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आईएसी विक्रांत ने पांच दिवसीय अपनी पहली समुद्री यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की

By भाषा | Updated: August 8, 2021 19:09 IST

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नयी दिल्ली, आठ अगस्त भारत के पहले स्वदेशी विमान वाहक (आईएसी) विक्रांत ने पांच दिवसीय अपनी पहली समुद्री यात्रा रविवार को सफलतापूर्वक पूरी कर ली और इस 40,000 टन वजनी युद्धपोत की प्रमुख प्रणालियों का प्रदर्शन संतोषजनक पाया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

इस विमानवाहक पोत ने समुद्र में अहम परीक्षण के लिए बुधवार को यात्रा शुरू की थी। 23,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुए ‘विक्रांत’ को अगले साल अगस्त तक नौसेना में शामिल करने की योजना है।

भारतीय नौसेना के प्रवक्ता कमांडर विवेक मधवाल ने कहा, ‘‘स्वदेशी विमान वाहक (आईएसी) 'विक्रांत' ने अपनी पहली समुद्री यात्रा आज सफलतापूर्वक पूरी की। परीक्षण योजना के अनुसार आगे बढ़े और प्रणाली के मानक संतोषजनक साबित हुए।’’

उन्होंने बताया कि समुद्री परीक्षण के दौरान पोत के ढांचे, मुख्य प्रणोदन, ऊर्जा निर्माण एवं वितरण (पीजीडी) तथा सहायक उपकरणों सहित इसके प्रदर्शन का परीक्षण किया गया।

कमांडर मधवाल ने कहा, ‘‘परीक्षण योजना के अनुसार आगे बढ़े हैं और प्रणाली के मानक संतोषजनक साबित हुए हैं जिनकी नौसेना की दक्षिणी कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल ए के चावला ने अंतिम दिन समीक्षा की।’’

उन्होंने कहा कि ‘विक्रांत’ को भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ 'आजादी का अमृत महोत्सव' के उपलक्ष्य में होने वाले समारोहों के साथ नौसेना में शामिल करने का लक्ष्य रखा जा रहा है।

इस युद्धपोत से मिग-29 के लड़ाकू विमान, कामोव-31 हेलीकॉप्टर, एमएच-60आर बहु-भूमिका हेलीकॉप्टर उड़ान भर सकेंगे। इसमें 2,300 से अधिक डिब्बे हैं, जिन्हें चालक दल के लगभग 1,700 लोगों के लिए डिजाइन किया गया है। इनमें महिला अधिकारियों के लिए विशेष कैबिन भी शामिल हैं।

गौरतलब है कि इसी नाम के एक जहाज ने 50 साल पहले 1971 के युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी।

यह विमानवाहक जहाज करीब 262 मीटर लंबा और 62 मीटर चौड़ा है। इसकी ऊंचाई 59 मीटर है। इसका निर्माण 2009 में शुरू हुआ था। इसे कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने निर्मित किया है।

कमांडर मधवाल ने कहा कि कोविड महामारी के कारण चुनौतियों का सामना करने के बावजूद पहले परीक्षणों का सफलतापूर्वक पूरा होना बड़ी संख्या में इसके हितधारकों के समर्पित प्रयासों का प्रमाण है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह मील का पत्थर है और एक ऐतिहासिक घटना है। इसे 2022 में नौसेना में शामिल किए जाने से पहले समुद्र में कई परीक्षण किए जाएंगे।’’

भारत के पास अभी सिर्फ एक विमानवाहक पोत ‘आईएनएस विक्रमादित्य’ है।

भारतीय नौसेना, हिंद महासागर क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की चीन की बढ़ती कोशिशों के मद्देनजर अपनी संपूर्ण क्षमता महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने पर जोर दे रही है। हिंद महासागर, देश के रणनीतिक हितों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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