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उच्च न्यायालय ने इंडियाबुल्स कंपनी की निदेशक से भूषण की याचिका पर जवाब देने को कहा

By भाषा | Updated: February 1, 2021 15:43 IST

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नयी दिल्ली, एक फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने वकील प्रशांत भूषण की याचिका पर इंडियाबुल्स समूह की सहायक कंपनियों में से एक की निदेशक से सोमवार को जवाब मांगा। भूषण ने याचिका दायर कर अपने खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि के मामले को रद्द करने की मांग की है।

समूह के कामकाज और इसके प्रवर्तकों एवं निदेशकों के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित तौर पर मानहानि वाले बयान देने के लिए भूषण के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

अदालत ने भूषण को निचली अदालत में पेश होने से छूट दे दी जो मानहानि शिकायत पर सुनवाई कर रही है।

न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने शिकायतकर्ता भव्या नरवाल को नोटिस जारी किया और उनसे याचिका पर जवाब मांगा। वह इंडियाबुल्स वेंचर कैपिटल मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक हैं।

उच्च न्यायालय ने मामले में अगली सुनवाई की तारीख 12 जुलाई तय की है।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मामले के तथ्यों एवं परिस्थितियों को देखते हुए प्रतिवादी (नरवाल) को सुनवाई की अगली तारीख 12 जुलाई के लिए नोटिस जारी किया जाए। बहरहाल, याचिकाकर्ता (भूषण) को निचली अदालत में पेश होने से छूट दी जाती है।’’

उच्च न्यायालय भूषण की याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें शिकायत पर रोहतक की एक अदालत द्वारा अक्टूबर, 2019 के समन आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया गया है। इसे उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद 2020 में दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित किया गया।

उन्होंने नौ दिसंबर 2020 को पटियाला हाउस अदालत के आदेश को भी चुनौती दी जिसने उन्हें पेश होने के लिए नोटिस भेजा था। मामला अब इसी अदालत में चल रहा है।

भूषण का प्रतिनिधित्व करने वाली वकील कामिनी जायसवाल ने कहा कि यह मामला याचिकाकर्ता को केवल प्रताड़ित करने के लिए है और न्याय को बाधित करने के लिए मानहानि की शिकायत दर्ज की गई।

वकील नेहा राठी के मार्फत दायर याचिका में कहा गया है कि शिकायत दर्ज कराने के लिए नरवाल का कोई अधिकार नहीं बनता है क्योंकि वह न तो पीड़ित हैं और न ही भूषण के 14 सितंबर 2019 के ट्वीट में उनका जिक्र है।

याचिका में कहा गया है, ‘‘जनहित में ट्वीट किया गया और उस कंपनी का भी जिक्र नहीं है जिसमें शिकायतकर्ता काम करती हैं। साथ ही भव्या नरवाल आईबीएचएफएल से सीधे जुड़ी हुई नहीं हैं बल्कि वह इंडियाबुल्स वेंचर कैपिटल मैनेजमेंट से जुड़ी हुई हैं जो आईबीएचएफएल की ऐसे सैकड़ों अन्य सहयोगी कंपनियों की तरह है। ट्वीट में केवल आईबीएचएफएल के प्रवर्तकों का जिक्र है। इस प्रकार अगर कोई पीड़ित है तो केवल आईबीएचएफएल के प्रवर्तक, जिन्होंने याचिकाकर्ता के खिलाफ मानहानि वाली कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है। इसलिए वर्तमान शिकायत को रद्द किया जाना चाहिए।’’

वर्ष 2019 में की गई शिकायत में आरोप लगाया गया कि भूषण ने इंडियाबुल्स समूह के कामकाज, इसके प्रवर्तकों, अधिकारियों और निदेशकों के बारे में सोशल मीडिया के मंच ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर मानहानि वाले बयान दिए।

आरोप है कि भूषण ने इंडियाबुल्स समूह के साथ ही इसके प्रवर्तकों, निदेशकों और नरवाल सहित अन्य अधिकारियों की प्रतिष्ठा को काफी नुकसान पहुंचाया है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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