और चीन के बीच पिछले महीने से जारी सीमा गतिरोध के समाधान के लिए शनिवार को दोनों देशों के सेनाओं के बीच लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत हुई। बताया जा रहा है कि दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच हुई ये बैठक करीब 5.30 घंटे चली।

भारत और चीन की सेनाओं में स्थानीय कमांडरों के स्तर पर 12 दौर की बातचीत तथा मेजर जनरल रैंक के अधिकारियों के बीच तीन दौर की बातचीत के बाद कोई ठोस नतीजा नहीं निकलने पर शनिवार को लेफ्टिनेंट जनरल स्तर पर बातचीत हुई।

चीन की तरफ माल्डो सीमा कर्मी बैठक स्थल पर हुई बातचीत

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेह स्थित 14वीं कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने किया, जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व तिब्बत सैन्य जिला कमांडर कर रहे थे। यह बातचीत पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की तरफ माल्डो सीमा कर्मी बैठक स्थल पर हुई।

बातचीत के बारे में भारतीय सेना ने नहीं दी कोई जानकारी

सैन्य अधिकारियों के बीच क्या बातचीत हुई इसके बारे में अभी कुछ ज्यादा जानकारी दिए बिना भारतीय सेना के एक प्रवक्ता ने कहा, "भारत और चीन के अधिकारी भारत-चीन सीमावर्ती इलाकों में बने वर्तमान हालात के मद्देनजर स्थापित सैन्य एवं राजनयिक माध्यमों के जरिए एक-दूसरे के लगातार संपर्क में बने हुए हैं।"

सैन्य अधिकारियों के बीच किन मुद्दों पर होनी थी चर्चा

इससे पहले सूत्रों ने कहा था कि भारतीय पक्ष पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी, पैंगोंग सो और गोगरा में यथा स्थिति की पुन:बहाली के लिये दबाव बनाएगा और क्षेत्र में काफी संख्या में चीनी सैनिकों के जमावड़े का भी विरोध करेगा और चीन से कहेगा कि वह भारत द्वारा सीमा के अपनी तरफ किये जा रहे आधारभूत ढांचे के विकास का विरोध न करे।

एक दिन पहले हुई थी राजनयिक स्तर पर बातचीत

उच्च स्तरीय सैन्य वार्ता से एक दिन पहले दोनों देशों के बीच राजनयिक स्तर पर बातचीत हुई और इस दौरान दोनों पक्षों में अपने “मतभेदों” का हल शांतिपूर्ण बातचीत के जरिये एक-दूसरे की संवेदनाओं और चिंताओं का ध्यान रखते हुए निकालने पर सहमति बनी थी।

चीन और भारत के बीच सीमा को लेकर क्या विवाद है?

भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी एलएसी पर विवाद है। चीन अरुणाचल प्रदेश पर दावा करता है और इसे दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताता है। वहीं, भारत इसे अपना अभिन्न अंग करार देता है। दोनों पक्ष कहते रहे हैं कि सीमा विवाद के अंतिम समाधान तक सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता कायम रखना जरूरी है।

क्या है भारत और चीन के बीच लद्दाख में ताजा विवाद

बता दें कि चीन द्वारा पैंगोंग सो इलाके के फिंगर क्षेत्र में भारत द्वारा एक महत्वपूर्ण सड़क निर्माण का तीखा विरोध मौजूदा गतिरोध के शुरू होने की वजह है। इसके अलावा चीन द्वारा गलवान घाटी में दरबुक-शायोग-दौलत बेग ओल्डी मार्ग को जोड़ने वाली एक सड़क के निर्माण के विरोध को लेकर भी गतिरोध है। पैंगोंग सो में फिंगर क्षेत्र में सड़क को भारतीय जवानों के गश्त करने के लिहाज से अहम माना जाता है। भारत ने पहले ही तय कर लिया है कि चीनी विरोध की वजह से वह पूर्वी लद्दाख में अपनी सीमावर्ती आधारभूत परियोजनाओं को नहीं रोकेगा।

लद्दाख में वास्तवित नियंत्रण रेखा (LAC) से सटे कुछ क्षेत्रों में चीन के साथ बीते 5 मई से तनाव की स्थिति कायम है। पांच मई को पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग सो क्षेत्र में लगभग 250 भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच लोहे की छड़ों और डंडों के साथ झड़प हुई थी। इसमें दोनों तरफ के कई सैनिक घायल हो गए थे। इसके बाद चीनी सैनिक 9 मई को सिक्किम के नाकू ला में भी भारतीय सैनिक के साथ उलझ गए थे। उस झड़प में दोनों ओर से करीब 10 सैनिकों को चोटें आई थीं।

विवाद शुरू होने के बाद सीमा पर दो पक्षों ने बढ़ाई जवानों की तैनाती

सैनिकों की झड़प के बाद दोनों पक्षों ने लद्दाख में जवानों की तैनाती बढ़ा दी है। उपग्रह से ली गई तस्वीरों में नजर आ रहा है कि चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा के अपनी तरफ के क्षेत्र में सैन्य आधारभूत ढांचे में महत्वपूर्ण रूप से इजाफा किया है, जिसमें पैंगोंग सो इलाके से 180 किलोमीटर दूर सैन्य हवाईअड्डे का उन्नयन भी शामिल है। चीनी सेना एलएसी के निकट अपने पीछे के सैन्य अड्डों पर रणनीतिक रूप से जरूरी चीजों का भंडारण कर रही है, जिनमें तोप, युद्धक वाहनों और भारी सैन्य उपकरणों आदि को वहां पहुंचाना शामिल है।

चीन ने उत्तरी सिक्किम और उत्तराखंड में वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगे कुछ क्षेत्रों में भी अपनी उपस्थिति बढ़ायी है, जिसके बाद भारत भी अतिरिक्त सैनिकों को भेजकर अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा गया है कि गलवान घाटी के इलाके से दोनों मुल्कों की सेनाएं पीछे हट गई हैं, लेकिन इन खबरों की सेना द्वारा पुष्टि नहीं की गई हैं। समाचारों के मुताबिक, भारतीय सेना अपने इलाके में एक किमी पीछे आई है और चीनी सेना भारतीय क्षेत्र से दो किमी पीछे हट गई है।(भाषा से इनपुट के साथ)

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