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सीमा पर बंगाल के खाई खोदने से हाथियों के हमलों की घटनाएं बढ़ रहीं : झारखंड के अफसरों ने कहा

By भाषा | Updated: August 10, 2021 17:00 IST

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(नमिता तिवारी)

रांची/कोलकाता, 10 अगस्त झारखंड के चतरा जिले में पिछले सप्ताह लगभग एक दर्जन हाथियों के झुंड ने एक बुजर्ग महिला को उस समय मार डाला जब वह अपनी झोंपड़ी में सोई हुई थी। हाथियों ने इसके साथ ही कई मकानों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया जिससे इलाके में दहशत फैल गई।

इससे एक दिन पहले, जंगली हाथियों ने रामगढ़ जिले के एक गांव में 60 वर्षीय एक व्यक्ति को मार डाला था और कई मकानों को भी नुकसान पहुंचाया था। ये हाथी भोजन की तलाश में एक आंगनवाड़ी केंद्र पहुंच गए थे।

इससे पहले, हाथियों के एक झुंड ने हजारीबाग में उत्पात मचाया था और एक ग्रामीण को मार डालने के बाद मक्का तथा गन्ने की फसल को बर्बाद कर दिया था।

झारखंड के अधिकारियों का कहना है कि हाथियों के हमलों की बढ़ती घटनाओं की एक मुख्य वजह पश्चिम बंगाल द्वारा अंतरराज्यीय सीमा के पास खाई खोदा जाना है जिससे हाथियों के आवागमन का प्राकृतिक गलियारा अवरुद्ध हो गया है।

उन्होंने कहा कि झारखंड-बंगाल सीमा पर 6.5 किलोमीटर लंबी खाई खोदे जाने से प्राकृतिक गलियारा अवरुद्ध हो गया है जिसकी वजह से हाथी झारखंड की तरफ मनुष्यों की आबादी वाले क्षेत्रों में घुस रहे हैं।

वहीं, कोलकाता में अधिकारियों ने कहा कि खाई बंगाल में मनुष्यों की आबादी वाले क्षेत्रों में हाथियों के प्रवेश और उनके बढ़ते हमलों को रोकने के लिए खोदी गई है।

पश्चिम बंगाल सरकार को लिखे एक पत्र में झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन राजीव रंजन ने इन खबरों को लेकर आपत्ति जताई है कि झारखंड और ओडिशा से लगती सीमाओं पर बांकुरा-झारग्राम के पास 128 किलोमीटर की एक और खाई खोदे जाने की योजना है।

पत्र में कहा गया है, ‘‘यदि पश्चिम बंगाल सरकार इस तरह की योजना क्रियान्वित करती है तो इससे हाथियों का पारंपरिक अंतरराज्यीय आवागमन अवरुद्ध हो जाएगा। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष गंभीर रूप से बढ़ेगा और हाथियों के समूहों के लिए भी समस्या उत्पन्न होगी। इससे हाथियों के संरक्षण कार्य पर भी असर पड़ेगा।’’

हालांकि, पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा है कि और खाई खोदे जाने की कोई योजना नहीं है।

रांची में अधिकारियों ने कहा कि हालांकि मौजूदा खाई की वजह से हाथियों का आवागमन झारखंड तक सीमित हो गया है जिसकी वजह से वे भोजन और पानी की तलाश में गांवों में प्रवेश कर रहे हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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