Holi 2026: बिहार के सहरसा जिले में जाति धर्म का भेदभाव भूलकर होली के दिन लोग खेलते हैं "घुमौर होली," एक-दूसरे के कंधे पर चढ़कर खेलते हैं होली

By एस पी सिन्हा | Updated: March 4, 2026 06:36 IST2026-03-04T06:36:33+5:302026-03-04T06:36:33+5:30

बताया जाता है कि बनगांव की घुमौर होली का इतिहास 200 साल पुराना है। संत लक्ष्मीनाथ गोसाईं ने 1810 में शुरू की थी। होली की यह परंपरा आज भी कायम है और सालों के बाद आज भी सांप्रदायिक एकता का प्रतीक है।

Holi 2026: In Bihar's Saharsa district, people forget caste and religion and play "Ghumour Holi" on Holi day | Holi 2026: बिहार के सहरसा जिले में जाति धर्म का भेदभाव भूलकर होली के दिन लोग खेलते हैं "घुमौर होली," एक-दूसरे के कंधे पर चढ़कर खेलते हैं होली

Holi 2026: बिहार के सहरसा जिले में जाति धर्म का भेदभाव भूलकर होली के दिन लोग खेलते हैं "घुमौर होली," एक-दूसरे के कंधे पर चढ़कर खेलते हैं होली

पटना: वृन्दावन-मथुरा की लठमार होली की चर्चा तो सब लोग जानते हैं, लेकिन बिहार में एक अनोखा होली खेली जाती है, जिसका नाम है "घुमौर होली।" बिहार में सहरसा जिले के बनगांव में लोग जाति धर्म का भेदभाव भूलकर होली के दिन गांव के अलग-अलग हिस्सों से अलग-अलग टोली बनाकर मदमस्त हो ‘होली है।’ यह कहते हुए एक-दूसरे के कंधे पर चढ़कर होली खेलते हैं। बनगांव में हिंदू, मुस्लिम सहित सभी जाति के लोग सभी बैर भुलाकर होली खेलते हैं। ऊंच-नीच, छूत-अछूत कोई भी भेद होली में यहां नहीं दिखता है। होली खेल रहे लोग बाबाजी कुटी जाकर गोसाईं जी सहित अन्य देवताओं को प्रणाम कर इसका समापन करते हैं।

बताया जाता है कि बनगांव की घुमौर होली का इतिहास 200 साल पुराना है। संत लक्ष्मीनाथ गोसाईं ने 1810 में शुरू की थी। होली की यह परंपरा आज भी कायम है और सालों के बाद आज भी सांप्रदायिक एकता का प्रतीक है। होली में लोग सभी जाति और धर्म के लोग शामिल होकर एकसाथ इस पर्व को मनाते हैं। गांव में सभी बंगले पर होली खेलने के बाद हजारों लोग भगवती स्थान परिसर पहुंचते हैं, जहां एक-दूसरे के कंधे पर चढ़ गले मिलकर होली खेलते हैं। 

होली वाले दिन यह नजारा बहुत ही अद्भुत दिखता है। भगवती मंदिर के ऊपर लगे फव्वारे से पानी की बारिश होती रहती है और नीचे हजारों की संख्या में लोग गोल-गोल घूमते रहते हैं। इसी कारण इसे घुमौर होली कहा जाता है। सामान्य तौर से फाल्गुन पूर्णिमा को सम्मत जलाने और चैत्र प्रतिपदा को होली खेलने की परंपरा है। लेकिन बनगांव में एक दिन पहले यानी पूर्णिमा के दिन ही होली खेली जाती है। 

होली खेलने के बाद शास्त्र में दिए गए समय के अनुसार ही सम्मत जलाया जाता है। इस बार शहर में चार मार्च को होली मनाई जाएगी, जबकि बनगांव में यह त्यौहार दो मार्च को ही मनाया जाएगा। बनगांव के होली के महत्व को देखते हुए बिहार सरकार का कला संस्कृति विभाग यहां तीन दिवसीय होली महोत्सव का आयोजन करता है।

Web Title: Holi 2026: In Bihar's Saharsa district, people forget caste and religion and play "Ghumour Holi" on Holi day

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