यूपी में झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई, पुलिस को गलत जानकारी देने पर बीएनएस के तहत होगा मुकदमा

By राजेंद्र कुमार | Updated: February 16, 2026 21:17 IST2026-02-16T21:16:47+5:302026-02-16T21:17:00+5:30

इलाहाबाद हाईकोर्ट के दिए गए निर्देशों के बाद अब यूपी पुलिस ने गलत तरीके से थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में लोगों का गलत तरीके से नाम लिखवाने वाले व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा-217 के तहत कार्रवाई करने का फैसला किया है.

In UP, action will be taken against those filing false reports; giving wrong information to the police will result in a case under the BNS | यूपी में झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई, पुलिस को गलत जानकारी देने पर बीएनएस के तहत होगा मुकदमा

यूपी में झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई, पुलिस को गलत जानकारी देने पर बीएनएस के तहत होगा मुकदमा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में जमीन के विवाद और पारिवारिक झगड़े में होने वाली हिंसा तथा दहेज के प्रकरण में पुलिस थाने पहुंचे लोग एफआईआर में झूठे, भ्रामक या मनगढंत आरोप लगाकर अपने विरोधी को फसाने का प्रयास करते हैं. अब फर्जी रिपोर्ट दर्ज तथा झूठी गवाही और पुलिस को गलत सूचना देने वाले ऐसे लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई करेगी. इलाहाबाद हाईकोर्ट के दिए गए निर्देशों के बाद अब यूपी पुलिस ने गलत तरीके से थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में लोगों का गलत तरीके से नाम लिखवाने वाले व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा-217 के तहत कार्रवाई करने का फैसला किया है. इस कानून के तहत पुलिस को झूठी सूचना देने पर व्यक्ति को एक साल तक की कैद और 10,000 रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है. 

डीजीपी कार्ययोजना तैयार करने में जुटे
 
सूबे के डीजीपी राजीव कृष्णा के कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार, राज्य में हर साल सात लाख से अधिक एफआईआर पुलिस थानों में दर्ज होती है. इसमें कई एफआईआर में लोग अपने विरोधी को फसाने के लिए उसका नाम भी दर्ज करा देते हैं. दहेज के विवाद में यह देखा गया है कि वर पक्ष के पूरे परिवार का नाम वधू पक्ष के लोग एफआईआर में दर्ज करा देते हैं. इसी तरह से एससी-एसटी कानून के तहत भी झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई जाती हैं. 

मायावती के शासनकाल में एससी-एसटी कानून के तहत तीन हजार से अधिक फर्जी शिकायतों को पुलिस जांच में पकड़ा गया था. तब इस मामले में झूठी एफआईआर दर्ज कराने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की बात कही गई थी, लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया था. अभी भी यह सिलसिला उसी तरीके से चल रहा था, लेकिन बीते दिनों इस मामले का इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया. 

कोर्ट ने थाने में झूठी, भ्रामक या मनगढंत सूचना देने वाले व्यक्ति के खिलाफ अनिवार्य रूप से लिखित शिकायत दर्ज कर उसके खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया. अब हाईकोर्ट के इस निर्देश को लागू करने के लिए डीजीपी राजीव कृष्णा ने एक  कार्ययोजना तैयार में जुट गए हैं. उन्होने इस संबंध में उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है, जहां 60 दिनों के अंदर ऐसे मामलों को चिह्नित कर एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू करने पर चर्चा की जाएगी. 

उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

डीजीपी मुख्यालय के सीनियर अधिकारियों के अनुसार, अपने विरोधी को फसाने के लिए एफआरआर दर्ज कराने वाले व्यक्ति पुलिस को झूठी और भ्रामक जानकारी देकर उन्हें गुमराह करता है. पुलिस जांच में इस तरह के झूठ पकड़े जाते हैं और जिस व्यक्ति को फँसने का प्रयास किया गया होता है, उसे पुलिस एफआर (अंतिम रिपोर्ट) में बचा लिए जाता है. लेकिन फर्जी रिपोर्ट दर्ज कराने वाले व्यक्ति के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जाता. इसका ही संज्ञान लेते हुए निर्देश दिया है कि अंतिम रिपोर्ट (एफआर) में फर्जी रिपोर्ट दर्ज कराने, झूठी गवाही और पुलिस को गलत सूचना देने वाले वाले व्यक्ति के खिलाफ भी एक्शन लेने की प्रक्रिया को हर हाल में पूरा किया जाए. इस  आदेश का पालन न करने पर इसे कोर्ट की अवमानना माना जाए और पीड़ित व्यक्ति इस मामले में सीधे कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है. 

कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि जांच में पाया जाए कि सूचना देने वाले ने झूठे, भ्रामक या मनगढ़ंत आरोप लगाए थे, तो पुलिस को अनिवार्य रूप से उसके खिलाफ लिखित शिकायत दाखिल करनी होगी. यह शिकायत संबंधित मजिस्ट्रेट/कोर्ट में धारा 215 (1) (ए) BNSS के तहत दायर की जाएगी. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह सुनिश्चित हो कि हर जांच में झूठी सूचना देने वालों पर कार्रवाई की बाध्यता का पालन हो. कोर्ट ने कहा कि इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर (आईओ), एसएचओ, सीओ, लोक अभियोजक और फॉरवर्डिंग अथॉरिटी इनमें से कोई भी आदेश का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी. कोर्ट ने 60 दिन की समयसीमा तय की है और कहा है कि आईओ, सीओ और अभियोजन अधिकारी आदेश का पालन करें, नहीं तो अवमानना की कार्रवाई होगी. 

फर्जी रिपोर्ट पर कानूनी प्रावधान:

- बीएनएस की धारा 217 (पूर्व में आईपीसी 182): यदि आप पुलिस या लोक सेवक को किसी के खिलाफ गलत जानकारी देते हैं, तो 1 साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों।
- आईपीसी धारा 211 / बीएनएस (विशिष्ट धाराएं): किसी व्यक्ति को फंसाने के इरादे से झूठा मुकदमा दर्ज कराना।
- मानहानि का मुकदमा : यदि झूठी शिकायत से आपकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है, तो आईपीसी 499/500 या नए कानूनों के तहत मानहानि का केस किया जा सकता है।
- पुलिस की कार्रवाई: जब पुलिस जांच में मामला फर्जी पाया जाता है, तो क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जाती है और झूठी शिकायत करने वाले व्यक्ति  के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.  

Web Title: In UP, action will be taken against those filing false reports; giving wrong information to the police will result in a case under the BNS

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