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गर्मियों के तापमान, जलवायु विसंगतियों की भविष्यवाणी के लिये आईआईएसईआर भोपाल ने बनाया मॉडल

By भाषा | Updated: July 20, 2021 16:26 IST

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नयी दिल्ली, 20 जुलाई ‘भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान’ (आईआईएसईआर) भोपाल के वैज्ञानिकों ने एक सांख्यिकीय मॉडल विकसित किया है जो गर्मियों में तापमान और भारत में विस्तृत जलवायु विसंगतियों का पूर्वानुमान व्यक्त कर सकता है। यह मॉडल पिछली सर्दी के मौसम के आंकड़ों का इस्तेमाल कर पूर्वानुमान बताता है।

मॉडल विकास और भविष्यवाणी अध्ययन के परिणाम हाल ही में ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ क्लाइमेटोलॉजी’ में प्रकाशित हुए हैं।

टीम के मुताबिक, दुनियाभर के अनुसंधान समूह अलग-अलग समय और स्थानिक (क्षेत्रीय और वैश्विक) पैमानों पर जलवायु पूर्वानुमान के लिये मॉडल विकसित करने में शामिल हैं, जो पूर्व में मिले आंकड़ों और जलवायु में बदलाव की भौतिक और गतिशील प्रक्रियाओं के बारे में वैज्ञानिक समझ का इस्तेमाल करते हैं।

आईआईएसईआर भोपाल में पृथ्वी एवं पर्यावरणीय विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर पंकज कुमार ने कहा, “जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग को परिस्थितिकी तंत्र, सामाजिक अर्थव्यवस्था और शायद खुद जीवन के लिये एक खतरे के तौर पर तेजी से पहचाना जा रहा है, ऐसे में बेहतर तैयारी के लिये मौसमी बदलाव को समझना और उसका पूर्वानुमान व्यक्त करने में सक्षम होना महत्वपूर्ण है।”

केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से वित्त पोषित आईआईएसईआर भोपाल की टीम का मॉडल भारत में गर्मी के मौसम (मार्च-अप्रैल-मई) के तापमान का पूर्वानुमान पिछले साल के सर्दियों (दिसंबर-जनवरी-फरवरी) के मौसम संबंधी आंकड़ों के आधार पर करता है।

यह मॉडल गर्मियों के तापमान का पूर्वानुमान व्यक्त करने के अलावा विभिन्न मौसमी पैमानों में संबंध और बीते 69 सालों में गतिशील रूप में उन्होंने कैसे विकास किया इसे समझने में भी मदद करता है।

आईआईएसईआर में शोधार्थी आदित्य कुमार दुबे ने बताया, “हमने गर्मी के मौसम में तापमान के पूर्वानुमान और विभिन्न मौसमी पैमानों के बीच संबंध को समझने के लिये ‘कैननिकल कोरिलेशन एनालिसिस’ नामक एक बहुरेखीय सांख्यिकीय तकनीक का उपयोग किया है।”

अनुसंधानकर्ताओं ने पूरे भारत में गर्मियों के मौसम के तापमान के पूर्वानुमान के लिये समुद्र की सतह के तापमान, समुद्र की सतह के दबाव, क्षेत्रीय हवा, बारिश और पिछली सर्दियों में हवा के अधिकतम, न्यूनतम और औसत तापमान जैसे मापदंडों का इस्तेमाल किया है।

इस अनुसंधान का नेतृत्व करने वाले कुमार ने कहा, “हमनें पाया है कि गर्मियों के तापमान में हाल के दशकों में महत्वपूर्ण रूप से वृद्धि हुई है, खास कर उत्तर भारत में।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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