लाइव न्यूज़ :

हाइब्रिड माध्यम काम नहीं कर पा रहा, अदालतों को शारीरिक उपस्थिति के साथ काम करना होगा: न्यायालय

By भाषा | Updated: October 8, 2021 16:45 IST

Open in App

नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि सुनवाई का ‘हाइब्रिड’ माध्यम कारगर नहीं है और सामान्य स्थिति बहाल करनी होगी तथा अदालतों को शारीरिक उपस्थिति के साथ काम करना होगा क्योंकि मामलों की वीडियो कांफ्रेंस से सुनवाई सामान्य स्थिति नहीं हो सकती।

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने कहा, ‘‘यहां अदालत में बैठना और स्क्रीन पर देखना हमें खुशी नहीं दे रहा है।’’

पीठ ने कहा कि वह चाहती है कि अदालतें लोगों के लिए खोली जाए और न्याय सभी नागरिकों की पहुंच के दायरे में हो।

न्यायालय ने कहा, ‘‘हमने हाईब्रिड माध्यम से काम करने की कोशिश की। लोग अदालतों में नहीं आ रहे हैं। सामान्य स्थिति बहाल करनी होगी और अदालतों को शारीरिक उपस्थिति के साथ काम करना होगा।’’

इस विषय में नोटिस जारी कर चुका न्यायालय गैर सरकारी संगठन नेशनल फेडरेशन आफ सोसाइटिज फॉर फास्ट जस्टिस और जूलियो रिबेइरो, शैलेश आर गांधी जैसे प्रख्यात नागरिकों की एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है।

याचिका के जरिए वर्चुअल कोर्ट सुनवाई वादियों के लिए एक मूल अधिकार घोषित करने का अनुरोध किया गया है।

पीठ ने याचिकाकर्ताओं को सुझाव देने को कहा। साथ ही यह भी कहा कि वह चार सप्ताह बाद अगली तारीख पर इस बारे में विचार करेगी।

सुनवाई की शुरूआत में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज स्वरूप ने दलील दी कि हाईब्रिड माध्यम को सभी नागरिकों के लिए न्याय तक पहुंच के हिस्सा के तौर पर जारी रखा जाए।

पीठ ने कहा, ‘‘क्या आपने हमारे द्वारा बीती रात जारी की गई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) देखी है? तब हमें एसओपी को रद्द करना पड़ेगा।

न्यायालय ने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि अदालतें सभी लोगों के लिए खुले और न्याय तक उनकी पहुंच हो। सीआरपीसी और आईपीसी के प्रावधान हैं कि न्याय खुला होना चाहिए। यह कहना अलग चीज है कि अदालत की कार्यवाही का प्रसारण होना चाहिए और यह कहना दूसरी चीज है कि कोविड-19 से निजात मिलने के बाद, इस संस्था को बंद कर देना चाहिए क्योंकि वर्चुअल सुनवाई नागरिकों का मूल अधिकार है, जिसका मतलब है कि लोग अदालत नहीं आएंगे। ’’

न्यायालय ने कहा, ‘‘आप कहना चाहते हैं कि न्यायाधीश अदालत कक्ष में बैठै और वकील मसूरी, मुक्तेश्वर, गोवा और लंदन से दलील पेश करें...।’’

पीठ ने कहा कि जब एक वकील शारीरिक रूप से अदालत कक्ष में उपस्थित होता है और वह हमारी आंखों में देख कर दलील देता है तो यह कहीं अधिक प्रभावी होता है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Open in App

संबंधित खबरें

क्रिकेटगुजरात टाइटंस की पहली जीत?, दिल्ली कैपिटल्स को 1 रन से हराया, बटलर, गिल और सुंदर ने 104 गेंद में कूटे 177 रन, 12 छक्के-13 चौके

विश्वलेबनान में इजरायली हमला, 254 लोगों की मौत और 700 घायल, युद्धविराम के बावजूद अटैक जारी?

भारतनारी शक्ति वंदन अधिनियमः 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित और 2029 के आम चुनाव में लागू?, लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी मंजूरी

क्रिकेटलखनऊ सुपर जाइंट्स के खिलाफ गेंदबाजी करेंगे कैमरन ग्रीन, डीसी के खिलाफ 11 अप्रैल को खेलेंगे ब्रेविस?

भारतरेलवे में 8.85 प्रतिशत लोको पायलट ने लगातार 12 घंटे से अधिक काम किया?, रेलवे संघ ने कहा-46.96 प्रतिशत ने 9 घंटे शिफ्ट किए?

भारत अधिक खबरें

भारतपटना में महिलाएं-लड़कियां सरेआम पीती हैं सिगरेट, पुरुष खड़े होकर मुंह देखते रहते?, लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव बोले- बिहार में शराबबंदी पूरी तरह फेल

भारतमहाराष्ट्र लोक सेवा आयोग परिणाम: 624 अंक के साथ टॉप, सोलापुर के विजय नागनाथ लामका ने किया कारनामा?, 601 अंक लेकर आरती परमेश्वर जाधव ने महिला वर्ग में मारी बाजी?

भारतममता ने कहा- CRPF की 200 बटालियन आ रही, किचन से समान ले कर मारो?, अभिषेक कह रहे- भाजपा समर्थकों का हाथ-पैर तोड़ो, चुनाव आयोग के पास बीजेपी, वीडियो

भारतखरमास खत्म होने के बाद 15-16 अप्रैल को बिहार में नया मुख्यमंत्री?, सीएम नीतीश कुमार ने की अंतिम बार कैबिनेट की अध्यक्षता!, 10 अप्रैल को राज्यसभा में शपथ ग्रहण?

भारतबिहार के अस्पतालों में डॉक्टर, रुई और सुई नहीं, कहीं दवा नहीं तो बेड नहीं?, तेजस्वी यादव बोले-अमंगल दोष से ग्रसित स्वास्थ्य विभाग