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बोफोर्स मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में नहीं होगी सुनवाई, ये है वजह

By भाषा | Updated: October 12, 2018 05:39 IST

गुरुवार की देर शाम इस मामले को वाद सूची से हटा दिया गया था। भाजपा नेता और अधिवक्ता अजय अग्रवाल की ओर से दायर एक अन्य याचिका का वाद सूची में कोई उल्लेख नहीं किया गया था।

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राजनीतिक रूप से संवेदनशील 64 करोड़ रूपये के बोफोर्स दलाली मामले की उच्चतम न्यायालय में आज सुनवाई नहीं होगी क्योंकि इसे वाद सूची से हटा दिया गया है, जिसमें दिन भर के मामलों की जानकारी होती है। गुरुवार दोपहर तक की वाद सूची से पता चला कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दायर याचिका को न्यायमूर्ति आर भानुमती और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था। इसकी सुनवाई अदालत संख्या आठ में आइटम नंबर 43 के रूप होनी थी।

गुरुवार की देर शाम इस मामले को वाद सूची से हटा दिया गया था। भाजपा नेता और अधिवक्ता अजय अग्रवाल की ओर से दायर एक अन्य याचिका का वाद सूची में कोई उल्लेख नहीं किया गया था।

अग्रवाल ने बताया कि वाद सूची में इस मामले का उल्लेख नहीं किये जाने के बाद जब उन्होंने शीर्ष न्यायालय के एक अधिकारी से संपर्क किया, तो उन्हें बताया गया कि इसे प्रशासनिक आदेश से हटा दिया गया है।

कुछ विधि अधिकारियों ने बताया कि इस साल की शुरुआत में, 13 साल की देरी के बाद दायर की गई याचिका में सीबीआई शुक्रवार को बहस करने के लिए पूरी तरह तैयार थी। अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल और नव नियुक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को अदालत में सीबीआई की तरफ से पेश होना था।

अग्रवाल द्वारा दायर याचिका में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह सीबीआई के लिए पेश हो रहे हैं, जिन्हें उत्तरदाताओं में से एक के रूप में नामित किया गया है।

सीबीआई ने दिल्ली उच्च न्यायालय के 31 मई 2005 के फैसले के खिलाफ इस साल दो फरवरी को अपील दायर की थी । उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में मामले के अभियुक्तों के खिलाफ लगाये गए सभी आरोपों को रद्द कर दिया था।

सीबीआई की विशेष अनुमति याचिका (अपील) को सात खंडों में दयर किया गया था। यह याचिका 1,782 पृष्ठों की है जिसमें विभिन्न अनुलग्नक भी शामिल हैं। जांच एजेंसी अनिवार्य 90 दिनों की अवधि के भीतर अपील दायर करने में विफल रही, लेकिन अग्रवाल ने 17 सितंबर, 2005 को उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका दायर की थी।

सीबीआई ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती नहीं दी थी क्योंकि तत्कालीन संप्रग सरकार ने उच्चतम न्यायलय में विशेष अनुमति याचिका दायर करने की अनुमति को अस्वीकार कर दिया था । इसके बाद अग्रवाल ने यह याचिका दायर की थी । अग्रवाल 2014 में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ रायबरेली से चुनाव भी लड़ चुके हैं।

भारतीय जनता पार्टी के नेता एक दशक से अधिक समय से इस मामले को आगे बढ़ा रहे हैं। बहुत विचार-विमर्श के बाद केंद्र की राजग सरकार से सीबीआई को इस साल शीर्ष न्यायालय में अपील दायर करने की मंजूरी मिल गयी। 

अपील दायर करने का अपना महत्व है क्योंकि अटार्नी जनरल वेणुगोपाल ने एक दशक से भी अधिक देरी के बाद याचिका दायर करने के प्रति जांच एजेंसी को आगाह किया था। परामर्श के बाद विधि अधिकारी अपील दायर करने के पक्ष में थे क्योंकि उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने के लिए सीबीआई को "कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज और साक्ष्य" मिले थे।

फरवरी में सूत्रों ने बताया कि इस मामले में अपील दायर करने के लिए अटॉर्नी जनरल ने मौखिक रूप से सहमति दे दी थी । इस अपील में निजी जासूस माइकल हर्शमैन के अक्टूबर 2017 के उस साक्षात्कार का हवाला दिया गया था, जिसमें उसने आरोप लगाया था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने उनकी जांच को तहस नहस कर दिया था।

अमेरिका स्थित निजी जासूसी फर्म फेयरफैक्स के अध्यक्ष हर्शमैन ने टेलीविजन साक्षात्कार में दावा किया था कि राजीव गांधी उस वक्त "गुस्सा" हो गए थे जब उन्हें स्विस बैंक खाता ‘‘मोंट ब्लैंक’’ मिला था।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि बोफोर्स घोटाले के रिश्वत का पैसा स्विस खाते में जमा किया गया था। सीबीआई ने अपनी अपील में कहा था कि हर्शमैन के साक्षात्कार से संबंधित रिपोर्टों के मुताबिक आगे की जांच जरूरी है।

सीबीआई ने उच्च न्यायालय के 31 मई, 2005 के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी, जिसमें यूरोप के उद्योगपति हिंदुजा बंधुओं - एसपी हिंदुजा, जीपी हिंदुजा और पीपी हिंदुजा समेत सभी आरोपियों को 64 करोड़ रुपये के दलाली मामले में बरी कर दिया गया था।

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