राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत?, हरियाणा कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष राम किशन गुर्जर ने दिया इस्तीफा, वजह
By सतीश कुमार सिंह | Updated: March 17, 2026 17:14 IST2026-03-17T16:20:51+5:302026-03-17T17:14:08+5:30
दो सीटों पर मतगणना आधी रात के बाद तक चली, जिसके बाद भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के करमवीर सिंह बौध हरियाणा से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए।

राहुल गांधी।
चंडीगढ़ः हरियाणाकांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राम किशन गुर्जर ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। कल यानी 16 मार्च को कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव में जीत हासिल की थी और आज पार्टी में विकेट गिर गया।हरियाणा राज्यसभा चुनाव में मतगणना आधी रात के बाद भी जारी रही थी। भाजपा के भाटिया और कांग्रेस के बौध विजयी रहे थे। इस बीच कांग्रेस के 5 विधायकों ने 'क्रॉस-वोटिंग' की। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि दोनों पक्षों द्वारा मतदान की गोपनीयता भंग करने के आरोपों के बाद, बहुचर्चित दो सीटों पर मतगणना आधी रात के बाद तक चली, जिसके बाद भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर सिंह बौद्ध हरियाणा से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस हारते-हारते बची। गुर्जर राज्य के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेहद करीबी है।
Haryana Congress Working President Ram Kishan Gujjar resigned from Congress. pic.twitter.com/CEs3mMyLJK
— ANI (@ANI) March 17, 2026
राम किशन गुर्जर की पत्नी शैली चौधरी पर 'क्रॉस-वोटिंग' के आरोप लगे हैं। हरियाणा में राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार की चुनौती को नाकाम करते हुए एक सीट पर कब्जा जमा लिया। कांग्रेस के उम्मीदवार कर्मवीर सिंह बौद्ध ने कड़े मुकाबले वाले चुनाव में जीत हासिल की, जिसमें सत्तारूढ़ भाजपा के संजय भाटिया ने भी जीत दर्ज की।
कांग्रेस ने चुनाव में बीजेपी पर ‘वोट चोरी’ तथा लोकतंत्र की हत्या करने के प्रयास का आरोप लगाया और कहा कि ‘क्रॉस-वोटिंग’ करने वाले पार्टी विधायकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और आने वाले समय में जनता भी जवाब देगी। पार्टी सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने यह भी कहा कि भाजपा के तमाम हथकंडों के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर सिंह बौद्ध चुनाव जीत गए और भाजपा के मंसूबों पर पानी फिर गया।
कांग्रेस के 37 विधायक होने के बावजूद बौध को जीत के लिए आवश्यक संख्या से तीन कम, केवल 28 प्रथम वरीयता वोट ही मिल सके। इनमें से पांच विधायकों ने क्रॉस-वोटिंग की, जबकि चार कांग्रेस विधायकों और एक भाजपा विधायक के वोट अमान्य घोषित कर दिए गए। कांग्रेस के पास पर्याप्त विधायक होने के बावजूद, उनकी जीत अधर में लटकी रही।
भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सतीश नंदाल के निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने से भाटिया की निश्चित जीत की राह में एक नया मोड़ आ गया। भाजपा ने नंदाल का समर्थन इस उम्मीद में किया था कि 37 सदस्यीय कांग्रेस के क्रॉस-वोटिंग से उसे झटका लगेगा। जीतने के लिए उम्मीदवार को 31 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता थी और भाजपा के पास तीन निर्दलीय विधायकों के समर्थन के अलावा 48 विधायक थे। दो आईएनएलडी विधायकों ने मतदान नहीं किया।