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एम्स कर्मचारियों और उनके परिजनों को मिलाकर 1500 से ज्यादा हो चुके हैं कोरोना संक्रमित, पांच स्वास्थ्य कर्मियों की हो चुकी है मौत

By एसके गुप्ता | Updated: July 25, 2020 20:45 IST

एम्स ओपीडी प्रभारी डा. निरूपमा मदान ने लोकमत से विशेष बातचीत में कहा कि हर विभाग की ओपीडी में 60 रोगियों की संख्या सुनिश्चित की गई है। कम संख्या में रोगियों को बुलाने का मकसद उन्हें संक्रमण से बचाना है। इन रोगियों की हर विभाग में एंट्री से पहले स्क्रीनिंग की जाती है।

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ठळक मुद्देदिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एक महीने पहले ओपीडी शुरू की गई। एम्स के 21 में से 18 विभागों की ओपीडी शुरू हो चुकी है।

नई दिल्ली: चिकित्सा सुविधाओं को फिर से पटरी पर लाने के लिए दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एक महीने पहले ओपीडी शुरू की गई। लेकिन कोरोना संक्रमण के डर से रोगी यहां उपचार के लिए नहीं पहुंच रहे हैं। एम्स के 21 में से 18 विभागों की ओपीडी शुरू हो चुकी है। इनमें 100 फीसदी अप्वाइंटमेंट पाने वाले मरीजों में से औसतन 65 फीसदी मरीज ही चिकित्सकों को दिखाने पहुंचते हैं। डेरमेटलॉजी और वेनेरोलॉजी विभाग में मात्र 25 फीसदी रोगी ही आते हैं। जबकि अस्थिरोग, बाल रोग और स्त्रीरोग विभाग में तय अप्वाइंटमेंट के मुताबिक रोगी पहुंच रहे हैं।

एम्स ओपीडी प्रभारी डा. निरूपमा मदान ने लोकमत से विशेष बातचीत में कहा कि हर विभाग की ओपीडी में 60 रोगियों की संख्या सुनिश्चित की गई है। कम संख्या में रोगियों को बुलाने का मकसद उन्हें संक्रमण से बचाना है। इन रोगियों की हर विभाग में एंट्री से पहले स्क्रीनिंग की जाती है। फिलहाल तय अप्वाइंटमेंट में से औसतन 65 फीसदी रोगी ही उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इसकी वजह यह भी है कि रोगियों को टेली काउंसलिंग के जरिए सलाह दी जाती है। पुराने रोगियों को देखने की जरूरत होती है तभी उन्हें बुलाया जाता है। जैसे 27 जुलाई यानि सोमवार को अस्थिरोग विभाग में 60 की बजाए 82 रोगियों को बुलाया गया है। पुराने 22 रोगी ऐसे हैं जिन्हें टेली काउंसलिंग के जरिए चिकित्सकों ने देखना जरूरी समझा है। इस विभाग में सबसे ज्यादा भीड़ है। अगले 10 दिनों में गेस्ट्रो, जीआई सर्जरी और ईएनटी विभाग की ओपीडी भी नए ओपीडी ब्लॉक में शिफ्ट होने के बाद विधिवत तरीके से शुरू हो जाएगी।

एम्स के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने कहा कि दो सप्ताह पहले यहां के मेडिसिन विभाग में भर्ती 11 मरीजों की रपट कोरोना पॉजिटिव आई थी। यह सभी मरीज अन्य बीमारियों के उपचार के लिए एम्स में भर्ती हुए थे। संक्रमण फैलने की इस खबर के बाद कुछ समय के लिए अस्पताल प्रशासन ने मरीजों की भर्ती बंद कर दी थी। फिलहाल तक एम्स कर्मचारियों और उनके परिजनों को मिलाकर 1500  से अधिक लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। पांच स्वास्थ्य कर्मियों की अब तक मौत हो चुकी है। ऐसे में अस्पताल की ओपीडी सेवाएं शुरू हैं लेकिन उपचार के लिए उमडने वाली भीड़ की जगह एम्स के विभाग खाली खाली नजर आ रहे हैं।

टॅग्स :एम्स
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