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स्वास्थ्य मंत्री दक्षिण पूर्व एशिया में टीबी समाप्ति के प्रयासों में तेजी लाने के लिए प्रतिबद्ध

By भाषा | Updated: October 27, 2021 17:46 IST

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नयी दिल्ली, 27 अक्टूबर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों ने क्षय रोग के उन्मूलन के प्रयासों को पुन: आरंभ करने और उनमें तेजी लाने को लेकर मंगलवार को प्रतिबद्धता जताई।

कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण सेवाओं के बाधित होने और क्षेत्र में क्षय रोग के मामले बढ़ने के मद्देनजर यह प्रतिबद्धता जताई गई।

डब्ल्यूएचओ ने एक बयान में कहा कि 2020 में क्षय रोग के 43 लाख मामले सामने आए और वैश्विक स्तर पर सामने आए क्षय रोग के सभी नए मामलों में से 43 प्रतिशत मामले इस क्षेत्र में सामने आए।

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम गेब्रेयेसस ने एक उच्चस्तरीय डिजिटल बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि क्षय रोग की रोकथाम और उपचार संभव है, इसके बावजूद इससे हर साल 10 लाख से अधिक लोगों की मौत होती है। इनमें से आधे लोगों की मौत डब्ल्यूएचओ दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में होती है।

इस बैठक का आयोजन भारत, इंडोनेशिया और नेपाल के स्वास्थ्य मंत्रालयों और डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय ने किया था।

डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह ने बैठक का आरंभ करते हुए कहा कि क्षय रोग की रोकथाम, निदान और उपचार के लिए तत्काल कदम उठाए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वंचित वर्ग के लोगों में पर्याप्त पोषण के अभाव की समस्या से विशेष रूप से निपटते हुए सामाजिक सुरक्षा के कदमों को बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।

दिन भर चली बैठक में स्वास्थ्य मंत्रियों ने ‘प्रतिबद्धता को लेकर मंत्रालय के वक्तव्य’ पर हस्ताक्षर किए और आवश्यक कदमों को उठाने और प्रयासों को तेज करने को लेकर सर्वसम्मति से प्रतिबद्धता जताई।

मंत्रियों ने क्षय रोग को समाप्त करने के लिए उच्चतम राजनीतिक स्तर के नेतृत्व में राष्ट्रीय कार्यक्रम बनाकर बहु-क्षेत्रीय और समग्र समाज की भागीदारी वाला दृष्टिकोण अपनाने और लक्ष्यों पर निकटता से नजर रखने को लेकर प्रतिबद्धता जताई।

डब्ल्यूएचओ ने एक बयान में कहा कि मंत्रियों ने इस रोग के उन्मूलन के लिए बजट और मानव संसाधन आवंटन भी बढ़ाए जाने पर सहमति जताई। यह अनुमान है कि क्षेत्र में क्षय रोग को समाप्त करने के लक्ष्य से आवश्यक कदमों को लागू करने के लिए सालाना तीन अरब डॉलर की आवश्यकता होगी।

बयान में कहा गया कि स्वास्थ्य मंत्रियों ने क्षय रोग संबंधी देखभाल सेवाओं के साथ-साथ सामाजिक और वित्तीय सुरक्षा को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रतिबद्धता जताई। इसमें कहा गया कि गरीबी और कुपोषण क्षय रोग को बढ़ावा देने वाले सबसे बड़े कारण हैं।

साझेदार एजेंसियों ‘ग्लोबल फंड’, ‘स्टॉप टीबी पार्टनरशिप’, जापान अंतराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी, एडीबी, विश्व बैंक और अमेरिकी दूतावास के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में भाग लिया।

मृत्यु दर में कमी के लिए ‘2020 एंड टीबी’ के लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में बांग्लादेश, म्यांमा और थाईलैंड के प्रयास पटरी पर थे तथा म्यांमा भी मामलों की दर में कमी करने की राह पर अग्रसर था, लेकिन महामारी ने स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को बाधित करके और गरीबी एवं कुपोषण जैसे सामाजिक कारकों को बढ़ाकर क्षय रोग को काबू करने की दिशा में हुई प्रगति को बेकार कर दिया।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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